Air Pollution Cancer: इन दिनों वायु प्रदूषण अपने चरम पर है। देश के कई बड़े हिस्सों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 300 के पार जा चुका है, और दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में यह लगभग 400 तक पहुंच गया है। बहुत से लोगों को लगता है कि यह जहरीली हवा केवल सांस लेने में और हृदय रोगों तक सीमित है, लेकिन ये प्रदूषण कैंसर के जोखिम को भी कई गुना बढ़ा देता है। हम सभी जानते हैं कि धूम्रपान से फेफड़ों का कैंसर होता है।
Air Pollution: प्रदूषण में रहने से क्या कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है? ये रिपोर्ट देखकर हैरान रह जाएंगे आप
दिल्ली में वायु प्रदूषण अपने चरम पर है, कई जगहों पर एयर क्वालिटी इंडेक्स लगभग 400 तक पहुंच चुका है। ऐसे में बहुत से लोगों के मन में सवाल रहता है कि क्या ये प्रदूषण कैंसर के खतरों को भी बढ़ाता है, आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।
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दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य संस्थाओं में से एक इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) ने साफ कहा है कि बाहर की गंदी हवा और उसमें मौजूद बारीक धूल के कण (PM कण) अब कैंसर पैदा करने वाली चीजें हैं। इसका सीधा मतलब है कि इस दूषित हवा में सांस लेना कैंसर के जोखिम को कई गुना बढ़ा देती है।
इसके अलावा कनाडियन कैंसर सोसायटी की रिपोर्ट के मुताबिक फेफड़ों के कैंसर का सबसे बड़ा कारण भले ही धूम्रपान हो, लेकिन अब यह कहना गलत नहीं होगा कि बाहर का वायु प्रदूषण भी इस जानलेवा बीमारी का खतरा बहुत बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि आप जितनी देर प्रदूषित हवा के संपर्क में रहेंगे, फेफड़ों का कैंसर होने का जोखिम उतना ही अधिक होगा।
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हैरान करने वाली बात यह है कि खतरा सिर्फ बाहर की हवा से नहीं है, बल्कि घर के अंदर का प्रदूषण भी उतना ही खतरनाक है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि घरों के अंदर मौजूद रेडॉन गैस फेफड़ों के कैंसर के जोखिम को बढ़ाने के लिए एक बड़ा कारण बन सकती है। इसलिए हमें बाहर और घर के अंदर, दोनों जगह हवा को शुद्ध रखना जरूरी है।
जब हम PM2.5 जैसे बेहद महीन प्रदूषण कणों में सांस लेते हैं, तो वे हमारे फेफड़ों में पहुंचकर अंदरूनी चोट पहुंचाते हैं। अगर यह सूजन लंबे समय तक बनी रहती है, तो फेफड़ों की कोशिकाएं बिगड़ना शुरू कर देती हैं, जिससे फेफड़ों का कैंसर होने का खतरा बहुत बढ़ जाता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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