Roj Gehun-Chawal Khane ke Nuksan: भारत एक ऐसा देश है जहां अनाजों की अपार विविधता मौजूद है, लेकिन आधुनिक जीवनशैली में हमारा 'कंफर्ट जोन' केवल गेहूं की रोटी और चावल की थाली तक सिमट कर रह गया है। हाल ही में डॉक्टर शालिनी सिंह सोलंकी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है जिसके जरिए देशवासियों को सचेत किया है कि सुबह-शाम केवल गेहूं और चावल का ही सेवन करना हमारी सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
Health Tips: क्या रोज आटा-चावल का सेवन अनहेल्दी है? कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलतियां
Wheat And Rice Side Effects: उत्तर भारत में ज्यादातर हिस्सों में लोग आमतौर पर गेहूं का आटा और चावल खाना पसंद करते हैं। दरअसल वैसे तो चावल और आटा सेहत के लिए फायदेमंद है, लेकिन हर दिन इसका सेवन करना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में डॉक्टर से जानते हैं।
गेहूं-चावल की एकरसता शरीर को कैसे नुकसान पहुंचा रही है?
डॉक्टर शालिनी सिंह सोलंकी ने रोज केवल गेहूं और चावल खाने के पांच गंभीर नुकसान बताए हैं-
- पोषक तत्वों का असंतुलन: इनमें कार्बोहाइड्रेट तो भरपूर है, लेकिन सेलेनियम, मैग्नीशियम और जिंक जैसे माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की भारी कमी होती है, जिससे बाल झड़ना और थकान जैसी समस्याएं होती हैं।
- पाचन तंत्र पर दबाव: एक ही तरह का फाइबर मिलने से गट बैक्टीरिया को अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जो कब्ज और एसिडिटी का कारण बनता है।
- इंसुलिन रेजिस्टेंस: हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स के कारण प्रिडायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।
- एंटीऑक्सीडेंट की कमी: अलग अनाज न खाने से शरीर को विभिन्न बीमारियों से लड़ने वाले सुरक्षा कवच नहीं मिल पाते।
- अनहेल्दी क्रेविंग्स: रोज एक ही स्वाद से बोरियत होने पर व्यक्ति मीठा और तला-भुना खाने की ओर आकर्षित होता है।
क्या मिलेट्स इसका बेहतर समाधान हैं?
डॉक्टर सोलंकी का सुझाव है कि हमें अपने भोजन में विविधता लानी चाहिए और हर तरह के मिलेट्स (जैसे बाजरा, रागी, ज्वार) को शामिल करना चाहिए। अलग-अलग अनाज में मौजूद अलग-अलग एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की आंतरिक मरम्मत करते हैं। जब आप बदल-बदल कर अनाज खाते हैं, तो आपके पेट के अच्छे बैक्टीरिया यानी 'गट माइक्रोबायोम' अधिक स्वस्थ और सक्रिय रहते हैं।
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इंसुलिन और ब्लड शुगर पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है?
रोज गेहूं और चावल जैसा 'हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स' वाला खाना खाने से खून में शुगर का लेवल तेजी से बढ़ता है। इसके बदले में शरीर को बार-बार इंसुलिन रिलीज करना पड़ता है, जिससे धीरे-धीरे 'इंसुलिन रेजिस्टेंस' पैदा हो जाता है। यह स्थिति न केवल वजन बढ़ाती है, बल्कि टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को भी कई गुना बढ़ा देती है। मिलेट्स का सेवन करने से इस प्रक्रिया को धीमा और सुरक्षित बनाता है।
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक सिर्फ कंफर्ट के पीछे भागना आपकी उम्र कम कर सकता है। अपनी डाइट में विविधता लाएं और गेहूं-चावल के अलावा अन्य मोटे अनाजों को भी डाइट में शामिल करें, जैसे ज्वार, बाजरा, रागी और कंगनी जैसे मिलेट्स का सेवन कर सकते हैं। इससे न केवल आपकी कमजोरी और थकान दूर होगी, बल्कि आपकी इम्यूनिटी भी फौलादी बनेगी। आज ही अपनी पुरानी आदतों को बदलें और एक स्वस्थ भविष्य की शुरुआत करें।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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