मानसून के दिनों में मच्छरों के काटने और खान-पान में अस्वच्छता के कारण होने वाली बीमारियों का खतरा सबसे ज्यादा देखा जाता रहा है। अमर उजाला में प्रकाशित हालिया रिपोर्ट में हमने राजधानी दिल्ली-एनसीआर में डेंगू-मलेरिया के बढ़ते मामलों को लेकर अलर्ट किया था। इस बीच हालिया रिपोर्ट्स यहां एक और संक्रामक बीमारी के खतरों को लेकर सावधान कर रही हैं।
H1N1 Alert: दिल्ली में बढ़ती इस संक्रामक बीमारी का अलर्ट, कोरोना जैसे होते हैं लक्षण; आप भी तो नहीं हैं शिकार?
दिल्ली में H1N1 इन्फ्लूएंजा के मामलों में इस साल करीब छह गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बुखार, सूखी खांसी, गले में दर्द, नाक बहना, सिरदर्द, शरीर और मांसपेशियों में दर्द इसके प्रमुख लक्षण हो सकते हैं।
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क्या कहते हैं डॉक्टर?
अमर उजाला से बातचीत में दिल्ली स्थित एक निजी अस्पताल में डॉक्टर अरबिंद डबास बताते हैं, इस मौसम में पहले से संक्रामक बीमारियों का खतरा रहता है। इस बार एच1एन1 का बढ़ना थोड़ी चिंता और बढ़ा रहा है। रोजाना ओपीडी में बुखार, सर्दी-जुकाम के साथ सांस की समस्या के शिकार मरीज आ रहे हैं। हालांकि हमारे अस्पताल में इसका मरीज नहीं मिला है।
- पिछले महीनों में इन्हीं लक्षणों के साथ कई स्थानों पर कोविड-19 के मामलों में भी मामूली बढ़ोतरी देखी गई थी।
- इसके अलावा बरसात और जलजमाव की स्थिति डेंगू-मलेरिया जैसी बीमारियों को लेकर पहले से ही चिंता बढ़ा रही है।
इन सभी जोखिमों को देखते हुए सभी लोगों को अपनी सेहत को लेकर विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। एच1एन1 को लेकर वैसे तो ज्यादा चिंता की बात नहीं है, पर कुछ लोगों में ये गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ाने वाला भी हो सकता है, इसलिए बचाव को लेकर अलर्ट रहना जरूरी है।
स्वाइन फ्लू और इसके मामले
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, स्वाइन फ्लू के लक्षण आमतौर पर सामान्य इंफ्लुएंजा यानी सर्दी-जुकाम वाली बीमारी से मिलते-जुलते होते हैं। कई बार ये कोरोना के लक्षणों के जैसा भी लग सकता है। यही कारण है कि अक्सर लोग बीमारियों में अंतर नहीं कर पाते। आमतौर पर बीमारी का सही पता तब चलता है जब संक्रमण तेजी से बढ़ने लगता है और मरीज को सांस लेने में परेशानी, तेज बुखार और गंभीर जटिलताएं होने लग जाती हैं।
- स्वाइन फ्लू, इन्फ्लूएंजा-ए वायरस के एक सबटाइप से होने वाली सांस की संक्रामक बीमारी है।
- यह खांसने या छींकने से निकलने वाली सांस की बूंदों के जरिए एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है।
- 2009 में इसने महामारी का रूप ले लिया था, लेकिन अब यह दुनियाभर में एक आम मौसमी फ्लू स्ट्रेन के तौर पर फैलता रहता है।
- जून के महीने में कर्नाटक में एच1एन1 के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी गई थी। इससे एक व्यक्ति की मौत भी हो गई थी।
कहीं आप भी तो नहीं हो गए शिकार?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, स्वाइन फ्लू के मामले भी देखने में सामान्य फ्लू यानी मौसमी सर्दी-जुकाम वाली बीमारी के जैसे हो सकते हैं। हालांकि स्वाइन फ्लू का संक्रमण, जोखिम और कुछ मामलों में बीमारी की गंभीरता ज्यादा हो सकती है। छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोग इसके कारण ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। भीड़भाड़ वाले स्थानों, स्कूलों, दफ्तरों और सार्वजनिक परिवहन में ये संक्रमण तेजी से फैलते हैं।
- डॉक्टर कहते हैं, स्वाइन फ्लू और कोविड-19 दोनों सांस से जुड़ी बीमारियां हैं। इनके शुरुआती भी लगभग एक जैसे हो सकते हैं।
- इसलिए अगर आपको कुछ दिनों से तेज बुखार, सांस लेने में तकलीफ, लगातार खांसी या गंभीर कमजोरी महसूस हो रही हो, उन्हें तुरंत डॉक्टर की सलाह ले लें।
- एच1एन1 में सामान्य लक्षणों के साथ कुछ लोगों में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल जैसे पेट में दर्द और डायरिया जैसी समस्या हो सकती है।
संक्रमण से बचाव के लिए क्या करें?
डॉक्टर कहते हैं, चूंकि इस साल स्वाइन फ्लू के मामलों में थोड़ी वृद्धि देखी जा रही है इसलिए सभी लोगों को बचाव के लिए निरंतर उपाय करते रहना चाहिए। स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए नियमित रूप से साबुन से हाथ धोएं, खांसते या छींकते समय मुंह ढकें, बीमार लोगों से दूरी बनाए रखें, और सालाना फ्लू का टीका लगवाएं। ये उपाय आपको सामान्य मौसमी फ्लू और कोरोना जैसी अन्य श्वसन संक्रमण वाली बीमारियों से भी बचाए रखने में मददगार हो सकती है।
- गंदे हाथों से अपनी आंखें, नाक या मुंह को छूने से बचें।
- यदि आप संक्रमित हैं, तो दूसरों में वायरस फैलाने से बचने के लिए घर पर ही आराम करें।
- अपने बर्तन, तौलिया या अन्य व्यक्तिगत सामान किसी के साथ साझा न करें।
- तेज बुखार, सांस लेने में तकलीफ या गंभीर कमजोरी होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।