दुनियाभर के लिए मौजूदा समय में कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। अब तक हुए अध्ययनों के आधार पर दावा किया जा रहा है कि कोरोना के इस वैरिएंट में 30 से अधिक म्यूटेशन देखे गए हैं जो इसे अब तक का सबसे संक्रामक वैरिएंट बनाते हैं। सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका में देखे गए कोरोना के इस वैरिएंट ने तेजी से अपने पैर फैलाने शुरू कर दिए हैं। अब तक 10 से अधिक देशों में ओमिक्रॉन से संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं। कई देशों ने कोरोना से एहतियात के दौर पर अंतरराष्ट्रीय यातायात को प्रतिबंधित करना शुरू कर दिया है। इन सबके बीच लोगों के मन में एक सवाल अब भी बना हुआ है कि आखिर सबसे पहले ओमिक्रॉन से संक्रमित कौन हुआ या फिर किस व्यक्ति से ओमिक्रॉन संक्रमण की शुरुआत हुई है?
बड़ा सवाल: जानिए कैसे हुआ कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट का उदय? क्या है इसका एड्स कनेक्शन
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कैसे होता है वायरस का म्यूटेशन?
वायरस में म्यूटेशन के बारे में समझने की कोशिश करें तो वैज्ञानिक बताते हैं, वायरस के आनुवंशिक कोडिंग में कुछ त्रुटियों के कारण म्यूटेशन होता है। आमतौर पर यह स्थिति तब आती है जब वायरस रेप्लीकेट कर रहा होता है। कभी-कभी आनुवंशिक कोड में ये परिवर्तन वायरस में एक प्रोटीन को बदल देते हैं जिससे वायरस की प्रकृति में बदलाव आ जाता है। यही कारण है कि म्यूटेशन के बाद वायरस अधिक संक्रामक और घातक हो जाते हैं। ओमिक्रॉन के मामले में भी संभवत: ऐसा ही कुछ हुआ होगा।
इम्युनोकॉम्प्रोमाइज्ड रोगियों में वायरस का म्यूटेशन
नेचर जर्नल में फरवरी में प्रकाशित एक अध्ययन में एक इम्युनोकॉम्प्रोमाइज्ड मरीज के डेटा के बारे में बताया गया था जिसकी कोविड संक्रमित रहने के 102 दिनों के बाद मृत्यु हो गई थी। 102 दिनों की अवधि में 23 अलग-अलग दिनों में लिए गए नमूनों के अध्ययन में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय की एक टीम ने पाया कि इम्युनोकॉम्प्रोमाइज्ड मरीज के शरीर में वायरस में होने वाले म्यूटेशन इसे अधिक आसानी से फैलने और एंटीबॉडी से बचने में सक्षम बनाते हैं।
इस अध्ययन में भी सामने आई म्यूटेशन वाली बात
इसके अलावा पिछले साल द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन (एनईजेएम) में प्रकाशित एक जर्नल में हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के शोधकर्ताओं ने इम्युनोकॉम्प्रोमाइज्ड कोविड पॉजिटिव रोगी के मामले का वर्णन किया था। वह रोगी 152 दिनों तक कोरोना से संक्रमित रहा। इस दौरान अलग-अलग समय पर लिए गए सैंपलों के अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया था कि संक्रमण की अवधि के दौरान वायरस के स्पाइक प्रोटीन में 12 म्यूटेशनों की पहचान की गई थी, जो इसे प्रतिरक्षा से बचने के योग्य बना रहे थे।
ओमिक्रॉन वैरिएंट के उदय को लेकर अध्ययन
इस तरह के रिपोर्टस के आधार पर अब वैज्ञानिक इस बात का कयास लगा रहे हैं कि संभवत: ओमिक्रॉन वैरिएंट भी किसी इम्युनोकॉम्प्रोमाइज्ड कोविड पॉजिटिव रोगी के माध्यम से भी उपजा हो सकता है। इतना ही नहीं तमाम अध्ययनों के माध्यम से वैज्ञानिक चिकित्सकों को भी सतर्क कर रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि इम्युनोकॉम्प्रोमाइज्ड कोविड रोगियों का इलाज करते समय विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है, क्योंकि ऐसे रोगी वायरस के म्यूटेशन के प्रमुख वाहक बन सकते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। अमर उजाला इस दावे की पुष्टि नहीं करता है, यह वैज्ञानिक का मत है।
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