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Viral News: क्या कोई 50 साल तक बिना सोए जिंदा रह सकता है? सोशल मीडिया पर वायरल इस खबर पर क्या कहते हैं डॉक्टर

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Tue, 20 Jan 2026 03:08 PM IST
सार

Viral News on Social Media: मध्य प्रदेश के रीवा निवासी एक बुजुर्ग व्यक्ति का दावा है कि उन्हें पिछले लगभग 50 वर्षों से नींद नहीं आई। जबकि अध्ययनों से यह सिद्ध हो चुका है कि लगातार कुछ दिनों तक नींद न मिलने पर व्यक्ति को कई तरह की दिक्कतें होने लगती हैं।

सोशल मीडिया पर ये खबर वायरल है, जानिए इसपर क्या कहते हैं डॉक्टर?

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75 साल के बुजुर्ग का दावा, 50 साल से सोया नहीं - फोटो : X/Social Media

अच्छी सेहत के लिए पौष्टिक आहार का सेवन और नियमित व्यायाम जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है हर रात 7-9 घंटे की निर्बाध नींद लेना। मेडिकल साइंस कहता है अगर एक रात भी आपकी नींद पूरी नहीं होती है तो इसका सीधा असर अगले दिन के कामकाज और आपकी उत्पादकता पर पड़ सकता है।



नींद पूरी न होने के कारण आपको पूरे दिन थकान, चिड़चिड़ापन, तनाव जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। वहीं अगर नींद पूरी न होने की ये दिक्कत लंबे समय तक बनी रहती है तो इसके कारण हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज जैसी क्रॉनिक बीमारियों के साथ मेंटल हेल्थ से संबंधित समस्याएं भी घेर सकती हैं।

हालांकि इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल एक खबर ने लोगों को काफी चौंका दिया है। खबर मध्य प्रदेश के रीवा जिले से है। यहां रहने वाले 75 वर्षीय बुजुर्ग मोहनलाल द्विवेदी का कहना है कि पिछले 50 वर्षों में वह एक बार भी नहीं सोए हैं। 1973 में उन्हें आखिरी बार नींद आई थी, इसके बाद से वह लगातार जग रहे हैं। रात को वह आंखे बंद भी कर लेते हैं, लेकिन नींद नहीं आती।

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल इस खबर को कोई चमत्कार बता रहा है तो कोई कह रहा है ये सरासर झूठ है, बिना नींद के कोई एक दिन भी अच्छे से नहीं रह सकता तो फिर 50 साल तक बिना सोए रहने की बात गले से उतर नहीं रही।

पर सवाल वही है, क्या वास्तव में ऐसा संभव है?

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बिना नींद के 50 साल - फोटो : Adobe Stock

...''अब तो आदत हो गई, कोई दिक्कत नहीं होती''

बुजुर्ग व्यक्ति का कहना है-

इसे मैं अब बहुत गंभीरता से नहीं लेता। शुरुआत में जब दो-तीन दिन नींद नहीं आई तो सोचा आखिर ये हो क्यों रहा है? लेकिन कभी दवा नहीं ली। ये ऐसे ही चलता रहा। नींद न आने की वजह से मुझे कभी भारीपन, आंखों में दर्द, थकान जैसी कोई दिक्कत भी नहीं हुई। 

मोहनलाल कहते हैं, इसके इलाज के लिए बाद में मुंबई-दिल्ली गया था, पर डॉक्टरों ने कहा आपको कोई बीमारी ही नहीं है तो किस बात की दवा दें। रात में मैं लेटा रहता हूं, आंखें बंद करता हूं फिर भी दिमाग जगता रहता है। झाड़-फूंक भी कराया पर कुछ बदला नहीं। 

ये मामला वास्तव में हैरान करने वाला है। आइए जानते हैं वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी इस समस्या को किस तरह से देखते हैं?

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क्या बिना सोए जिंदा रहना संभव है? - फोटो : Freepik.com

क्या कहते हैं मनोचिकित्सक?

डॉ सत्यकांत कहते हैं, ऐसी खबरें पढ़ते ही जिज्ञासा तो होती ही है, लेकिन उससे कहीं अधिक एक चिकित्सकीय चिंता भी पैदा होती है। मैं नींद और मानसिक रोगों का उपचार करने वाला चिकित्सक हूं,  इसलिए ये स्थिति मुझे भी हैरान कर रही है।

स्पष्ट शब्दों में कहा जाए तो कोई भी व्यक्ति 50 वर्षों तक बिल्कुल नहीं सोया हो, यह जैविक रूप से असंभव है। नींद मनुष्य की मूलभूत आवश्यकता है, जैसे भोजन, पानी और सांस। हमारा मस्तिष्क अपने आप यह सुनिश्चित करता है कि शरीर को आराम मिले। चाहे कोई व्यक्ति कितनी भी कोशिश कर ले, लंबे समय तक नींद को रोका नहीं जा सकता।

वैज्ञानिक अध्ययनों से यह सिद्ध हो चुका है कि लगातार कुछ दिनों तक नींद न मिलने पर व्यक्ति में भ्रम होने लगता है, अजीब चीजें दिखाई देने लगती हैं, सोचने-समझने की क्षमता घट जाती है और गंभीर मानसिक विकार उत्पन्न हो सकते हैं। ऐसे में दशकों तक बिना सोए रहना संभव ही नहीं है। अब सवाल उठता है कि फिर व्यक्ति ऐसा दावा क्यों कर रहा है?

इसका उत्तर नींद का न होना नहीं, बल्कि नींद को महसूस न कर पाना है।

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नींद पूरी न होने के कारण हो सकती हैं गंभीर समस्याएं - फोटो : Adobe stock

ये दावा सही है या नहीं?

डॉक्टर सत्यकांत कहते हैं, अस्पतालों में अक्सर ऐसे मरीज मिलते हैं जो कहते हैं कि वे वर्षों से सोए नहीं हैं। वास्तविकता यह होती है कि वे सोते तो हैं, लेकिन उनकी नींद बहुत हल्की होती है, बार-बार टूटती है और गहरी नींद का अनुभव नहीं हो पाता। परिणामस्वरूप व्यक्ति को लगता है कि वह पूरी रात जागता रहा। यह स्थिति अक्सर अनिद्रा, चिंता, अवसाद, लंबे समय के मानसिक तनाव, मानसिक उत्तेजना की अवस्थाओं या नशे के सेवन से जुड़ी होती है। कुछ मामलों में यह विश्वास इतना मजबूत हो जाता है कि मरीज जांच के बाद भी मानने को तैयार नहीं होता कि वह सोता है।

चिकित्सकीय दृष्टि से ऐसे मामलों में न मरीज की बात को मजाक में लेना चाहिए और न ही बिना मूल्यांकन उसे पूरी तरह सच मान लेना चाहिए। सही तरीका है ,नींद का विस्तृत इतिहास लेना, नींद का रिकॉर्ड बनवाना और मानसिक स्थिति का समुचित आकलन करना।

50 वर्षों से नींद न आने की बाद कोई शारीरिक सच्चाई नहीं, बल्कि एक मानसिक अनुभव हो सकता है। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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