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Health Tips: 500-1000 रुपये के ये टेस्ट बचा सकते हैं इन गंभीर बीमारियों से

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Thu, 30 Apr 2026 07:09 PM IST
सार

मौजूदा समय में फैटी लिवर, हेपेटाइटिस, लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। अच्छी बात यह है कि कुछ सामान्य और सस्ते मेडिकल टेस्ट के जरिए इन खतरों का पहले ही पता लगाया जा सकता है। जांच में छोटा सा खर्च आपको बड़ी बीमारियों के खतरे से बचा सकता है।

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लिवर की जांच - फोटो : Amarujala.com/AI

मौजूदा समय में सभी उम्र के लोगों के लिए स्वास्थ्य संबंधित चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर से लेकर हृदय रोग और कैंसर तक ये समस्याएं आम होती जा रही हैं। गड़बड़ लाइफस्टाइल, खानपान की समस्याओं और बढ़ते प्रदूषण ने क्रॉनिक रोगों का खतरा काफी बढ़ा दिया है।



अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया कि कैसे जाने-अनजाने हम हानिकारक रसायनों की चपेट में आते जा रहे हैं, जो हमें कैंसर का शिकार बना सकती हैं।

खराब दिनचर्या का सबसे गंभीर असर हमारे लिवर पर देखा जा रहा है। शरीर को डिटॉक्स करने के साथ पाचन, मेटाबॉलिज्म और इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने के लिए जरूरी ये अंग बड़े खतरे में देखा जा रहा है। लिवर की गंभीर बीमारियों में लिवर ट्रांसप्लांट और कई महंगे उपचार की जरूरत होती है। हालांकि अगर हम शुरुआत में ही थोड़ी सावधानी बरत लेते हैं तो लाखों के खर्च से बच सकते हैं।

विशेषज्ञ कहते हैं, नियमित रूप से कुछ जरूरी टेस्ट आपको लिवर की बीमारियों पर होने वाले लाखों को खर्च से बचाने में मददगार हो सकते हैं।

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लिवर की बीमारी की जांच - फोटो : Adobe Stock

लिवर की बीमारियों के लिए जरूरी टेस्ट

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि फैटी लिवर, हेपेटाइटिस, लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। शराब पीने की आदत, मोटापा, डायबिटीज और प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन लिवर को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है। अच्छी बात यह है कि कुछ सामान्य और सस्ते मेडिकल टेस्ट के जरिए लिवर की समस्याओं के खतरों का पहले ही पता लगाया जा सकता है। मार्केट में 500-1000 रुपये के बीच आसानी से ये टेस्ट हो सकते हैं।

हालांकि किसी भी टेस्ट से पहले एक बार डॉक्टर की सलाह जरूरी है।

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लिवर की बीमारियों की जांच - फोटो : Adobe Stock

लिवर फंक्शन टेस्ट (एलएफटी) (500-800 रुपये)

लिवर द्वारा बनाए जाने वाले एंजाइम्स और प्रोटीन का स्तर जानने या फिर लिवर की आम समस्याओं का शुरुआती स्टेज में ही पता लगाने में ये टेस्ट काफी कारगर माना जाता है। 
 

  • ये एक ब्लड टेस्ट है, जिसमें लिवर के एंजाइम्स और प्रोटीन का स्तर जानने के साथ बिलीरुबिन और एल्ब्यूमिन का भी पता चल जाताहै। 
  • ALT और AST का बढ़ा हुआ स्तर लिवर सेल डैमेज का संकेत देता है।
  • बिलीरुबिन का बढ़ना पीलिया या लिवर में गड़बड़ी का संकेत माना जाता है।


अल्ट्रासाउंड टेस्ट (450-1000 रुपये)

फैटी लिवर, लिवर में सूजन, ट्यूमर या सिरोसिस जैसी समस्याओं का पता लगाने के लिए डॉक्टर अल्ट्रासाउंड टेस्ट की सलाह देते हैं।
 
  • अल्ट्रासाउंड की मदद से लिवर की संरचना को देखा जाता है। फैटी लिवर की पहचान में ये काफी कारगर माना जाता है।
  • इससे लिवर में हो रहे बदलावों को देखा जा सकता है, जो ब्लड टेस्ट से पता नहीं चलते।
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खून की जांच - फोटो : Freepik.com

हेपेटाइटिस टेस्ट (150–700 रुपये)

हेपेटाइटिस वायरस लिवर को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाते हैं और गंभीर समस्याओं का कारण भी बन सकते हैं।  
 

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन ( डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के अनुसार, हेपेटाइटिस-बी और सी जैसे संक्रमण लिवर कैंसर का कारण बन सकते हैं।
  • जिन लोगों को खून चढ़ाया गया हो, असुरक्षित इंजेक्शन लगे हों या जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर हो उनमें इस संक्रमण का जोखिम अधिक होता है।
  • शुरुआती स्टेज में वायरस का पता चलने पर दवाओं से बीमारी को कंट्रोल किया जा सकता है। इससे लिवर डैमेज और कैंसर का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।
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लिवर की बीमारी का पता कैसे लगाएं? - फोटो : Adobe Stock

लिवर की समस्याओं का पता लगाने वाले अन्य टेस्ट
 

  • फाइब्रोस्कैन एक एडवांस टेस्ट है, जो लिवर की कठोरता का पता लगाता है। यह टेस्ट यह बताता है कि लिवर में कितना स्कार टिशू बन चुका है, जो सिरोसिस का संकेत हो सकता है।
  • लिवर बायोप्सी एक प्रक्रिया है, जिसमें लिवर के टिशू का छोटा सा सैंपल लेकर माइक्रोस्कोप से जांच की जाती है। यह टेस्ट तब किया जाता है जब अन्य टेस्ट से स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती। इससे लिवर कैंसर का पता चलता है। हालांकि ये दोनों टेस्ट एडवांस लेवल के हैं और इनकी कीमत भी अधिक होती है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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