Brain Tumor: कान में रहने वाले दर्द ने कैसे ले ली 21 साल के कलाकार की जान? आपकी आंखें खोल देगी ये रिपोर्ट
ब्रिटेन के बेडफोर्ड शहर के रहने वाले 21 वर्षीय कलाकार टायलर मॉर्टन की एक बेहद खतरनाक ब्रेन ट्यूमर से मौत हो गई। दुखद बात यह रही कि शुरुआत में डॉक्टरों ने उनके लक्षणों को सामान्य कान का संक्रमण समझकर इलाज करते रहे।
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शरीर में हल्के-फुल्के दर्द, असहजता को हम सभी अक्सर सामान्य मानकर अनदेखा करते रहते हैं, पर हर दर्द सामान्य हो ये जरूरी नहीं है। 21 साल के टायलर मॉर्टन की कहानी यही सीख देती है।
किसी ने सोचा भी नहीं था कि कान में रहने वाला साधारण दर्द कुछ ही हफ्तों में इस 21 साल के युवा कलाकार की जिंदगी छीन लेगा। शुरुआत में डॉक्टरों ने भी इसे कान का सामान्य संक्रमण और चक्कर आने की समस्या मान लिया। एंटीबायोटिक दवाएं दी गईं, परिवार भी यही सोचता रहा कि कुछ दिनों में सब ठीक हो जाएगा। लेकिन हर गुजरते दिन के साथ टायलर की हालत बिगड़ती चली गई।
पहले चेहरे का एक हिस्सा सुन्न हुआ, फिर चलना मुश्किल हो गया, उसके बाद उल्टियां शुरू हुईं और देखते ही देखते शरीर का आधा हिस्सा काम करना बंद कर गया। जब तक असली वजह सामने आई, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
जांच में पता चला कि टायलर को ग्रेड-4 ग्लियोब्लास्टोमा था, जो दिमाग का सबसे खतरनाक और तेजी से फैलने वाला कैंसर माना जाता है। यह बीमारी इतनी आक्रामक होती है कि कई बार शुरुआती लक्षण सामान्य बीमारियों जैसे सिरदर्द, कान दर्द, चक्कर, उल्टी या कमजोरी जैसे दिखाई देते हैं। यही वजह है कि कई मामलों में इसकी पहचान देर से हो पाती है।
टायलर के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उनकी हालत इतनी गंभीर हो चुकी थी कि डॉक्टर उन्हें कीमोथेरेपी तक नहीं दे सके और शुरुआती लक्षण आने के कुछ ही हफ्तों बाद उनकी मौत हो गई। डॉक्टर कहते हैं, इस मामले पर ध्यान देते हुए सभी लोगों को समझ लेना चाहिए कि शरीर में कुछ भी असामान्य होना, सामान्य नहीं है।
शरीर में कुछ भी असामान्य हो तो न करें इग्नोर
डॉक्टर कहते हैं, ये घटना सवाल उठाती है कि क्या कुछ मामलों में साधारण दिखने वाले लक्षण भी किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते हैं?
