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पुलिस हिरासत में मौत का मामला: मदुरै कोर्ट ने नौ पुलिसकर्मियों को दिया मृत्युदंड, पिता-पुत्र से हुई थी बेरहमी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मदुरै। Published by: Nirmal Kant Updated Mon, 06 Apr 2026 07:16 PM IST
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सार

Tamil Nadu: मदुरै की एक अदालत ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पुलिस हिरासत में पिता-पुत्र की मौत के मामले में नौ पुलिसकर्मियों को सजा-ए-मौत सुनाई है। पूरा मामला क्या था और पीड़ित पक्ष, सत्तारूढ़ द्रमुक और अन्य ने कोर्ट के फैसले पर क्या कहा, पढ़िए रिपोर्ट-

Death sentence for 9 cops who tortured and killed Benniks and Jeyaraj in Sathankulam
हिरासत में पिता-पुत्र की मौत के मामले में नौ पुलिसकर्मियों को मृत्युदंड - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार

मदुरै की जिला अदालत ने सोमवार को सातांकुलम में हिरासत में मौत के मामले में दोषी पाए गए नौ पुलिस कर्मियों को मृत्युदंड सुनाया। अदालत ने कहा कि यह मामला 'दुर्लभतम' श्रेणी का है। इन पुलिसकर्मियों को जून 2020 में पी. जेयराज और उनके बेटे जे. बेनिक्स की हिरासत में हत्या और यातना के मामले में दोषी पाया गया।  
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फैसला सुनाते हुए जज ने क्या कहा?
जज मुथुकुमारन ने कहा, यदि आम नागरिक ने यह अपराध किया होता, तो सामान्य सजा दी जा सकती थी। लेकिन अपराध पुलिस ने किया है। इसलिए साधारण सजा नहीं दी जा सकती। अदालत ने कहा कि यह हिरासत में हिंसा का स्पष्ट उदाहरण है। साक्ष्यों से पता चला कि पिता और पुत्र को पुलिस हिरासत में बुरी तरह पीटा गया। निरीक्षक एस श्रीधर ने हमले के लिए उकसाया। जबकि, अन्य कर्मी हिंसा और उसके बाद सबूतों को छिपाने में शामिल थे। 
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पुलिसकर्मियों पर क्या आरोप थे?
आरोपियों पर हत्या, गंभीर चोट पहुंचाने, साक्ष्य गढ़ने और झूठे मामले दर्ज करने के आरोप शामिल थे। 

पूरा मामला क्या हुआ था?
पुलिस ने जेयराज (58 वर्षीय) और बेनिक्स (31 वर्षीय) को 19 जून 2020 को हिरासत में लिया था। उन पर कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान नियम तोड़ने का आरोप लगाया गया था। कुछ दिनों बाद उनकी कोविलपत्ती सरकारी अस्पताल में मौत हो गई थी। जांच में पता चला कि पुलिस हिरासत में उन्हें क्रूर यातना दी गई थी। 

सीबीआई ने साबित किया अपराध
केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने फॉरेंसिक साक्ष्य, मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के बयान के आधार पर साबित किया कि सातांकुलम थाने में उन पर क्रूर हमला हुआ था। थाने में पाए गए खून के धब्बे और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज चोटें मुख्य साक्ष्य रहे।

हिरासत में मौत के मामले की जांच करते सीबीआई के अधिकारी। फोटो: एएनआई (फाइल)


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आरोपी विशेष उप-निरीक्षक पॉल्दुराई की मुकदमे के दौरान कोरोना से मौत हो गई थी। यह मामला पूरे देश में हिरासत में हिंसा और पुलिस की जवाबदेही पर बहस का केंद्र बन गया था। अब सजा सुनाए जाने के बाद मामला अंतिम चरण में प्रवेश कर गया है।

पीड़ितों के वकील ने कोर्ट के फैसले पर क्या कहा?
पीड़ितों के वकील जबा सिंह ने कहा, अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। ए1 से ए9 तक सभी आरोपियों को मौत की सजा दी गई। पहले आरोपी (ए1) को 24 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश मिला। दूसरे आरोपी (ए2) को 16.30 लाख रुपये देने होंगे। कुल मिलाकर मृतक बेनिक्स की मां को 1.40 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाएगा। अदालत ने कहा कि अगर आरोपी मुआवजा नहीं देंगे तो उनकी संपत्ति जब्त कर बेच दी जाएगी और राशि पीड़ित परिवार को दी जाएगी। 

(जबा सिंह, पीड़ित पक्ष के वकील। फोटो: एएनआई)


पीड़ित के परिवार की सदस्य पर्सी ने कहा, अदालत ने हमारे मामले में न्याय किया। हमने अदालत पर विश्वास रखा। अब कोई और परिवार ऐसा दुख न सहे, इसके लिए हम लंबे समय तक संघर्ष करते रहे। हमें उम्मीद है कि ऐसे हादसे भविष्य में कभी नहीं होंगे। 

(पर्सी, पीड़ित परिवार की सदस्य। फोटो- एएनआई)


सत्तारूढ़ द्रमुक ने कोर्ट के फैसले पर क्या कहा?
अदालत के फैसले राज्य की सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) के प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने कहा, हां, उन्होंने दोनों पर बेरहमी से हमला किया, उन्हें रातभर लटकाए रखा और उनकी हत्या की। कोई कार्रवाई नहीं की गई। उस समय एआईएडीएमके सत्ता में थी। उनके सत्ता से बेदखल होने के बाद हमने जांच शुरू की और उन पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया। 


 
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