मौजूदा समय में कई प्रकार की क्रॉनिक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। डायबिटीज, हृदय रोग हो या हाई ब्लड प्रेशर या कैंसर की बीमारी, ये सभी अब काफी आम हो गई हैं। मोटापे को इन बीमारियों का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। हालांकि जिस तरह से मोटापे की दर भारतीय आबादी में बढ़ रही है उसे लेकर विशेषज्ञ काफी चिंतित हैं।
Obesity Medicine: मोटापे की टेंशन होगी दूर, वैज्ञानिकों को अजगर के खून में मिला 'वेट लॉस का सीक्रेट'
हालिया शोध में वैज्ञानिकों ने अजगर के खून में ऐसे मॉलीक्यूल पाए हैं जो भूख कम करने और वजन घटाने में मददगार हो सकते हैं, इससे मोटापे के इलाज में मदद मिल सकती है। आइए पूरी खबर जान लेते हैं।
अजगर के खून में मौजूद मॉलीक्यूल्स से होगा वेट लॉस
बाजार में पहले से ही वजन घटाने का दावा करने वाली कई दवाएं मौजूद हैं, हालांकि इनके कई साइड-इफेक्ट्स भी देखे गए हैं जिसको लेकर विशेषज्ञ चिंतित रहे हैं। अच्छी खबर ये है कि वैज्ञानिकों का कहना है कि अजगर के खून में मौजूद मॉलीक्यूल्स से बनी दवा के साइड-इफेक्ट्स भी न होने की संभावना है। नेचर मेटाबॉलिज्म जर्नल में इस अध्ययन के निष्कर्ष प्रस्तुत किए गए हैं।
- इस अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि खाने के बाद, अजगरों खून में कुछ खास मॉलिक्यूल्स की मात्रा तेजी से बढ़ जाती है, जो उन्हें मेटाबॉलिज्म को बनाए रखने में मदद करते हैं।
- खाने से पहले और बाद में अजगरों के खून के सैंपल का विश्लेषण किया गया।
- वैज्ञानिकों ने 200 से ज्यादा ऐसे मॉलिक्यूल्स की पहचान की जिनकी मात्रा में काफी बढ़ोतरी हुई।
- इनमें से pTOS नाम का एक मॉलिक्यूल 1,000 गुना से भी ज्यादा बढ़ गया था।
- यह मॉलिक्यूल, जो पेट के बैक्टीरिया द्वारा बनाया जाता है, इंसानों में भी बहुत हल्की मात्रा में पाया जाता है।
- इसे पहले के अध्ययनों में भी वेट लॉस करने वाला माना जाता रहा है।
अध्ययन में क्या पता चला?
pTOS मॉलिक्यूल क्या वास्तव में वजन घटाने में मददगार हो सकता है, इसे समझने के लिए शोधकर्ताओं की टीम ने मोटे चूहों पर अध्ययन किया। इसके बेहतर परिणाम देखे गए।
- अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि इससे चूहों की भूख कम हो गई, उन्होंने कम खाना खाया और 28 दिनों की अवधि में उनका शारीरिक वजन लगभग 9 प्रतिशत कम हो गया।
- pTOS सीधे दिमाग पर असर करता है। यह हाइपोथैलेमस को टारगेट करता है, जो भूख को कंट्रोल करने के लिए ब्रेन का जिम्मेदार हिस्सा है।
- अच्छी बात ये भी है कि वेगोवी जैसी मोटापे की दवा के विपरीत, इससे जी मिचलाने और कोई अन्य साइड इफेक्ट भी नहीं देखे गए।
क्या कहती हैं विशेषज्ञ?
इस अध्ययन की सह-लेखक लेस्ली लीनवांड कहती हैं, इन नतीजों से भूख को कंट्रोल करने का एक नया तरीका सामने आया है, जिसमें मौजूदा इलाज की तरह आम साइड इफेक्ट भी नहीं हैं।
फिलहाल ये अध्ययन अभी शुरुआती दौर में है और चूहों में ही शोध किया गया है। क्या यह मॉलिक्यूल इंसानों के इस्तेमाल के लिए सुरक्षित और असरदार हैं, इसे समझने के लिए हमें आगे शोध की आवश्यकता है। शुरुआती ट्रायल्स के आधार पर वैज्ञानिकों का मानना है कि इसमें वेट लॉस की काफी संभावनाएं हैं।
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स्रोत:
Python metabolomics uncovers a conserved postprandial metabolite and gut–brain feeding pathway
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