राजधानी दिल्ली-एनसीआर में पिछले दो दिनों से हो रही बारिश के कारण जन-जीवन अस्त-व्यस्त है। दिल्ली समेत पूरे एनसीआर में कई इलाकों में 100 मिमी से अधिक बारिश होने से जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है। बुधवार शाम से जारी लगातार बारिश के कारण गुरुवार सुबह लोगों को अपने काम पर जाने के लिए खासा मुश्किलों के सामना करना पड़ा। जगह-जगह पर जलभराव की स्थिति न सिर्फ यातायात व्यवस्थाओं को प्रभावित कर रही है, साथ ही गंदे पानी के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा भी बढ़ गया है।
Delhi-NCR Rain: बारिश और जलजमाव आपके लिवर के लिए न बढ़ा दे खतरा? डॉक्टरों की चेतावनी पर गंभीरता से दें ध्यान
दिल्ली-एनसीआर में लगातार हो रही बारिश के कारण जलभराव और गंदे पानी ने नई स्वास्थ्य चिंता भी खड़ी कर दी है। इनमें सबसे बड़ा खतरा हेपेटाइटिस ए और हेपेटाइटिस ई का माना जाता है, जो सीधे लिवर पर हमला करने वाले वायरल संक्रमण हैं।
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हेपेटाइटिस-ए और ई का खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, हेपेटाइटिस-ए और ई, मुख्य रूप से दूषित पानी और संक्रमित भोजन के जरिए फैलते हैं। बारिश के मौसम में जब सीवर का पानी पेयजल के स्रोतों में मिल जाता है तो इससे इन संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ जाता है। ये संक्रमण लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।
इसके अलावा मानसून के इस मौसम में डेंगू और मलेरिया जैसी मच्छर जनित बीमारियों को लेकर भी लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। अगर आप ऐसी जगहों पर रह रहे हैं जहां पर सीवर ओवर फ्लो है या जलजमाव की स्थिति है तो खान-पान को लेकर बहुत सावधानी जरूरी है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, दूषित पानी और खराब स्वच्छता के कारण हेपेटाइटिस ए और ई सहित कई संक्रामक बीमारियां फैलती हैं। जलजमाव के कारण नल के पानी में सीवेज का रिसाव भी हो सकता है, जिससे संक्रमण का जोखिम और बढ़ जाता है। मानसून के दौरान जलजनित और खाद्यजनित संक्रमणों के मामले हर साल बढ़ते हैं।
पहले हेपेटाइटिस -ए के बारे में जानिए
हेपेटाइटिस ए एक वायरल लिवर संक्रमण है। यह मुख्य रूप से दूषित भोजन और पानी के जरिए फैलता है। जब संक्रमित व्यक्ति के मल (सीवर का पानी) से पानी या भोजन दूषित हो जाता है और दूसरा व्यक्ति उसका सेवन करता है, तो वायरस शरीर में प्रवेश कर लिवर को संक्रमित कर देता है। इसलिए इसे फीकल-ओरल ट्रांसमिशन कहा जाता है। गंभीर स्थितियों में इससे लिवर फेलियर हो सकता है।
- बारिश और जलजमाव के दौरान सीवर का पानी पेयजल में मिलने से इसका खतरा बढ़ जाता है।
- संक्रमण के कारण आमतौर पर बुखार, थकान, मतली-उल्टी और पेट में दर्द की दिक्कत होती है।
- संक्रमण बढ़ने पर गहरे रंग का पेशाब और पीलिया की समस्या बढ़ जाती है।
- हेपेटाइटिस-ए से बचाव के लिए वैक्सीन उपलब्ध है, हालांकि सभी लोगों को साफ-सफाई पर ध्यान देते रहना चाहिए।
हेपेटाइटिस ई का भी खतरा
हेपेटाइटिस-ई भी एक वायरल लिवर संक्रमण है। इसके फैलने का तरीका भी लगभग हेपेटाइटिस-ए जैसा ही होता है। यह दूषित पानी और भोजन के जरिए फैलता है और स्वच्छता की कमी वाले जगहों पर इसके मामले अधिक देखे जाते हैं।
- हेपेटाइटिस-ई के कारण भी बुखार-कमजोरी, मतली-उल्टी, पेट दर्द और पीलिया जैसी दिक्कतें होती हैं। गहरे रंग का पेशाब और अत्यधिक थकान शामिल हैं। गर्भवती महिलाओं में यह संक्रमण बहुत गंभीर रूप ले सकता है।
बारिश के दिनों में लिवर संक्रमण का खतरा
हेपेटाइटिस ए और ई दोनों ही दूषित भोजन या पानी से फैलते हैं लिवर में गंभीर सूजन से लेकर फेलियर तक का कारण बनते हैं। हेपेटाइटिस ई जूनोटिक भी होता है और ये अधपके मांस से फैल सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बारिश के मौसम में हेपेटाइटिस से बचाव के उपाय करें।
- केवल उबला या फिल्टर किया हुआ पानी ही पीना चाहिए। भोजन हमेशा ताजा और अच्छी तरह पका हुआ खाएं।
- सड़क किनारे खुले में रखे कटे फल, चाट या अन्य खाद्य पदार्थों से बचें क्योंकि ये दूषित हो सकते हैं।
- खाना बनाने और खाने से पहले तथा शौचके बाद कम से कम 20 सेकंड तक साबुन और पानी से हाथ धोना संक्रमण रोकने का सबसे आसान और प्रभावी उपाय है।
- यदि किसी इलाके में जलजमाव है, तो वहां के पानी के संपर्क में आने के बाद हाथ-पैर अच्छी तरह साफ करें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।