Early Flu Outbreak In UK: ब्रिटेन में इस सर्दी के मौसम में फ्लू के मामले अचानक और सामान्य से काफी पहले बढ़ गए हैं, जिससे वहां की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवाओं NHS पर बहुत अधिक दबाव आ गया है। इस स्थिति को 'सुपर फ्लू' का नाम दिया गया है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, यह कोई नया वायरस नहीं है। यह 'सुपर फ्लू' असल में इन्फ्लूएंजा का A/H3N2 सब-टाइप है, जो 1968 से दुनिया में मौजूद है।
Health Tips: ब्रिटेन के अस्पतालों में अचानक बढ़े 'सुपर फ्लू' का मामले, क्या भारत में भी हो सकता है इसका खतरा?
What Is Super Flu? : ब्रिटेन में इस दिनों वायरस इन्फ्लूएंजा ए का बदला हुए रूप का कहर जारी है। वहां की एक बड़ी आबादी इस फ्लू से ग्रसित है। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
'सुपर फ्लू' नाम क्यों?
'सुपर फ्लू' नाम इसलिए दिया गया क्योंकि फ्लू के मरीजों की संख्या एक साथ और असामान्य रूप से जल्दी बढ़ गई, जिससे आपातकालीन सेवाएं और एम्बुलेंस सेवाएं अत्यधिक व्यस्त हो गईं। हालांकि वैज्ञानिक रूप से यह हर कुछ साल में दिखने वाला फ्लू का एक प्रकार है जो हमारे इम्यून सिस्टम को चकमा देने के लिए थोड़ा बदलता रहता है।
ये भी पढ़ें- Air Pollution: दिल्ली के अस्पतालों में अचानक बढ़ी मरीजों की संख्या, एम्स के डॉक्टर ने दिया ये जरूरी सुझाव
बच्चे और बुजुर्ग क्यों अधिक प्रभावित?
बच्चे और किशोर स्कूलों में अधिक संपर्क में रहने के कारण जल्दी संक्रमित होते हैं, जबकि उनका इम्यून सिस्टम फ्लू से कम परिचित होता है। दूसरी ओर 64 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों की प्रतिरोधक क्षमता उम्र के साथ कमजोर हो जाती है, जिससे उन्हें संक्रमण होने पर गंभीर बीमारी का खतरा अधिक होता है।
ये भी पढ़ें- Health Tips: 'अचानक मौतों' का कोरोना वैक्सीन से नहीं है कोई संबंध, एम्स की स्टडी में हुआ बड़ा खुलासा
वैक्सीन है सबसे बड़ा सुरक्षा कवच
विषेशज्ञों के मुताबिक इन्फ्लूएंजा (फ्लू) के वायरस लगातार बदलते रहते हैं ताकि वे हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) से बच सकें। इसी वजह से फ्लू के टीके को भी नियमित रूप से अपडेट करना पड़ता है। कुछ वर्षों में वायरस में बड़ा बदलाव आता है, और आमतौर पर हर चार से पांच साल में इसमें एक बड़ा बदलाव देखने को मिलता है। विशेषज्ञों का कहना है कि फ्लू से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका टीकाकरण है। भले ही वैक्सीन की प्रभावशीलता बुजुर्गों में कम हो, यह उन्हें अस्पताल में भर्ती होने के गंभीर जोखिम से बचाती है।
चूंकि भारत में भी मौसम परिवर्तन के दौरान फ्लू के मामले बढ़ते हैं, इसलिए ब्रिटेन में फ्लू का जल्दी और तेज प्रकोप भारत के लिए एक चेतावनी है। हालांकि अभी तक भारत में कोई ऐसी घटना सामने नहीं आई है। मगर आपके कोई भी इन्फ्लूएंजा से संबंधित लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।