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मालदा घटना पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: हाईकोर्ट सीजे का फोन न उठाने पर मुख्य सचिव को लगाई फटकार, कहा- माफी मांगो

पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Rahul Kumar Updated Mon, 06 Apr 2026 06:18 PM IST
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सार

सुप्रीम कोर्ट ने मालदा में एसआईआर प्रक्रिया में लगे न्यायिक अधिकारियों के घेराव और हमले के मामलों की जांच एनआईए को सौंप दी। कोर्ट ने कहा कि घटना पूर्व नियोजित और प्रेरित थी और इससे बंगाल प्रशासन की विश्वसनीयता कमजोर हो रही है। साथ ही, शीर्ष कोर्ट ने मुख्य सचिव को कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के फोन कॉल न उठाने पर फटकार लगाई। क्या है पूरा मामला, पढ़िए रिपोर्ट-

SC pulls up West Bengal chief secretary for not taking calls of Calcutta HC chief justice over Malda incident
मालदा मामला - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों के घेराव की घटना को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को कड़ी फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल पुलिस को मालदा के मामले से जुड़े दस्तावेज एनआईए को सौंपने का निर्देश दिया और कहा कि स्थानीय पुलिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

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एनआईए करेगी पूछताछ
सुप्रीम कोर्ट ने अपने विशेष अधिकार अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए मालदा की घटना से जुड़े सभी मामलों की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दी है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि इस मामले में पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए 26 लोगों से अब एनआईए पूछताछ करेगी।
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सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का फोन नहीं उठाया, जो कि बेहद गंभीर लापरवाही है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे इस मामले में मुख्य न्यायाधीश से माफी मांगें।

इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य की नौकरशाही पर भी तीखी टिप्पणी की। चीफ जस्टिस (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची व जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि पश्चिम बंगाल प्रशासन की विश्वसनीयता कमजोर हो रही है और राजनीति सचिवालय और सरकारी दफ्तरों में घुस रही है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मालदा घटना पूर्व नियोजित और प्रेरित थी, जिसमें न्यायिक अधिकारियों को घंटों घेरा गया। कोर्ट ने एनआईए को उन 26 लोगों से पूछताछ करने का आदेश दिया, जिन्हें राज्य पुलिस ने गिरफ्तार किया है। 

कोर्ट ने बंगाल के मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला को फटकार लगाते हुए कहा कि उन्होंने घटना वाले दिन एक अप्रैल को कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के फोन कॉल नहीं उठाए। कोर्ट ने मुख्य सचिव से माफी मांगने को कहा। शीर्ष कोर्ट ने यह भी कहा कि यह जिला प्रशासन की विफलता को दर्शाता है। 

ये भी पढ़ें: बंगाल SIR: सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची अपडेट करने के लिए तय की एक दिन की समय सीमा, ट्रिब्यूनल को भी निर्देश

एसआईआर प्रक्रिया में तैनात थे 700 न्यायिक अधिकारी
700 न्यायिक अधिकारी पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड से एसआईआर प्रक्रिया में तैनात थे, जो 60 लाख से अधिक मतदाताओं के आपत्तियों और दावों का निपटारा कर रहे थे। 

सुप्रीम कोर्ट का एसआईआर न्यायाधिकरणों को आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची अपडेट के लिए एक दिन की समयसीमा तय की और एसआईआर न्यायाधिकरणों को दस्तावेजों को फिर से देखने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा, हमने न्यायाधिकरणों से अनुरोध किया है कि वे पूरी दस्तावेजी प्रक्रिया को फिर से देखें, जिसमें न्यायिक अधिकारियों के कारण भी शामिल हैं, ताकि किसी भी शक को दूर किया जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा, हमने उनसे अनुरोध किया है कि पक्षकारों को निष्पक्ष सुनवाई दी जाए। 

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