प्रजनन से संबंधित समस्याओं के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लाइफस्टाइल और खानपान से संबंधित गड़बड़ी ने संपूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित किया है, इसका असर प्रजनन स्वास्थ्य पर भी देखा जा रहा है। डॉक्टर कहते हैं, आमतौर पर प्रजनन विकारों के लिए महिलाओं को जिम्मेदार ठहराया जाता है, हालांकि आंकड़े बताते हैं कि ये समस्या पुरुषों में भी देखा जा रही है।
Health Risk: बढ़ रहा है प्रजनन विकारों का खतरा, रोजमर्रा की ये आदतें हो सकती हैं बड़ी वजह
प्रजनन की समस्या कई कारणों से हो सकती है, जैसे हार्मोनल असंतुलन, प्रजनन अंगों में समस्या, खराब जीवनशैली, बढ़ती उम्र या कुछ बीमारियां। ज्यादातर मामलों में इसके पीछे मेडिकल कारण होते हैं जिसके बारे में जानना बहुत जरूरी है।
प्रजनन की समस्याएं हो गई हैं ज्यादा
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, अगर कोई दंपति एक साल तक नियमित संबंध के बावजूद गर्भधारण नहीं कर पाता, तो इसे इनफर्टिलिटी माना जाता है। खराब होती जीवनशैली, बढ़ता तनाव, गलत खान-पान और अधिक उम्र में शादी जैसे कारण प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर रहे हैं।
- युवाओं में हार्मोनल असंतुलन, शुक्राणु की गुणवत्ता में कमी और ओव्यूलेशन से जुड़ी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं।
- अगर समय रहते कारणों को समझकर जीवनशैली में सुधार किया जाए तो कई मामलों में इस समस्या से बचाव संभव है।
आइए प्रजनन को प्रभावित करने वाले उन कारणों को जान लेते हैं जिनसे अक्सर लोग अनजान रहते हैं।
30 की उम्र के बाद शादी
आजकल पढ़ाई, करियर और आर्थिक स्थिरता के कारण लोग देर से शादी और गर्भधारण की योजना बनाते हैं। इसे प्रजनन विकारों का मुख्य कारण माना जाता है।
- उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं में अंडों की गुणवत्ता और संख्या कम होने लगती है।
- इसी तरह पुरुषों में भी उम्र बढ़ने से शुक्राणुओं की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
- 35 की उम्र के बाद धीरे-धीरे गर्भधारण की क्षमता कम होती जाती है।
खराब लाइफस्टाइल बड़ी समस्या
लाइफस्टाइल की गड़बड़ी ने संपूर्ण स्वास्थ्य को नकारात्मक तौर से प्रभावित किया है। इससे क्रॉनिक बीमारियों का खतरा तो बढ़ता ही है साथ ही प्रजनन स्वास्थ्य पर भी असर होता है।
- अत्यधिक जंक और प्रोसेस्ड फूड खाने से शरीर में पोषण की कमी होती है।
- इससे शरीर में हार्मोनल असंतुलन पैदा होने का जोखिम रहता है, जिससे प्रजनन विकारों का खतरा रहता है।
- जंक और प्रोसेस्ड फूड से मोटापा भी बढ़ता है जिसे प्रजनन की समस्याओं का कारण माना जाता है।
इन कारणों को भी जान लीजिए
लगातार मानसिक तनाव और नींद की कमी शरीर के हार्मोन को प्रभावित करते हैं।
- तनाव के कारण शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन बढ़ जाता है, जो प्रजनन से जुड़े हार्मोन को असंतुलित कर सकता है।
- धूम्रपान और शराब की आदत को शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता को कम करने वाला पाया गया है।
- धूम्रपान महिलाओं में अंडाशय की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है और गर्भधारण की संभावना कम हो जाती है।
- बढ़ता वायु प्रदूषण, रसायनों के अधिक में आना भी प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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