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Baby Care Tips: क्या नवजात शिशु को शहद चटाना सुरक्षित है?
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Wed, 17 Jun 2026 11:00 AM IST
सार
Baby Care Tips: अक्सर आपने बड़े-बुजुर्गों को ये कहते सुना होगा कि बच्चे के पैदा होने के बाद उसे शहद चटाना चाहिए। ये कितना सही है, आज हम इसी बारे में बात करेंगे।
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क्या नवजात शिशु को शहद चटाना सुरक्षित है?
- फोटो : AI
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Baby Care Tips: भारत में सदियों से चली आ रही कई परंपराएं आज भी नवजात शिशुओं की देखभाल में अपनाई जाती हैं। इन्हीं में से एक है बच्चे के जन्म के बाद उसे शहद चटाने की परंपरा। अक्सर बड़े-बुजुर्ग मानते हैं कि शहद चटाने से बच्चे का जीवन मीठा होता है और उसकी सेहत बेहतर रहती है। हालांकि, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान इस परंपरा को सुरक्षित नहीं मानता।
क्या नवजात शिशु को शहद चटाना सुरक्षित है?
- फोटो : Adobe stock
क्या नवजात शिशु को शहद चटाना चाहिए?
बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार एक साल से कम उम्र के बच्चों को शहद नहीं देना चाहिए। नवजात शिशु का पाचन तंत्र पूरी तरह विकसित नहीं होता, इसलिए वह शहद में मौजूद कुछ बैक्टीरिया से लड़ नहीं पाता।
क्या नवजात शिशु को शहद चटाना सुरक्षित है?
- फोटो : Adobe stock
शहद क्यों हो सकता है खतरनाक?
1. इन्फेंट बोटुलिज्म का खतरा
नवजात शिशुओं को शहद न देने की सबसे बड़ी वजह इन्फेंट बोटुलिज्म का खतरा है। शहद में क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम नामक बैक्टीरिया के सूक्ष्म स्पोर्स मौजूद हो सकते हैं, जो वयस्कों के लिए आमतौर पर नुकसानदायक नहीं होते, लेकिन शिशुओं के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं।
एक साल से कम उम्र के बच्चों की आंतें पूरी तरह विकसित नहीं होतीं, इसलिए ये स्पोर्स उनकी आंतों में बढ़ने लगते हैं और जहरीले तत्व (टॉक्सिन) पैदा कर सकते हैं।
1. इन्फेंट बोटुलिज्म का खतरा
नवजात शिशुओं को शहद न देने की सबसे बड़ी वजह इन्फेंट बोटुलिज्म का खतरा है। शहद में क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम नामक बैक्टीरिया के सूक्ष्म स्पोर्स मौजूद हो सकते हैं, जो वयस्कों के लिए आमतौर पर नुकसानदायक नहीं होते, लेकिन शिशुओं के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं।
एक साल से कम उम्र के बच्चों की आंतें पूरी तरह विकसित नहीं होतीं, इसलिए ये स्पोर्स उनकी आंतों में बढ़ने लगते हैं और जहरीले तत्व (टॉक्सिन) पैदा कर सकते हैं।
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2. सांस लेने में परेशानी
यदि किसी शिशु को इन्फेंट बोटुलिज्म हो जाता है, तो इसका असर उसकी मांसपेशियों और तंत्रिका तंत्र पर पड़ सकता है। इससे बच्चे के शरीर की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, जिनमें सांस लेने वाली मांसपेशियां भी शामिल हैं। ऐसी स्थिति में बच्चे को सांस लेने में कठिनाई, लगातार थकान, कमजोर रोना, सुस्ती और निगलने में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
यदि किसी शिशु को इन्फेंट बोटुलिज्म हो जाता है, तो इसका असर उसकी मांसपेशियों और तंत्रिका तंत्र पर पड़ सकता है। इससे बच्चे के शरीर की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, जिनमें सांस लेने वाली मांसपेशियां भी शामिल हैं। ऐसी स्थिति में बच्चे को सांस लेने में कठिनाई, लगातार थकान, कमजोर रोना, सुस्ती और निगलने में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
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क्या नवजात शिशु को शहद चटाना सुरक्षित है?
- फोटो : Freepik
3. पाचन संबंधी दिक्कतें
नवजात शिशु का पाचन तंत्र जन्म के बाद धीरे-धीरे विकसित होता है। ऐसे में शहद जैसे खाद्य पदार्थों को पचाने में उसे कठिनाई हो सकती है। शहद का सेवन कुछ बच्चों में पेट खराब, कब्ज, गैस, उल्टी या पेट में असहजता जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है।
शिशु का शरीर बाहरी खाद्य पदार्थों के प्रति अधिक संवेदनशील होता है, जिससे संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जीवन के पहले छह महीनों तक केवल मां का दूध और उसके बाद डॉक्टर की सलाह के अनुसार पूरक आहार ही बच्चे के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प है।
नवजात शिशु का पाचन तंत्र जन्म के बाद धीरे-धीरे विकसित होता है। ऐसे में शहद जैसे खाद्य पदार्थों को पचाने में उसे कठिनाई हो सकती है। शहद का सेवन कुछ बच्चों में पेट खराब, कब्ज, गैस, उल्टी या पेट में असहजता जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है।
शिशु का शरीर बाहरी खाद्य पदार्थों के प्रति अधिक संवेदनशील होता है, जिससे संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जीवन के पहले छह महीनों तक केवल मां का दूध और उसके बाद डॉक्टर की सलाह के अनुसार पूरक आहार ही बच्चे के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प है।