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Alert: डेंगू-मलेरिया नहीं, अब मच्छरों से होने वाली इस बीमारी को लेकर टेंशन; बढ़ा देती है ब्रेन से सूजन

Mon, 27 Jul 2026 05:22 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 27 Jul 2026 05:22 PM IST
सार

वेस्ट नाइल वायरस मुख्य रूप से संक्रमित क्यूलेक्स  प्रजाति के मच्छरों के काटने से फैलता है। गंभीर स्थितियों में ये संक्रमण मस्तिष्क तक पहुंचकर गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याएं पैदा कर सकता है।

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वेस्ट नाइल फीवर को लेकर अलर्ट - फोटो : Amarujala.com/AI

मानसून के दिनों में देशभर में मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। बारिश शुरू होते ही मच्छरों की प्रजनन दर बढ़ने लगती है, लिहाजा डेंगू-मलेरिया जैसी बीमारियों के शिकार लोगों की अस्पतालों में भीड़ भी बढ़ने लग जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इन दिनों में सभी लोगों को मच्छरों से बचाव करते रहने की सलाह दे रहे हैं। 



डेंगू-मलेरिया के खतरों के बीच इन दिनों स्वास्थ्य विशेषज्ञ कई देशों में वेस्ट नाइल फीवर को लेकर अलर्ट कर रहे हैं। यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल के आंकड़ों के अनुसार, यूरोप के कई हिस्सों में वेस्ट नाइल वायरस के फैलने का मौसम चल रहा है। ग्रीस, इटली, स्पेन, सहित कई देशों में इसके मामले बढ़ने की खबर है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ये संक्रमण गंभीर स्थितियों में ब्रेन के लिए दिक्कतें बढ़ाने वाला हो सकता है। यही कारण कि मच्छरों से बचाव के उपाय करते रहना और भी जरूरी हो जाता है।

गौरतलब है कि अप्रैल के महीने में केरल में भी वेस्ट नाइल वायरस के मामले सामने आए थे, इसलिए भारत में भी इसको लेकर सावधानी बरतनी जरूरी है।

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वेस्ट नाइल संक्रमण के गंभीर मामले - फोटो : Adobe stock

ग्रीस में संक्रमण के 21 मामले
 
नेशनल पब्लिक हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की रिपोर्ट के मुताबिक ग्रीस में 22 जुलाई तक वेस्ट नाइल वायरस संक्रमण के 21 मामले सामने आए हैं, जो स्थानीय स्तर पर हुए संक्रमण के हैं। 
 

  • इनमें से 20 मरीजों में सेंट्रल नर्वस सिस्टम से जुड़ी समस्याएं देखी गईं।
  • ज्यादातर लोगों में  मस्तिष्क में होने वाली सूजन (इंसेफेलाइटिस), मेनिन्जाइटिस या एक्यूट फ्लेसिड पैरालिसिस जैसी समस्याएं देखी गईं।
  • वैसे तो अब तक किसी की मौत की खबर नहीं है फिर भी करीब 13 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं।


स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सभी लोगों को मच्छरों से बचाव के उपाय करते रहने की सलाह दी है। 

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मच्छरों के कारण होने वाली बीमारी - फोटो : Freepik.com

वेस्ट नाइल वायरस के बारे में जानिए

अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और एशिया के कई हिस्सों में समय-समय पर वेस्ट नाइल वायरस के मामले सामने आते रहे हैं। भारत में भी पिछले वर्षों में अलग-अलग राज्यों में इस वायरस के संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। 
 

  • वेस्ट नाइल वायरस मुख्य रूप से संक्रमित क्यूलेक्स  प्रजाति के मच्छरों के काटने से फैलता है। यह वायरस पहले पक्षियों में फैलता है और फिर मच्छरों के माध्यम से इंसानों तक पहुंच सकता है।
  • यह संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता। 
  • विशेषज्ञों का कहना है कि बुजुर्ग, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग और पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों में इस संक्रमण के कारण होने वाली जटिलताओं का खतरा ज्यादा होता है।
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संक्रमण का ब्रेन पर असर - फोटो : Adobe Stock

कैसे करें इस संक्रमण की पहचान?

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि वैसे तो लगभग 80 प्रतिशत संक्रमित लोगों में कोई लक्षण नहीं दिखाई देते। 
 

  • जिन लोगों में लक्षण होते हैं, उनमें आमतौर तेज बुखार, सिरदर्द के साथ बदन में दर्द, थकान-कमजोरी और त्वचा पर चकत्ते जैसी समस्याएं हो सकती हैं। 
  • अधिकांश मरीज कुछ दिनों से लेकर कुछ सप्ताह के भीतर ठीक हो जाते हैं।
  • हालांकि कुछ लोगों में इसके गंभीर संक्रमण और ब्रेन से सूजन (इंसेफेलाइटिस) का खतरा हो सकता है।
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मच्छरों से बचाव करें - फोटो : Freepik.com

कैसे करें इससे बचाव?

डॉक्टर बताते हैं कुछ मामलों में वेस्ट नाइल वायरस मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को प्रभावित कर सकता है। इससे एन्सेफलाइटिस और एक्यूट फ्लेसीड पैरालिसिस जैसी गंभीर स्थितियां भी हो सकती है। 
 

  • इन समस्याओं के कारण मरीज को चलने-फिरने में कठिनाई, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी, मानसिक भ्रम और बेहोशी हो सकती है। 
  • गंभीर मामलों में आईसीयू की जरूरत पड़ सकती है।


डॉक्टर कहते हैं, इस बीमारी से बचाव के लिए मच्छरों के काटने से बचना सबसे महत्वपूर्ण है। इसके लिए पूरी बाजू के कपड़े पहनें और मच्छरों को भगाने के लिए क्रीम का उपयोग करें। घर की खिड़कियों पर जाली लगाना, आसपास पानी जमा न होने देना भी जरूरी है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 

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