भारतीय रसोई का अहम हिस्सा और सदियों पुराना घरेलू नुस्खा (हल्दी) अब वैश्विक चिकित्सा विज्ञान की कसौटी पर भी खरा उतर रहा है। एक ओर अमेरिका की मेयो क्लीनिक के विशेषज्ञों ने इसे कुदरती विकल्प के रूप में आशाजनक माना है, वहीं कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता डॉ. महताब जाफरी ने इसके गुणों को पहचानने में भारत को सबसे अगुआ बताया। इन शोध रिपोर्टों के बाद अमेरिका से फ्रांस (पेरिस) तक हल्दी दूध का खुमार बढ़ चला है।
Golden Milk: भारत के इस घरेलू उपचार की कैलिफोर्निया से पेरिस तक बढ़ी मांग, पेट की दिक्कतों में असरदार
भारत का पारंपरिक हल्दी वाला दूध अब दुनिया भर में लोकप्रिय हो रहा है। कैलिफोर्निया और पेरिस जैसे शहरों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। इसके पीछे वेलनेस ट्रेंड, प्लांट-बेस्ड ड्रिंक्स और पारंपरिक भारतीय पेय के प्रति बढ़ती रुचि प्रमुख कारण हैं।
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सूजन और जलन कम करने के गुण हुए पुष्ट
डॉ. जाफरी ने पुष्टि की कि हल्दी में सूजन, जलन कम करने वाले गुण मौजूद हैं। हालांकि, पेट दर्द से जूझ रहे मरीजों को बिना उचित चिकित्सीय जांच के खुद से हल्दी के सप्लीमेंट्स/कैप्सूल का सेवन शुरू नहीं करना चाहिए। डाइटरी सप्लीमेंट्स पर सख्त सरकारी नियमन नहीं होता, इसलिए बाजार में मिलने वाले करक्यूमिन कैप्सूल की गुणवत्ता में भारी अंतर होता है।
थाईलैंड: अध्ययन में घरेलू हल्दी उत्तम बताई
थाईलैंड की चुलालोंगकॉर्न यूनिवर्सिटी में 206 मरीजों पर आठ हफ्तों तक हुए क्लीनिकल ट्रायल में पाया गया कि पेट दर्द, अफारा (ब्लोटिंग), खट्टी डकारें और जलन दूर करने में हल्दी के अर्क ने पारंपरिक एंटासिड दवाओं जैसी ही राहत दी। शोध में बताया गया कि बाजार में करक्यूमिन कैप्सूल या सप्लीमेंट्स में लेड (सीसा) या सॉल्वेंट्स भी हो सकते हैं। अतः घरेलू हल्दी उत्तम है।
गोल्डन मिल्क का चलन बढ़ा : पश्चिमी देशों में स्वास्थ्य-फिटनेस के शौकीनों के बीच भारतीय परंपरा का हल्दी वाला दूध अब गोल्डन मिल्क के नाम से लोकप्रिय हो रहा है। यानी बचपन में कड़वा लगने वाला हल्दी का दूध न्यूयॉर्क और पेरिस के महंगे कैफे की मेन्यू कार्ड की शान बना हुआ है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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