अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन लंबे समय से प्रोस्टेट कैंसर का शिकार हैं। मई 2025 में अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने पहली बार बाइडन के कैंसर की जानकारी दी थी। 18 मई 2025 को पूर्व राष्ट्रपति के कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया थी कि उनमें 'आक्रमक स्तर' के कैंसर का निदान हुआ है, तब से वह लगातार विशेषज्ञों की निगरानी में हैं। निदान के समय कैंसर हड्डियों तक फैल गया था। बाइडन के प्रवक्ता ने अक्टूबर में बताया था कि उनका रेडिएशन ट्रीटमेंट और हार्मोन थेरेपी चल रही है।
Joe Biden Cancer: हड्डियों से आगे फैला गया जो बाइडन का प्रोस्टेट कैंसर, जानिए ये कितनी खतरनाक स्थिति
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन का प्रोस्टेट कैंसर उनकी हड्डियों और शरीर के अन्य हिस्सों में फैल गया है और यह बहुत दर्दनाक है। जानिए कैंसर की ये स्थिति कितनी खतरनाक हो सकती है?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हंटर बाइडन के ताजा बयान ने एक बार फिर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति की स्वास्थ्य स्थिति को चर्चा में ला दिया है। कैंसर के हड्डियों से आगे फैलने की बात इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रोस्टेट कैंसर जब शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल जाता है, तो उसका इलाज अधिक जटिल हो सकता है।
पहले प्रोस्टेट कैंसर और इसके खतरे को जान लीजिए?
प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में होने वाला एक प्रमुख कैंसर है। यह प्रोस्टेट ग्रंथि में शुरू होता है, जो मूत्राशय के नीचे स्थित होती है और वीर्य के एक हिस्से को बनाने में मदद करती है। ज्यादातर प्रोस्टेट कैंसर धीरे-धीरे बढ़ते हैं, लेकिन कुछ कैंसर तेजी से बढ़ने और शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलने वाले होते हैं।
- उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा भी बढ़ता जाता है। आंकड़ों के मुताबिक करीब 10 में से 6 प्रोस्टेट कैंसर के मामले 65 साल से अधिक उम्र के पुरुषों में पाए जाते हैं।
- जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को ये बीमारी रही है, उनमें खतरा अधिक हो सकता है।
ये भी पढ़िए- (घर पर ये 7 आसान टेस्ट खोल देंगे आपकी सेहत का राज, पता चल जाएगा कितनी लंबी होगी उम्र?)
प्रोस्टेट कैंसर कब खतरनाक हो जाता है?
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि प्रोस्टेट कैंसर की गंभीरता इस बात पर निर्भर करती है कि कैंसर कितना फैला है और कितनी तेजी से बढ़ रहा है? इसे समझने के लिए डॉक्टर कैंसर का स्टेज और ग्रेड देखते हैं। स्टेज बताता है कि कैंसर प्रोस्टेट तक सीमित है या शरीर के दूसरे हिस्सों तक पहुंच चुका है, जबकि ग्रेड कैंसर कोशिकाओं के व्यवहार और उनके तेजी से बढ़ने की संभावना के बारे में बताता है।
- शुरुआती प्रोस्टेट कैंसर में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होता। इसी वजह से कई मामलों का पता जांच के दौरान चलता है।
- प्रोस्टेट कैंसर में अक्सर लोगों को पेशाब की धार कमजोर होना, बार-बार या रात में पेशाब आना और कभी-कभी पेशाब या वीर्य में खून आने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
कैंसर प्रोस्टेट से बाहर निकलकर आसपास के ऊतकों, लिम्फ नोड्स या शरीर के दूर के हिस्सों तक फैल जाए तो ये गंभीर हो सकता है। दूसरे अंगों तक फैल चुके कैंसर को मेटास्टेटिक प्रोस्टेट कैंसर कहा जाता है। यह प्रोस्टेट कैंसर की एडवांस स्थिति है। ऐसी स्थिति में इलाज अधिक जटिल हो सकता है। हालांकि मेटास्टेटिक प्रोस्टेट कैंसर का मतलब यह नहीं है कि इलाज संभव नहीं है।
कैंसर का हड्डियों में फैलना कितना खतरनाक है?
आमतौर पर प्रोस्टेट कैंसर के हड्डियों तक फैलने को गंभीर स्थिति माना जाता है। अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुसार, प्रोस्टेट कैंसर के शरीर में फैलने पर हड्डियां जैसे रीढ़ की हड्डी और कूल्हे प्रभावित हो सकते हैं।
- बोन मेटास्टेसिस अक्सर रीढ़ की हड्डी, पेल्विस, पसलियों और कूल्हों को प्रभावित करता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कैंसर कोशिकाएं पास की रक्त वाहिकाओं के जरिए आसानी से कंकाल तक पहुँच जाती हैं, जहां वे हड्डियों की असामान्य वृद्धि को बढ़ावा देती हैं।
- हड्डियों में कैंसर फैलने से लगातार या तेज दर्द हो सकता है। इससे हड्डियां कमजोर होकर फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ा सकता है।
- अगर कैंसर रीढ़ की हड्डी के आसपास फैलकर स्पाइनल कॉर्ड यानी रीढ़ की नसों के मुख्य हिस्से पर दबाव डालता है, तो पैरों में कमजोरी या सुन्नपन और पेशाब या मल पर नियंत्रण खोने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
डॉक्टर कहते हैं, प्रोस्टेट कैंसर जब हड्डियों या उससे आगे पहुंच जाता है तो इलाज में बीमारी को पूरी तरह खत्म करने के बजाय कैंसर की बढ़त को नियंत्रित करने, दर्द कम करने और हड्डियों को कमजोर होने से बचाने पर ध्यान दिया जाता है। मेटास्टेटिक प्रोस्टेट कैंसर के लिए हार्मोन थेरेपी, कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और रेडिएशन जैसे अलग-अलग उपचार उपलब्ध हैं। मरीज की बीमारी और रिपोर्ट के अनुसार डॉक्टर उपचार तय करते हैं।
--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।