CAIT: भारत के व्यापार व MSME पर पश्चिम एशिया संकट का असर, कैट ने की राहत उपायों और टास्क फोर्स के गठन की मांग
पश्चिम एशिया संकट से एमएसएमई व व्यापार प्रभावित होने पर कैट ने सरकार से राहत, टास्क फोर्स और विशेष योजनाओं की मांग की। कच्चे तेल महंगाई, आपूर्ति बाधा और निर्यात लागत बढ़ने से उद्योगों पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई।
विस्तार
पश्चिम एशिया संकट का असर अब भारत के व्यापार व एमएसएमई सेक्टर पर दिखने लगा है। इसके मद्देनजर, कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने केंद्र सरकार से राहत उपायों और टास्क फोर्स के गठन की मांग की है। भाजपा सांसद और कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने सरकार से आग्रह किया है कि पश्चिम एशिया संकट के चलते एमएसएमई एवं छोटे व्यापारियों को ऋण चुकौती में अतिरिक्त समय एवं राहत दी जाए। प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष क्रेडिट गारंटी योजना, गंभीर रूप से प्रभावित उद्योगों के लिए ब्याज सब्सिडी, ईंधन एवं कच्चे माल की कीमतों की निरंतर निगरानी, स्थिरीकरण उपाय तथा निर्यातकों के लिए फ्रेट, बीमा सहायता एवं शीघ्र रिफंड सुनिश्चित किया जाए। उक्त राहत एवं उपायों से कारोबारी, अपने व्यापार में असुविधा से बच सकेंगे।
व्यापार जगत में विश्वास बना है
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन को छह अप्रैल को भेजे गए एक पत्र में खंडेलवाल ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सक्रिय एवं निर्णायक नेतृत्व, उनकी सतत निगरानी और समयबद्ध हस्तक्षेप के कारण वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की आपूर्ति श्रृंखला, मजबूत और स्थिर बनी हुई है। स्रोतों के विविधीकरण, लॉजिस्टिक्स ढांचे के सुदृढ़ीकरण, संतुलित वित्तीय प्रबंधन तथा आवश्यक वस्तुओं की निरंतर निगरानी जैसे कदमों ने देश में उपलब्धता और कीमतों को नियंत्रित रखा है। इससे व्यापार जगत में विश्वास बना है।
इन क्षेत्रों पर पड़ सकता है नकारात्मक प्रभाव
खंडेलवाल के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि, आपूर्ति बाधाएं और लागत में बढ़ोतरी से कई क्षेत्रों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इनमें प्रमुख रूप से पेट्रोकेमिकल्स, फार्मास्यूटिकल्स, प्लास्टिक, टेक्सटाइल, उर्वरक, केमिकल्स, ऑटो कंपोनेंट्स, लॉजिस्टिक्स और अन्य ऊर्जा-आधारित उद्योग शामिल हैं। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया ने कहा कि निर्यातकों को फ्रेट और बीमा लागत में वृद्धि, शिपमेंट में देरी, रूट परिवर्तन तथा भुगतान संबंधी अनिश्चितताओं जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इससे उनकी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित होने के आसार हैं। व्यापार और उद्योग जगत में, विशेषकर एमएसएमई क्षेत्र में बढ़ती लागत, कार्यशील पूंजी पर दबाव, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, मुनाफे में कमी और ऋण भार में वृद्धि को लेकर गंभीर चिंता है।
ऐसी टास्क फोर्स के गठन का मांग
दोनों व्यापारी नेताओं ने सरकार से 'वेस्ट एशिया इम्पैक्ट असेसमेंट एवं रिस्पॉन्स टास्क फोर्स' के गठन का सुझाव दिया है। इसमें संबंधित मंत्रालयों, आरबीआई, व्यापार संगठनों एवं विशेषज्ञों को शामिल किया जाए, ताकि स्थिति का लगातार आकलन कर समय पर नीतिगत निर्णय लिए जा सकें।
खंडेलवाल ने विश्वास जताया कि समय पर उठाए गए ठोस कदमों से भारत इस वैश्विक चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना करेगा। व्यापार एवं उद्योग की स्थिरता बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि 'समय पर उठाए गए कदम ही आर्थिक स्थिरता की गारंटी हैं'।