मानसून का ये समय भीषण गर्मी से राहत दिलाने वाला जरूर होता है, पर ये अपने साथ कई प्रकार की बीमारियों को भी लेकर आता है। बारिश के दिनों में आर्द्रता के साथ कई प्रकार के बैक्टीरिया-वायरस भी बढ़ने लगते हैं जिससे कई तरह की संक्रामक बीमारियां हो सकती हैं।
Monsoon Health: बरसात के दिनों में बढ़ जाता है आंखों में संक्रमण का खतरा, ऐसे करें देखभाल
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
अमर उजाला से बातचीत में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ मनदीप सिंह बासु कहते हैं, मानसून के दिनों में बढ़ी हुई नमी और दूषित पानी के संपर्क में आने के कारण आंखों से संबंधित समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। बैक्टीरिया और वायरल संक्रमण के कारण आंखों में चिपचिपापन, पीला स्राव और सूजन जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
बरसात के दिनों में आंखों में होने वाली किसी भी समस्या के जोखिम को कम करने के लिए कुछ सावधानियों का ध्यान रखना आवश्यक है। हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखना, आंखों को बार-बार छूने से बचना और सुरक्षात्मक चश्मे पहनना आवश्यक हो जाता है।
हो सकती है कंजंक्टिवाइटिस की समस्या
मानसून के दिनों में कंजंक्टिवाइटिस जिसे पिंक आइज भी कहा जाता है, इसका जोखिम अधिक देखा जाता रहा है। इसका मुख्य कारण वायरस या बैक्टीरिया के कारण होने वाला संक्रमण है। कुछ लोगों में एलर्जी के कारण भी कंजंक्टिवाइटिस की दिक्कत हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इस तरह की दिक्कतों से बचे रहने के लिए मानसून के दौरान सार्वजनिक पूल में तैरने से बचें। कॉन्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल करते समय विशेष सावधानी बरतें।
मानसून के दौरान आंखों की देखभाल
आंखों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए कुछ प्रभावी उपायों का पालन करना जरूरी हो जाता है।
- आंखों को बार-बार छूने से बचना चाहिए। दूषित हाथों के माध्यम से कीटाणु और बैक्टीरिया आंखों में प्रवेश करके संक्रमित कर सकते हैं।
- चेहरे के लिए अलग-अलग तौलिया रखें, इसे किसी के साथ साझा न करें।
- जलभराव वाले स्थानों पर न जाएं, क्योंकि यहां पर विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया और वायरस अधिक हो सकते हैं।
- डॉक्टर के पर्चे के बिना आंखों के लिए किसी भी आई ड्रॉप का इस्तेमाल न करें।
- संक्रमण की आशंका को कम रखने के लिए आंखों पर मेकअप न लगाएं।
- अपने चेहरे को साफ पानी से धोते रहें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।