दुनिया को शौचालय का महत्व बताने वाले सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक और सामाजिक कार्यकर्ता बिंदेश्वर पाठक का मंगलवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। 80 साल के बिंदेश्वर ने एम्स दिल्ली में आखिरी सांस लीं। बिंदेश्वर पाठक सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक थे जो कि एक सामाजिक सेवा संगठन है। सुलभ इंटरनेशनल के जरिए लोगों को मानव अधिकारों, पर्यावरण स्वच्छता, वेस्ट मैनेजमेंट और रिफार्म्स को बढ़ावा देने का कार्य किया जाता है। बिंदेश्वर पाठक एक सामाजिक कार्यकर्ता थे। सामाजिक सुधार, विशेषकर स्वच्छता और साफ-सफाई के क्षेत्र में उनका कार्य अग्रणी माना जाता है। सुभल इंटरनेशनल संगठन में उनका कार्य के लिए उन्हें विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं।
Bindeshwar Pathak: ऐसे बीता बिंदेश्वर पाठक का बचपन, जानिए कितनी संपत्ति के थे मालिक
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बिंदेश्वर पाठक का जीवन परिचय
बिहार में वैशाली जिले के रामपुर बघेल गांव में जन्मे बिंदेश्वर पाठक ने 1964 में समाजशास्त्र से स्नातक की डिग्री हासिल की। बिहार और उत्तर प्रदेश से उन्होंने 1980 में समाजशास्त्र से परास्नातक, अंग्रेजी से परास्नातक और 1985 में पीएचडी की।
बचपन में बिंदेश्वर पाठक के घर में 9 कमरे थे, लेकिन एक भी शौचालय नहीं। महिलाएं शौच के लिए सुबह जल्दी उठकर बाहर जाती थीं। दिन में बाहर शौच करना मुश्किल होता था, जिससे महिलाओं को काफी समस्याएं होती थीं। बिंदेश्वर पाठक इन बातों से बेचैन हो गए। इस समस्या का हल निकालने के लिए उन्होंने सुलभ शौचालय की व्यवस्था की।
बिंदेश्वर पाठक की उपलब्धि
1991 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। इसके अलावा डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने उन्हें गुड कार्पोरेट सिटिजन अवार्ड, एनर्जी ग्लोब अवार्ड, डब्ल्यूएचओ पब्लिक हेल्थ कैपेन अवार्ड और गांधी शांति पुरस्कार मिल चुका है।
बिंदेश्वर पाठक की संपत्ति
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिंदेश्वर पाठक सालाना 4 से 5 मिलियन कमाई करते रहे। बिंदेश्वर पाठक कुल 306 करोड़ की संपत्ति के मालिक थे।