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Iran crisis: थरूर के बाद एक और कांग्रेसी नेता ने की भारतीय कूटनीति की तारीफ, सरकार की नीति को बताया संतुलित

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: Rahul Kumar Updated Thu, 02 Apr 2026 07:54 PM IST
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सार

रिष्ठ कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने पश्चिम एशिया में जारी संकट को लेकर भारत की कूटनीतिक रणनीति की सराहना की है। उनका कहना है कि इस संतुलित रुख की वजह से भारत संभावित मुश्किल हालात से बचने में सफल रहा है।
 

Anand Sharma hails India’s handling of West Asia crisis
आनंद शर्मा, वरिष्ठ कांग्रेस प्रवक्ता - फोटो : ANI
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विस्तार

पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान से अलग राय रखते हुए पश्चिम एशिया संकट में भारत की कूटनीति की तारीफ की है। इससे पहले कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी पश्चिम एशिया संकट को लेकर भारत सरकार की कूटनीति की तारीफ की थी।  शर्मा ने कहा कि मौजूदा हालात में भारत को आगे बढ़कर ग्लोबल साउथ और अपने रणनीतिक साझेदार देशों को साथ लाना चाहिए, ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए सामूहिक प्रयास किए जा सकें।

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भारत एक बड़ी चुनौती का सामना कर रहा- शर्मा
आनंद शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई पोस्ट करते हुए पश्चिम एशिया संकट पर राय रखी। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमले और उसके जवाब में ईरान की कार्रवाई के बाद पश्चिम एशिया की स्थिति बहुत गंभीर हो गई है। इससे पूरी दुनिया में अस्थिरता और आर्थिक संकट पैदा हो गया है। भारत सहित वे सभी देश जो कच्चा तेल, गैस और एलपीजी के लिए मध्य-पूर्व और खाड़ी देशों पर निर्भर हैं, एक बड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य से सप्लाई पर खतरा है। हम इतिहास के सबसे बड़े ऊर्जा संकटों में से एक का सामना कर रहे हैं। यह मुश्किल समय हमारी नीतियों और कूटनीति दोनों की परीक्षा ले रहा है। भारत के खाड़ी देशों के साथ पुराने संबंध हैं और ईरान के साथ सांस्कृतिक रिश्ते भी हैं।
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'इस संकट में भारत की कूटनीति समझदारी और संतुलन से भरी रही'
उन्होंने लिखा कि तेल और गैस के अलावा, लगभग 200 अरब डॉलर का व्यापार, 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा और विदेश से आने वाली लगभग 60 प्रतिशत कमाई (रेमिटेंस) भी ध्यान में रखना जरूरी है। इस संकट में भारत की कूटनीति समझदारी और संतुलन से भरी रही है, जिससे बड़े खतरों से बचाव हुआ है। भारत की प्रतिक्रिया राष्ट्रीय एकता और सहमति के साथ होनी चाहिए। सरकार ने सभी राजनीतिक दलों की बैठक बुलाकर उन्हें स्थिति और फैसलों की जानकारी दी है। यह बातचीत जारी रहनी चाहिए। इस समय देशहित में एकजुट और समझदारी भरा रवैया बहुत जरूरी है।

उन्होंने आगे लिखा कि इस युद्ध ने ऊर्जा, अर्थव्यवस्था और वैश्विक सुरक्षा की समस्याओं को और बढ़ा दिया है। सप्लाई चेन में रुकावट, बाजारों में गिरावट और रुपये की कमजोरी जैसी चुनौतियां सामने हैं, जिनका तुरंत और लंबे समय तक समाधान करना होगा। इस संकट की गंभीरता को समझना जरूरी है। दुनिया चुप नहीं रह सकती जब वैश्विक व्यवस्था और नियम टूट रहे हों। भारत हमेशा शांति और नैतिकता के लिए जाना जाता है। आज बहुत कुछ दांव पर लगा है, खासकर युवाओं का भविष्य। भारत को कोशिश करनी चाहिए कि वह ग्लोबल साउथ और अपने साझेदार देशों को साथ लेकर शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए काम करे।

ये भी पढ़ेँ: पश्चिम एशिया संकट: US ने ईरान के सबसे उंचे पुल को हवाई हमले में किया तबाह, तेहरान का करज से संपर्क टूटा

इससे पहले पार्टी के मौजूदा सांसद शशि थरूर और मनीष तिवारी, दोनों ने ही पश्चिम एशिया में भारत की विदेश नीति को सही ठहराया और खाड़ी देशों में रहने वाले विशाल भारतीय समुदाय के हितों की रक्षा करते हुए स्थिति के कुशल प्रबंधन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया था।
इनपुट--आईएएनएस

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