विटामिन-डी को हड्डियों की मजबूती और शरीर में कैल्शियम के सही इस्तेमाल के लिए जरूरी माना जाता है। विटामिन-डी के सनसाइन विटामिन भी कहा जाता है, क्योंकि सूरज की रोशनी इसका प्रमुख स्रोत है। हालांकि चिंताजनक बात ये है कि भारत जैसे देश में जहां लगभग हर मौसम में सूर्य की पर्याप्त रोशनी रहती है, वहां भी लोगों में विटामिन-डी की कमी का खतरा तेजी से बढ़ता हुआ देखा जा रहा है।
हेल्थ अलर्ट: क्या विटामिन-डी की कमी भी आपकी प्रजनन क्षमता पर डाल सकती है असर? यहां जानिए
विटामिन-डी हड्डियों के साथ प्रजनन स्वास्थ्य में भी भूमिका निभाती है। इसकी कमी महिलाओं में पीएमओएस और पुरुषों में शुक्राणुओं की गुणवत्ता में कमी देखी गई है। सही जांच और डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
अमर उजाला में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हमने बताया कि विटामिन-डी की कमी किस तरह से तलाक की वजह बन गई। मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि विटामिन-डी की कमी महिलाओं में ओव्यूलेशन के साथ-साथ पुरुषों में शुक्राणुओं की गुणवत्ता और प्रजनन से जुड़े खतरों को बढ़ाने वाली हो सकती है।
महिलाओं की प्रजनन क्षमता पर असर
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि विटामिन-डी की कमी प्रजनन क्षमता पर तो असर डाल सकती है पर ये बांझपन का सीधा कारण नहीं है।
- विटामिन डी एक हार्मोन की तरह काम करता है और प्रजनन से जुड़े हार्मोन- जैसे प्रोजेस्टेरोन, एस्ट्राडियोल और फॉलिकल-स्टिमुलेटिंग हार्मोन को नियंत्रित करने में मदद करता है।
- ये हार्मोन नियमित मासिक चक्र और ओव्यूलेशन (अंडे के बनने और निकलने की प्रक्रिया) के लिए आवश्यक होते हैं।
- विटामिन डी का स्तर कम होने पर एंटी-मुलेरियन हार्मोन (एएमएच) का स्तर भी कम हो जाता है और साथ ही अंडों की गुणवत्ता और संख्या पर भी बुरा असर पड़ता है।
पुरुषों के शुक्राणुओं पर असर
पुरुषों में विटामिन-डी के स्तर में कमी का शुक्राणुओं की गतिशीलता, संख्या तथा गुणवत्ता के बीच संबंध को जानने के लिए कई अध्ययन किए गए हैं। कुछ शोध में पाया गया कि विटामिन-डी की कमी स्पर्म क्वालिटी और मोटिलिटी में कमी का कारण बन सकती है।
- विटामिन डी रिसेप्टर्स सीधे स्पर्म कोशिकाओं और वृषण के भीतर सर्टोली और लेडिग कोशिकाओं में पाए जाते हैं। ये कोशिकाएं स्पर्म के निर्माण (स्पर्मेटोजेनेसिस) और टेस्टोस्टेरोन के संश्लेषण को नियंत्रित करती हैं।
- विटामिन डी शुक्राणु कोशिकाओं के भीतर कैल्शियम सिग्नलिंग को नियंत्रित करने में मदद करता है, जिससे शुक्राणु की पूंछ को हिलने-डुलने और तैरने की शक्ति मिलती है।
- ऐसे में विटामिन-डी की कमी का पुरुषों की फर्टिलिटी पर असर हो सकता है।
विटामिन-डी की कमी कैसे ठीक करें?
शरीर में विटामिन-डी की स्थिति जानने के लिए आमतौर पर खून की जांच की जाती है। अगर आपमें इसका स्तर कम है तो खान-पान और लाइफस्टाइल में सुधार करें।
- धूप में उचित समय बिताना, अंडे की जर्दी, फैटी मछलियां खाने और विटामिन-डी से फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करने से आपको मदद मिल सकती है। जरूरत होने पर डॉक्टर सप्लीमेंट दे सकते हैं। अगर आपमें लगातार विटामिन-डी की कमी बनी हुई है तो इसे ठीक करने के लिए डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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