{"_id":"57d3bdd04f1c1b9421316fd0","slug":"super-fast-talgo-train-from-delhi-to-mumbai-has-final-trial-today","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"150 किलोमीटर की रफ्तार से दौड़ी हाईस्पीड टेल्गो ट्रेन, ट्रायल सफल","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
150 किलोमीटर की रफ्तार से दौड़ी हाईस्पीड टेल्गो ट्रेन, ट्रायल सफल
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sun, 11 Sep 2016 10:51 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
200 किलोमीटर की रफ्तार से दौड़ने वाली हाईस्पीड टेल्गो ट्रेन का दिल्ली से मुंबई के बीच सफल ट्रायल किया गया। दिल्ली से मुंबई, 1384 किलोमीटर के सफर को ट्रेन ने 11 घंटे 48 मिनट में पूरा कर लिया। इस बार ट्रेन को 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाया गया। पिछले ट्रायल में ट्रेन निर्धारित गति पकड़ने में सफल नहीं हो पाई थी और 50 मिनट की देरी से पहुंची थी।
हाईस्पीड टेल्गो ट्रेन: रफ्तार, वजन और ब्रेक का एक साथ ट्रायल
- फोटो : अमर उजाला
स्पेन में बनी इस ट्रेन की खासियत यह है कि इसे ढाई सौ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाया जा सकता है। रेलवे मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि इतनी स्पीड से, तो यह ट्रेन यहां नहीं चल सकेगी, लेकिन इसकी औसत स्पीड 160 से 180 घंटे प्रतिकिलोमीटर के बीट रखा जाएगा।
रफ्तार, वजन और ब्रेक का एक साथ ट्रायल
हाई स्पीड पर ट्रायल कराने के लिए टेल्गो ट्रेन अपने ही इंजन से चलेगी। यह ट्रायल तेज रफ्तार में मुंबई और दिल्ली के बीच में होगा। यदि भारतीय इंजन को लेकर ट्रेन को खींचा तो इन दोनों ट्रायल के दौरान ट्रेन हाई स्पीड में होने के कारण कई व्यावहारिक और तकनीकी दिक्कतें भी हो सकती हैं। इसीलिए स्पेन से इंजन मंगाया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
हाईस्पीड टेल्गो ट्रेन: रफ्तार, वजन और ब्रेक का एक साथ ट्रायल
टेल्गो ट्रेन में नौ कोच लगाए गए हैं। इनमें दो कोच प्रथम श्रेणी के हैं। प्रत्येक में 18-18 यात्री सीट हैं। द्वितीय श्रेणी के चार कोच में से प्रत्येक में 36-36 सीट लगी हैं। इसके साथ एक कोच में पैंट्री कार, एक जनरेटर रूम और एक अंतिम कोच गार्ड रूम है।
विज्ञापन
हाईस्पीड टेल्गो ट्रेन: रफ्तार, वजन और ब्रेक का एक साथ ट्रायल
- फोटो : अमर उजाला
टेल्गो की तकनीकी टीम का मानना है कि ट्रेन को दौड़ाने के समय हाइड्रोलिक सिस्टम से कोच को डेढ़ फीट ऊंचा करने में दिक्कत आती है। हालांकि ट्रेन संचालन के समय कोच स्वत: ही ऊंचे हो जाते हैं। प्लेटफार्म पर यह कोच स्वत: ही नीचे हो जाते हैं। भारतीय इंजन सामान्य है जबकि टेल्गो का इंजन पूरी तरह से कंप्यूटराइज्ड है। वह सेंसर के माध्यम से यह भी संकेत देता है कि जिस ट्रैक पर वह दौड़ रहा है, इसके आगे का ट्रैक कैसा है। उसी आधार पर ड्राइवर ट्रैक पर ट्रेन की स्पीड को कम और अधिक करते हैं।