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Ebola Outbreak: इबोला को लेकर कई देशों में हाहाकार, 10 प्वाइंट्स में इस संक्रामक रोग के बारे में जानिए सबकुछ

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Tue, 19 May 2026 02:48 PM IST
सार

Ebola Outbreak 2026: इबोला एक गंभीर वायरल बीमारी है, वायरस शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली और रक्त वाहिकाओं पर हमला करता है, जिससे अंगों को नुकसान पहुंच सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कांगो और युगांडा में इबोला के प्रकोप को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है।

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इबोला का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI

मई की शुरुआत से हंतावायरस के प्रकोप को लेकर दुनियाभर में डर देखा जा रहा है, इसी बीच कांगो और युगांडा में फैले इबोला वायरस ने चिंताओं को और बढ़ा दिया है। तेजी से बढ़ते खतरे को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) इबोला के प्रकोप को 'अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' घोषित कर दिया है।



स्थानीय अधिकारियों ने बताया है कि डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला के प्रकोप से कम से कम 131 लोगों की मौत की खबर है, और 513 से ज्यादा मामलों में संक्रमण का संदेह है।

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक वायरस के एक खतरनाक माने जाने वाले स्ट्रेन 'बुंडिबुग्यो' की सूचना मिली है, जिसके कारण यह प्रकोप देखा जा रहा है। संक्रमण की रोकथाम के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। पहले भी बुंडिबुग्यो स्ट्रेन के प्रकोप के मामले रिपोर्ट किए जा चुके हैं। साल 2007 और 2012 में भी बीमारी फैल चुकी है जिसके कारण 30% संक्रमितों की मौत हो गई थी।

इबोला वायरस के इस स्ट्रेन के लिए अब तक कोई टीका या दवा उपलब्ध नहीं है।

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कांगो और युगांडा में इबोला का प्रकोप - फोटो : Amarujala.com

डब्ल्यूएचओ के इसे 'अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' घोषित करने का मतलब है कि हालात इतने पेंचीदा हैं कि उनके लिए अंतरराष्ट्रीय तालमेल की जरूरत है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर ट्रूडी लैंग कहती हैं कि इस प्रकोप में बुंडीबुग्यो से निपटना सबसे बड़ी चिंताओं में से एक है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं किसी भी बीमारी के चेन को तोड़ने के लिए सबसे जरूरी है कि लोगों को बचाव को लेकर जागरूक कर दिया जाए। आइए इबोला वायरस को 10 आसान प्वाइंट्स में विस्तार से समझ लेते हैं।


इबोला के लक्षण, कारण और बचाव के बारे में जानिए

1. इबोला एक दुर्लभ लेकिन जानलेवा संक्रमण है। ये शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली और रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करता है। इसके शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे दिखाई देते हैं, इसलिए कई बार लोग इसे सामान्य फ्लू समझ लेते हैं। संक्रमण गंभीर स्थितियों में जानलेवा तक हो सकता है।

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इबोला और इसके खतरे - फोटो : Adobe Stock


2. इबोला के शिकार मरीजों को शुरुआत में तेज बुखार, सिरदर्द, गले में दर्द, मांसपेशियों में कमजोरी और अत्यधिक थकान महसूस हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार शुरुआती पहचान बेहद जरूरी होती है, क्योंकि संक्रमण बढ़ने पर स्थिति तेजी से गंभीर हो सकती है। 


3. इबोला वायरस जानवरों, मुख्य रूप से चमगादड़ों को संक्रमित करता है लेकिन अगर आप इनके सीधे संपर्क में आते हैं, तो इंसानों में भी संक्रमण का जोखिम रहता है। संक्रमित व्यक्ति के खून, पसीने, लार, उल्टी, पेशाब जैसे तरल पदार्थों के संपर्क से भी ये दूसरों में फैल सकता है।


4. इबोला के हवा के माध्यम से फैलने का खतरा नहीं होता है। ये मुख्यरूप से संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क से फैलता है। पूरी तरह ठीक होने के बाद, आपका इम्यून सिस्टम ऐसी एंटीबॉडीज बनाता है जो आपको लगभग 10 साल तक इबोला से सुरक्षित रखने में मददगार हो सकती है।


5. संक्रमण बढ़ने पर इबोला के लक्षण बेहद गंभीर हो सकते हैं। मरीज को लगातार उल्टी, दस्त, पेट दर्द और शरीर में पानी की कमी हो सकती है। गंभीर स्थिति में रक्तस्राव शुरू हो सकता है और इससे किडनी-लिवर को भी खतरा रहता है। 

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इबोला के कारण क्या दिक्कतें होती है? - फोटो : Adobe Stock


6. इबोला से बचने के लिए संक्रमित व्यक्ति या उसके शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क से बचना सबसे जरूरी है। हाथों को साबुन या सैनिटाइजर से बार-बार साफ करना संक्रमण रोकने में मदद करता है। संक्रमित क्षेत्रों में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार साफ-सफाई और समय पर आइसोलेशन संक्रमण रोकने में असरदार माने जाते हैं।


7. इबोला को दुनिया के सबसे घातक वायरल संक्रमणों में गिना जाता है क्योंकि यह शरीर के कई अंगों को तेजी से नुकसान पहुंचा सकता है। वायरस रक्त वाहिकाओं को प्रभावित कर ब्लीडिंग और अंगों की खराबी का कारण बनता है। कुछ प्रकोपों में इसकी मृत्यु दर 50% से अधिक दर्ज की गई है।
 

8. शुरुआती चरण में इसके लक्षण फ्लू या मलेरिया-टाइफाइड से मिलते जुलते हो सकते हैं, इसलिए सही जांच बेहद जरूरी होती है। इबोला की पुष्टि केवल लैब टेस्ट के जरिए की जाती है। अगर किसी ने संक्रमण प्रभावित क्षेत्रों की यात्रा की है और उसे बुखार और अन्य लक्षण हो रहे हों तो सावधान हो जाना चाहिए और डॉक्टर से मिलकर जांच करानी चाहिए।

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इबोला के लिए वैक्सीन है या नहीं? - फोटो : Adobe Stock


9. इबोला का समय पर पता चल जाए तो इसे ठीक किया जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इबोला में दो मोनोक्लोनल एंटीबॉडी उपचारों का उपयोग करते हैं। मोनोक्लोनल एंटीबॉडी आपके इम्यून सिस्टम की प्राकृतिक एंटीबॉडी की तरह काम करती हैं। जब तक आपका शरीर अपनी खुद की सुरक्षा प्रणाली विकसित कर रहा होता है, तब तक ये संक्रमण से लड़ने में मदद करती हैं।


10. वर्तमान में, जायर इबोलावायरस स्ट्रेन के कारण होने वाली बीमारी को रोकने के लिए दो टीके उपलब्ध हैं। ये टीके अन्य स्ट्रेन पर असरदार नहीं पाए गए हैं। कांगो और युगांडा में फैले मौजूदा प्रकोप वाले स्ट्रेन के लिए कोई टीका फिलहाल नहीं है।




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स्रोत:
Ebola Virus Disease


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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