- विशेषज्ञों का कहना है कि अगर न्यूरोलॉजिकल लक्षण जैसे चेहरे का सुन्न होना, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी, संतुलन बिगड़ने या बोलने में परेशानी जैसी दिक्कतें हैं तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
- हालांकि हर कान दर्द या चक्कर आने का मतलब ब्रेन ट्यूमर नहीं होता, लेकिन लगातार बिगड़ते लक्षणों की समय पर जांच बेहद जरूरी है।
ब्रिटेन के बेडफोर्ड शहर के रहने वाले 21 वर्षीय कलाकार टायलर मॉर्टन की लक्षण सामने आने के एक महीने के भीतर ही मौत हो गई। शुरुआत में डॉक्टर भी उनकी दिक्कतों को समझ नहीं पाए और लक्षणों को सामान्य कान का संक्रमण समझकर इलाज करते रहे।
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कान का दर्द निकला ब्रेन ट्यूमर
इसी साल जनवरी में टायलर को सबसे पहले कान में तेज दर्द हुआ। कुछ ही दिनों बाद उनके चेहरे के बाईं तरफ सुन्नपन महसूस होने लगा और उन्हें ठीक से चलने में भी परेशानी होने लगी।
- जब वे अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें कान का संक्रमण और वर्टिगो बताया। उन्हें एंटीबायोटिक दवाएं देकर घर भेज दिया गया।
- लेकिन दवाओं का कोई असर नहीं हुआ। उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी।
- उन्हें लगातार उल्टियां होने लगीं और धीरे-धीरे उनके शरीर का पूरा बायां हिस्सा काम करना बंद करने लगा।
इसके बाद डॉक्टरों ने सीटी स्कैन किया। जांच में उनके दिमाग में एक लीजन मिला। लीजन का मतलब है कि दिमाग के किसी हिस्से में असामान्य या क्षतिग्रस्त टिश्यू दिखाई देना। इसके बाद उनकी बायोप्सी,ताकि बीमारी का सही पता लगाया जा सके।
बायोप्सी की रिपोर्ट में पता चला कि उन्हें ग्रेड-4 ग्लियोब्लास्टोमा है। यह दिमाग का ब्रेन का खतरनाक और तेजी से फैलने वाला कैंसर माना जाता है। फिलहाल इसका कोई स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है।
टायलर की हालत इतनी ज्यादा खराब हो चुकी थी कि डॉक्टरों ने बताया कि वे कीमोथेरेपी जैसे इलाज के लिए भी फिट नहीं हैं। 25 मार्च को शुरुआती लक्षण दिखाई देने के सिर्फ कुछ ही हफ्तों बाद टायलर की मौत हो गई।
टायल के परिवार का मानना है कि अगर शुरुआत में ही बीमारी का सही पता चल जाता, तो शायद इलाज शुरू किया जा सकता था और कुछ उम्मीद बचती। कम से कम हमें यह सुकून होता कि हमने उसे बचाने की पूरी कोशिश की थी।
ब्रेन ट्यूमर रिसर्च की रिसर्च और पॉलिसी डायरेक्टर डॉ. करेन नोबल ने कहती हैं टायलर की कहानी उन हजारों परिवारों की दर्दनाक हकीकत को दिखाती है, जो हर साल इस बीमारी का सामना करते हैं।
दुनियाभर में बढ़ रहा है ब्रेन ट्यूमर का खतरा
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि दुनिया भर में, ब्रेन और सेंट्रल नर्वस सिस्टम के ट्यूमर से हर साल लगभग 2.50 लाख लोगों की मौत होती है। यह दुनिया भर में कैंसर से होने वाली सभी मौतों का लगभग 2.5% है।
- वहीं ग्लियोब्लास्टोमा एक गंभीर प्रकार का ब्रेन कैंसर है जो एस्ट्रोसाइट्स नामक कोशिकाओं में शुरू होता है। ये तंत्रिका कोशिकाओं को सहारा देती हैं।
- यह वयस्कों में होने वाला सबसे आम और घातक ब्रेन ट्यूमर है। ग्रेड 4 का मतलब है कि ट्यूमर तेजी से बढ़ रहा है और आसपास के मस्तिष्क ऊतकों में फैलने लगा है, जिससे इसे पूरी तरह से हटाना मुश्किल हो जाता है। टायलर को भी यही समस्या थी।
- ब्रेन में ट्यूमर किस जगह पर बन रहा है इसके आधार पर लोगों को लक्षण महसूस हो सकते हैं। ज्यादातर लोगों को दौरे पड़ने या सोचने-बोलने और देखने में समस्या के साथ शरीर के संतुलन में भी दिक्कतें होने लग जाती हैं।
अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया कि गर्भनिरोधक दवाओं और इंजेक्शन का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं में मेनिन्जियोमा नाम के ब्रेन ट्यूमर का खतरा सामान्य महिलाओं की तुलना में अधिक देखा गया। कहीं आप भी तो इस तरह की गोलियों का सेवन नहीं कर रही हैं? पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
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स्रोत:
Credit to- 21-year-old man died from an incurable brain tumour
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