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Rajasthan: अशोक गहलोत के गढ़ में हारी NSUI, मंत्री के किले भी ढहे, जानें कैसे राजस्थान में कमजोर हुई कांग्रेस?
Sun, 28 Aug 2022 04:30 PM IST
हिमांशु मिश्रा
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Sun, 28 Aug 2022 04:30 PM IST
सार
राजस्थान के 17 में से छह विश्वविद्यालयों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने जीत दर्ज की है। नौ विश्वविद्यालयों में निर्दलीय, जबकि दो पर वामपंथी संगठन एसएफआई के उम्मीदवारों ने विजय हासिल की।
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राजस्थान छात्रसंघ चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
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राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। यहां के 17 विश्वविद्यालयों और 450 से ज्यादा कॉलेजों के छात्रसंघ चुनाव में कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई को बुरी हार मिली है। इन 17 में से छह विश्वविद्यालयों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने जीत दर्ज की है। नौ विश्वविद्यालयों में निर्दलीय, जबकि दो पर वामपंथी संगठन एसएफआई के उम्मीदवारों ने जीत का परचम लहराया।
राजस्थान छात्रसंघ चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
पहले जानिए छात्रसंघ चुनाव में क्या-क्या हुआ?
पिछले दिनों राजस्थान के 17 विश्वविद्यालयों और 450 से ज्यादा कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव हुए। शनिवार 27 अगस्त को इसके नतीजे आए। 17 में से छह विश्वविद्यालयों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने जीत दर्ज की। नौ विश्वविद्यालयों में निर्दलीय, जबकि दो पर एसएफआई के उम्मीदवारों ने जीत का परचम लहराया।
120 से ज्यादा कॉलेजों में भी एबीवीपी की जीत हुई। करीब 100 कॉलेजों में एनएसयूआई के प्रत्याशियों ने जीत हासिल की। इस बार भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा (बीपीवीएम) ने भी जादू बिखेरा। बीपीवीएम के भी 80 से ज्यादा प्रत्याशियों ने जीत हासिल की।
पिछले दिनों राजस्थान के 17 विश्वविद्यालयों और 450 से ज्यादा कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव हुए। शनिवार 27 अगस्त को इसके नतीजे आए। 17 में से छह विश्वविद्यालयों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने जीत दर्ज की। नौ विश्वविद्यालयों में निर्दलीय, जबकि दो पर एसएफआई के उम्मीदवारों ने जीत का परचम लहराया।
120 से ज्यादा कॉलेजों में भी एबीवीपी की जीत हुई। करीब 100 कॉलेजों में एनएसयूआई के प्रत्याशियों ने जीत हासिल की। इस बार भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा (बीपीवीएम) ने भी जादू बिखेरा। बीपीवीएम के भी 80 से ज्यादा प्रत्याशियों ने जीत हासिल की।
एनएसयूआई
- फोटो : अमर उजाला
कहां-कहां कांग्रेस का किला ढहा?
- राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का गृह क्षेत्र जोधपुर में जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय और कॉलेजों में एनएसयूआई हार गई है। वह भी तब जब यहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव ने एनएसयूआई प्रत्याशी के लिए खूब प्रचार किया था। एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष अभिषेक चौधरी भी जोधपुर जिले से ही हैं, लेकिन वह भी कुछ खास नहीं कर पाए।
- कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के गृह जिले सीकर में शेखावटी यूनिवर्सिटी और एसके कॉलेज में एनएसयूआई बुरी तरह हारी है।
- राजस्थान यूनिवर्सिटी में तो मंत्री मुरारीलाल मीणा की बेटी बागी होकर चुनाव लड़ रहीं थीं, लेकिन जीत नहीं पाईं। यहां एनएसयूआई का प्रत्याशी भी चुनाव हार गया।
- भरतपुर जिले की बात करें तो यहां से कांग्रेस के चार विधायक राजस्थान सरकार में मंत्री हैं। इनमें विश्वेंद्र सिंह, भजनलाल जाटव, जाहिदा और सुभाष गर्ग शामिल हैं। इसके अलावा दो विधायक बोर्ड के चेयरमैन हैं। इसके बावजूद छात्रसंघ चुनाव परिणाम में एनएसयूआई का सूपड़ा साफ हो गया। कांग्रेस मंत्रियों की तमाम कवायद के बावजूद यहां के महाराजा सूरजमल यूनिवर्सिटी और अन्य कॉलेजों में एबीवीपी की जीत हुई है।
- कोटा से यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल आते हैं। इनके क्षेत्र में स्थित कोटा यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में भी एनएसयूआई को हार का सामना करना पड़ा है।
- बांसवाड़ा जिले से मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय और अर्जुन बामणिया हैं। दोनों मंत्रियों ने खूब कोशिश की। पर्दे के पीछे से एनएसयूआई प्रत्याशियों को जीताने के लिए मदद की, लेकिन हार का सामना करना पड़ा।
- बीकानेर में भी कुछ यही स्थिति रही। यहां से मंत्री बीडी कल्ला और मंत्री भंवर सिंह भाटी आते हैं। यहां की महाराजा गंगा सिंह यूनिवर्सिटी और वेटरिनरी यूनिवर्सिटी में एनएसयूआई हार गई है।
- आदिवासी इलाके डूंगरपुर, बांसवाड़ा में भी कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई को करारी हार का सामना करना पड़ा है। डूंगरपुर से ही यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश घोघरा आते हैं। यहां के चारों कॉलेजों में बीटीपी के छात्र संगठन की जीत हुई है।
- बांसवाड़ा में गोविंद गुरु यूनिवर्सिटी और कॉलेजो में एबीवीपी ने एनएसयूआई को बुरी तरह से मात दे दी।
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अशोक गहलोत
- फोटो : अमर उजाला
कैसे कमजोर हुई कांग्रेस?
हमने ये समझने के लिए राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अजय कुमार सिंह से बात की। उन्होंने इसके लिए तीन बड़े कारण गिनाए।
1. कानून व्यवस्था, युवाओं के मुद्दे पर घिरी अशोक गहलोत सरकार : पिछले एक साल से राजस्थान की कानून व्यवस्था को लेकर खूब सवालिया निशान उठ रहे हैं। पूरे प्रदेश में कई दंगे भी हो चुके हैं। जातिगत अत्याचार के भी आरोप में भी विवाद होता रहा है। छात्रसंघ चुनाव में मिली हार में एक बड़ा कारण ये भी है। युवा प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार से नाराज हैं। रोजगार, परीक्षाओं में धांधली समेत युवाओं के कई मुद्दे सरकार पर हावी हैं।
हमने ये समझने के लिए राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अजय कुमार सिंह से बात की। उन्होंने इसके लिए तीन बड़े कारण गिनाए।
1. कानून व्यवस्था, युवाओं के मुद्दे पर घिरी अशोक गहलोत सरकार : पिछले एक साल से राजस्थान की कानून व्यवस्था को लेकर खूब सवालिया निशान उठ रहे हैं। पूरे प्रदेश में कई दंगे भी हो चुके हैं। जातिगत अत्याचार के भी आरोप में भी विवाद होता रहा है। छात्रसंघ चुनाव में मिली हार में एक बड़ा कारण ये भी है। युवा प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार से नाराज हैं। रोजगार, परीक्षाओं में धांधली समेत युवाओं के कई मुद्दे सरकार पर हावी हैं।
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अशोक गहलोत, राहुल गांधी, सोनिया गांधी
- फोटो : अमर उजाला
2. कांग्रेस के साथ-साथ एनएसयूआई में भी गुटबाजी : एनएसयूआई को मिली हार का दूसरा सबसे बड़ा कारण पूरे प्रदेश में गुटबाजी है। मूल संगठन कांग्रेस हो या छात्र संगठन एनएसयूआई। हर जगह गुटबाजी चरम पर है। कई विश्वविद्यालयों में एनएसयूआई सिर्फ इसलिए हार गई, क्योंकि उसके सामने ही बागियों ने भी ताल ठोक दी थी।