मोबाइल फोन हम सभी की जिंदगी का सबसे जरूरी हिस्सा बन चुका है। सुबह आंख खुलने से लेकर रात को सोने तक शायद ही कोई ऐसा पल होता हो, जब फोन हमारे हाथ से दूर रहता हो। लेकिन जितनी तेजी से मोबाइल का इस्तेमाल बढ़ा है, उसे लेकर कई रिपोर्ट्स लगातार चिंता जताती रही हैं। मोबाइल के इस्तेमाल से निकलने वाली ब्लू लाइट को नींद, ब्रेन हेल्थ के लिए नुकसानदायक बताया जाता रहा है।
Mobile Effects: मोबाइल इस्तेमाल करने वाले हर किसी को जान लेनी चाहिए ये जरूरी बात, रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा
रिपोर्टों में मोबाइल फोन से निकलने वाली रेडियोफ्रीक्वेंसी तरंगों के प्रभाव का गहन विश्लेषण किया गया है। अब तक उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण यह नहीं बताते कि सामान्य तरीके से मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से ब्रेन कैंसर होने का स्पष्ट और ठोस सबूत मिल चुका है।
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मोबाइल का इस्तेमाल क्या वास्तव में खतरनाक
मोबाइल कई तरह की तरंगे निकालता है। हमारे चारों ओर भी विद्युत-चुंबकीय तरंगें मौजूद होती हैं। इन्हीं की मदद से हमें रेडियो पर गाने सुनने, वाई-फाई चलाने, जीपीएस (सैटेलाइट नेविगेशन) से रास्ता ढूंढने और मोबाइल फोन से बात करने की सुविधा देती हैं। ये तरंगें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन का ही एक हिस्सा हैं।
रेडिएशन शब्द सुनकर अक्सर लोग डर जाते हैं, लेकिन हर तरह का रेडिएशन खतरनाक नहीं होता। मोबाइल फोन से निकलने वाली तरंगें इस स्पेक्ट्रम के सबसे कम ऊर्जा वाले हिस्से में आती हैं। यानी इनमें ऊर्जा बहुत कम होती है। चूंकि कई अध्ययनों में पाया गया है कि एक्स-रे जैसी हाई एनर्जी वाली किरणें कैंसर का खतरा बढ़ा सकती हैं, इसलिए लोगों यह चिंता बनी हुई है कि कहीं मोबाइल फोन से निकलने वाली रेडियो तरंगें भी इंसानों के लिए नुकसानदायक तो नहीं हैं?
- इसी चिंता को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने वर्ष 2019 में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों के स्वास्थ्य पर असर को समझने के लिए 13 वैज्ञानिक समीक्षाएं करवाई थीं।
- हालिया अध्ययन में में इन्हीं 13 समीक्षाओं के निष्कर्षों का विश्लेषण किया गया है।
- इसमें मोबाइल फोन से निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों के कारण मस्तिष्क, सिर या गर्दन में कैंसर का कोई भी लिंक नहीं मिला।
अध्ययन में क्या सामने आया?
वैज्ञानिकों की अलग-अलग टीमों ने पहले से प्रकाशित हजारों अध्ययनों का विश्लेषण किया।
- ब्रेन कैंसर वाली समीक्षा के लिए साल 1994 से 2022 के बीच प्रकाशित 63 अध्ययनों का विश्लेषण किया गया।
- इसमें पाया गया कि मोबाइल फोन के इस्तेमाल और ब्रेन कैंसर, सिर के कैंसर या गर्दन के कैंसर का कोई लिंक नहीं है।
- इतना ही नहीं, इससे कोई फर्क भी नहीं पड़ा कि कोई व्यक्ति मोबाइल का कितना ज्यादा या कितने वर्षों से इस्तेमाल कर रहा था।
- वैज्ञानिकों ने यह भी पाया गया कि रेडियो और टेलीविजन ट्रांसमिशन से निकलने वाली तरंगों से भी कैंसर का खतरा नहीं रहता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
वैज्ञानिकों ने कहा, अगर मोबाइल फोन वास्तव में ब्रेन कैंसर का खतरा बढ़ाते, तो जैसे-जैसे मोबाइल फोन का इस्तेमाल बढ़ा, वैसे-वैसे ब्रेन कैंसर के मामलों में भी साफ बढ़ोतरी दिखाई देती, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उदाहरण के तौर पर ऑस्ट्रेलिया में 1980 के दशक से अब तक सभी प्रकार के ब्रेन कैंसर की दर लगभग स्थिर बनी हुई है, जबकि मोबाइल फोन का व्यापक इस्तेमाल तो इसके कई साल बाद शुरू हुआ।
वैज्ञानिकों ने यह भी साफ कहा कि विज्ञान कभी यह 100 प्रतिशत साबित नहीं कर सकता कि किसी चीज से बिल्कुल भी जोखिम नहीं है। लेकिन फिलहाल उपलब्ध सबसे मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण यही बताते हैं कि मोबाइल फोन के इस्तेमाल से कैंसर का खतरा नहीं है। मोबाइल फोन का ज्यादा इस्तेमाल कई दूसरी तरह की दिक्कतें बढ़ाता हुआ देखा गया है, जिसको लेकर अलर्ट रहना चाहिए। विशेषतौर पर बच्चों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल को कम करना बहुत जरूरी है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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