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सावधानी: पांच साल तक के बच्चे को ये चीजें खिलाना पड़ सकता है भारी, आप भी तो नहीं कर रहे गलती?

Wed, 30 Sep 2026 07:24 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Wed, 30 Sep 2026 07:24 PM IST
सार

पांच साल से कम उम्र के बच्चों में खान-पान को लेकर खास सावधानी बरतने की जरूरत होती है।अधपका या असुरक्षित भोजन संक्रमण दे सकता है, जबकि ज्यादा चीनी भी नुकसान पहुंचा सकती है।

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Dangerous Foods for Kids Under Five know Safe Eating Guide in hindi
बच्चों का खान-पान - फोटो : Amarujala.com/AI

हम क्या चीजें खाते-पीते हैं इसका सेहत पर सीधा असर होता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को ऐसी चीजें ज्यादा खाने की सलाह देते हैं जिससे आवश्यक पोषक तत्वों की आसानी से पूर्ति हो सके। जब बात बच्चों की सेहत की हो तो ये और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।



बच्चे जो कुछ भी खाते-पीते हैं, उसका असर सीधे उनके विकास, हड्डियों की सेहत, दांतों और पाचन तंत्र पर पड़ता है। यही वजह है कि पांच साल से कम उम्र में खाने-पीने की चीजों को लेकर सावधानी और भी जरूरी हो जाती है।

कई चीजें वयस्कों के लिए सामान्य हो सकती हैं, लेकिन छोटे बच्चों के लिए वही खाना दम घुटने, पेट खराब होने, दांतों की समस्या बढ़ाने वाला बन सकता है। ऐसी चीजें जो बहुत सख्त, गोल, चिपचिपी या छोटे आकार की हों, ये 5 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए जोखिमों को और भी बढ़ाने वाली हो सकती हैं।

आइए जानते हैं कि बच्चों के खान-पान को लेकर क्या सावधानियां बहुत जरूरी हैं?

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खान-पान संबंधी समस्याएं - फोटो : Adobe stock

बच्चों के खान-पान को लेकर बरतें सावधानी

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, छोट बच्चे खाने वाली चीजों को ठीक तरीके से चबाते नहीं हैं, इसलिए कोई भी सख्त चीज उनके लिए मुश्किलें बढ़ाने वाली और कई बार गले को चोक करने वाली हो सकती हैं।बादाम, मूंगफली, काजू जैसे मेवे छोटे बच्चे चबाने की जगह घोंट जाते हैं जिससे घुटन का खतरा पैदा हो सकता है।
 

  • इसी तरह साबुत अंगूर, गाजर के टुकड़े, कैंडी भी गले में अटक सकती है।
  • पांच साल से कम उम्र के बच्चों में खाने की बनावट और आकार को लेकर भी ध्यान रखना जरूरी है।
  • मेवे देने हों तो उन्हें छोटे टुकड़ों में करके या फिर जूस या खाने में मिलाकर दिया जा सकता है।
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बच्चों का खान-पान - फोटो : Freepik.com

कच्चा या अधपका खाना भी जोखिम वाला

छोटे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अभी विकसित हो रही होती है, इसलिए दूषित भोजन से होने वाला संक्रमण उनके लिए ज्यादा गंभीर हो सकता है। 

  • अधपका मांस या अंडा, बिना पाश्चराइज किया दूध या पनीर और बिना धोए फल-सब्जियां संक्रमण का जोखिम बढ़ा सकते हैं। बच्चों को हमेशा अच्छी तरह पका और सुरक्षित भोजन ही देना चाहिए। 


आहार में चीनी की मात्रा तो नहीं है ज्यादा

छोटे बच्चों को मिठाई, मीठे पेय, बिस्किट और चीनी वाले पैकेज्ड खाद्य पदार्थ भी बार-बार देने से बचना चाहिए, ये शरीर में ऐडेड शुगर को बढ़ाने वाली हो सकती हैं।
 

  • अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स दो साल से कम उम्र के बच्चों को बिल्कुल भी चीनी वाली चीजें न देने की सलाह देता है। 
  • मीठे पेय दांतों की सड़न बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा इनमें मौजूद ज्यादा कैलोरी बच्चों में मोटापे की दिक्कत भी बढ़ाने वाला हो सकता है। 
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बच्चों को शहद दें या नहीं? - फोटो : Freepik.com

शहद और जूस को लेकर भी बरतें सावधानी

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, एक साल से कम उम्र के बच्चे को शहद नहीं देना चाहिए, क्योंकि इसमें इंफेंट बोटुलिज्म का जोखिम होता है। इसी तरह 12 महीने से कम उम्र में फल या सब्जियों का जूस भी नहीं देनी है, कई बार पैकेट वाले जूस में चीनी और प्रिजर्वेटिव्स की मात्रा भी अधिक हो सकती है जिससे सेहत को खतरा रहता है।

एक साल के बाद भी साबुत फल जूस से बेहतर विकल्प माना जाता है। साबुत फल या जूस आपके लिए कौन सा बेहतर है ये जानने के लिए यहां क्लिक करें।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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