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हेल्थ अलर्ट: सांस फूलना ही नहीं, हार्ट अटैक और मानसिक समस्याओं का खतरा भी बढ़ा सकती है प्रदूषित हवा

Fri, 30 Oct 2026 07:26 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 30 Oct 2026 07:26 PM IST
सार

Air Pollution Health Effects: वायु प्रदूषण सिर्फ सांस लेने में परेशानी नहीं बढ़ाता, बल्कि फेफड़ों, दिल और दिमाग की सेहत पर भी असर डाल सकता है। लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से अस्थमा, सीओपीडी, फेफड़ों का कैंसर और हृदय रोगों का जोखिम बढ़ सकता है। 

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Serious Health Problems Caused by Air Pollution PM2.5 Exposure health risks
वायु प्रदूषण से होने वाले खतरे - फोटो : Amarujala.com/AI

अक्तूबर-जनवरी तक के महीने में राजधानी दिल्ली सहित देश के कई राज्यों में वायु प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ जाता है। बीते दिनों दिल्ली-एनसीआर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) का स्तर बिगड़ गया था। शुक्रवार को दिल्ली का एक्यूआई 188 के करीब रहा, जिसे स्वास्थ्य विशेषज्ञ अनहेल्दी कैटेगरी का मानते हैं। आमतौर पर दिवाली के आसपास दिल्ली का एक्यूआई खराब हो जाता है, जिसको लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को अभी से सावधान कर रहे हैं।



वायु प्रदूषण को अध्ययनों में कई गंभीर रोगों का कारक पाया गया है। साल-दर-साल जिस तरह से प्रदूषण के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही उसने वैश्विक स्तर पर कई बीमारियों के जोखिम को बढ़ा दिया है। वायु प्रदूषण का सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव फेफड़ों पर होता है, लंग कैंसर के ज्यादातर मामलों के लिए इसे एक कारण माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिस प्रकार से दुनियाभर में इस प्रदूषण में वृद्धि हो रही है, यह भविष्य के लिए गंभीर संकेत है।

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Serious Health Problems Caused by Air Pollution PM2.5 Exposure health risks
वायु प्रदूषण का सेहत पर असर - फोटो : Freepik.com

प्रदूषण के कारण होने वाली समस्याएं

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के विशेषज्ञों के मुताबिक वातावरण में दूषित पदार्थों की उपस्थिति जैसे कि धूल, धुएं, गैस आदि के कारण सांस लेने के लिए स्वच्छ हवा की कमी का खतरा है। दीर्घकालिक अवधि में ये मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं। वायु प्रदूषकों में सांस लेने से हमारे पूरे शरीर की कोशिकाओं में सूजन, ऑक्सीडेटिव स्टेस, इम्युनोसुप्रेशन का खतरा हो सकता है, जिसके कारण कई क्रोनिक बीमारियां हो सकती हैं।

आइए इससे होने वाली समस्याओं के बारे में जानते हैं।

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फेफड़े पर होने वाला असर - फोटो : Freepik.com

अस्थमा-सीओपीडी का खतरा
 

  • वायु प्रदूषण न सिर्फ अस्थमा और सांस की अन्य बीमारियों के खतरे को बढ़ा सकता है, साथ ही इसके कारण नए लोगों में भी इन बीमारियों के विकसित होने का जोखिम पाया गया है। वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) से पीड़ित लोगों के लिए सांस लेना और भी मुश्किल हो सकता है। गंभीर लक्षणों से अस्पताल में भर्ती होने और मृत्यु का भी खतरा रहता है।


फेफड़े का कैंसर
 

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वायु प्रदूषण को फेफड़ों के कैंसर का प्रमुख कारण माना है। यू.एस. सहित दुनियाभर में इस कैंसर के कारण हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। इतना ही नहीं वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से बढ़ते बच्चों में फेफड़ों का विकास भी धीमा हो सकता है और इसे वयस्कों में फेफड़ों के कार्यों की क्षमता को कम करने वाला भी पाया गया है।
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हार्ट और दिल की बीमारी - फोटो : Freepik.com

हार्ट हेल्थ पर असर
 

  • अध्ययनों में पाया गया कि कुछ घंटों से लेकर हफ्तों तक वायु प्रदूषण (PM2.5) की बढ़ी हुई सांद्रता के संपर्क में आने से हृदय रोग और इसससे संबंधित जटिलताओं जैसे दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है। यह जीवन प्रत्याशा में कमी का भी कारण बनती है। हृदय रोगों के पहले से ही शिकार लोग अगर प्रदूषण वाले इलाकों में रहते हैं तो इससे उनकी स्वास्थ्य जटिलताओं के चार गुना तक बढ़ने का खतरा हो सकता है।


मस्तिष्क के लिए इसके नुकसान
 

  • इस बात के भी प्रमाण मिले हैं कि अशुद्ध हवा आपके दिमाग के लिए भी हानिकारक है। पिछले एक दशक में, शोधकर्ताओं ने पाया है कि वायु प्रदूषण का उच्च स्तर बच्चों की संज्ञानात्मक क्षमताओं को नुकसान पहुंचा रहा है। वयस्कों के संज्ञानात्मक गिरावट के साथ इसे अवसाद के बढ़ते जोखिम के कारण के तौर पर भी जाना जाता है। मानसिक स्वास्थ्य विकारों के मामले भी इससे बढ़ सकते हैं।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।v

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