क्या आपको भी कुछ समय से रोजमर्रा के काम को करने में असहजता महसूस होती है? अगर हां तो इस तरह के बदलावों पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है। ऐसे कुछ बदलाव शरीर में पनप रही गंभीर और जानलेवा बीमारियों का संकेत भी हो सकते हैं। हाथों की कमजोर होती पकड़ भी ऐसी ही एक समस्या है, क्या आपको भी टाइट बंद अचार के जार या डब्बों को खोलने में बहुत दिक्कत होती है। हाथों की पकड़ पहले की तुलना में कमजोर महसूस होती है, तो सावधान हो जाइए यह गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकता है। ऐसी लक्षणों पर समय रहते विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है।
ध्यान दें: क्या आपके भी हाथों की पकड़ हो गई है कमजोर? सावधान- ये जानलेवा बीमारियों का हो सकता है संकेत
हाथों की पकड़ में कमजोरी को लेकर अध्ययन
ऑस्ट्रिया स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एप्लाइड सिस्टम्स एनालिसिस के वैज्ञानिकों ने हाथ के पकड़ की ताकत और इसके आधार पर शरीर में बन रही बीमारियों के जोखिम को पता लगाने की कोशिश की। वैज्ञानिकों का कहना है कि हाथों की कमजोर होती पकड़ उम्र, लिंग और लंबाई पर निर्भर करती है, हालांकि यदि आपमें इस तरह की दिक्कत का अनुभव हो रहा है तो विशेष सावधान हो जाने की जरूरत है।
यदि आप अपने ही आयुवर्ग के अन्य लोगों की तुलना में हाथों की पकड़ में कमजोरी का अनुभव कर रहे हैं तो यह गंभीर और जानलेवा स्थितियों का संकेत हो सकता है। सभी लोगों को इस सामान्य सी जांच के आधार पर अपने खतरे के बारे में जरूर पता लगाना चाहिए।
उम्र और लिंग पर निर्भर करती है पकड़ की क्षमता
बीएमजे जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्ताओं का कहना है कि सामान्यतौर पर 20 साल की आयु में महिलाओं में हाथों के औसत पकड़ शक्ति 29 किलोग्राम और पुरुषों की 46 किलोग्राम तक मानी जाती है। यह 60 के उम्र तक आते आते घटकर क्रमशः 23.5 किग्रा और 39 किग्रा हो जाती है। यदि अपने आयुवर्ग के मानक से आपकी पकड़ कमजोर हो रही है तो इसपर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।
हाथों की पकड़ में कमजोरी और बीमारी का जोखिम
समान उम्र और लिंग के लोगों की तुलना में अगर आपकी पकड़ कमजोर है तो इसे हृदय रोग की समस्याओं का संकेत माना जा सकता है। इसमें हार्ट फेलियर और हृदय के सामान्य कार्यों में समस्या का भी संकेत माना जा सकता है। अध्ययनों में पाया गया है कि कमजोर पकड़ वाले लोगों में अन्य लोगों की तुलना में प्रोस्टेट, फेफड़े, स्तन और कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा भी अधिक होता है।
इससे पहले, ब्रिस्टल विश्वविद्यालय के एक अध्ययन से पता चला था कि जिन लोगों को हाथों की पकड़ शक्ति मजबूत होती है उनमें अल्जाइमर रोग और डेमेंशिया का जोखिम कम होता है।
क्या कहते हैं शोधकर्ता?
विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं का कहना है कि इस अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों को टाइप-2 डायबिटीज या मोटापे की समस्या होती है, उनमें समय के साथ पकड़ कमजोर होती जाती है। यह बहुत कुछ तंत्रिकाओं के कार्यक्षमता पर निर्भर करता है। पकड़ कमजोर होना हाथों की समस्या या चोट जैसे कारणों की वजह से भी हो सकता है, ऐसे में हर बार इसको लेकर चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। हां, पर पकड़ की खुद से जांच करके आप शरीर की समस्याओं का अंदाजा जरूर लगा सकते हैं।
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स्रोत और संदर्भ
Thresholds for clinical practice that directly link handgrip strength to remaining years of life: estimates based on longitudinal observational data
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