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Health Risk: बढ़ रहा है प्रजनन विकारों का खतरा, रोजमर्रा की ये आदतें हो सकती हैं बड़ी वजह

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Thu, 05 Mar 2026 08:13 PM IST
सार

प्रजनन की समस्या कई कारणों से हो सकती है, जैसे हार्मोनल असंतुलन, प्रजनन अंगों में समस्या, खराब जीवनशैली, बढ़ती उम्र या कुछ बीमारियां। ज्यादातर मामलों में इसके पीछे मेडिकल कारण होते हैं जिसके बारे में जानना बहुत जरूरी है।

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इनफर्टिलिटी की समस्या - फोटो : Freepik.com

प्रजनन से संबंधित समस्याओं के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लाइफस्टाइल और खानपान से संबंधित गड़बड़ी ने संपूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित किया है, इसका असर प्रजनन स्वास्थ्य पर भी देखा जा रहा है। डॉक्टर कहते हैं, आमतौर पर प्रजनन विकारों के लिए महिलाओं को जिम्मेदार ठहराया जाता है, हालांकि आंकड़े बताते हैं कि ये समस्या पुरुषों में भी देखा जा रही है।



अमर उजाला में हाल ही में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने इस सवाल का जवाब ढूंढने की कोशिश की थी कि इनफर्टिलिटी के लिए महिला या पुरुष कौन जिम्मेदार है?

डॉक्टरों के अनुसार लगभग हर 6 में से 1 दंपति को गर्भधारण में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके पीछे कोई एक कारण नहीं बल्कि कई लाइफस्टाइल, पर्यावरण और स्वास्थ्य से जुड़े कारक जिम्मेदार हो सकते हैं।

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प्रजनन संबंधित खतरे - फोटो : Freepik.com

प्रजनन की समस्याएं हो गई हैं ज्यादा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, अगर कोई दंपति एक साल तक नियमित संबंध के बावजूद गर्भधारण नहीं कर पाता, तो इसे इनफर्टिलिटी माना जाता है। खराब होती जीवनशैली, बढ़ता तनाव, गलत खान-पान और अधिक उम्र में शादी जैसे कारण प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर रहे हैं।
 

  • युवाओं में हार्मोनल असंतुलन, शुक्राणु की गुणवत्ता में कमी और ओव्यूलेशन से जुड़ी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। 
  • अगर समय रहते कारणों को समझकर जीवनशैली में सुधार किया जाए तो कई मामलों में इस समस्या से बचाव संभव है।

आइए प्रजनन को प्रभावित करने वाले उन कारणों को जान लेते हैं जिनसे अक्सर लोग अनजान रहते हैं।

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क्यों बढ़ रहे हैं प्रजनन विकार - फोटो : Freepik.com

30 की उम्र के बाद शादी 

आजकल पढ़ाई, करियर और आर्थिक स्थिरता के कारण लोग देर से शादी और गर्भधारण की योजना बनाते हैं। इसे प्रजनन विकारों का मुख्य कारण माना जाता है।
 

  • उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं में अंडों की गुणवत्ता और संख्या कम होने लगती है। 
  • इसी तरह पुरुषों में भी उम्र बढ़ने से शुक्राणुओं की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
  • 35 की उम्र के बाद धीरे-धीरे गर्भधारण की क्षमता कम होती जाती है।
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खान-पान में गड़बड़ी का असर - फोटो : Freepik.com

खराब लाइफस्टाइल बड़ी समस्या

लाइफस्टाइल की गड़बड़ी ने संपूर्ण स्वास्थ्य को नकारात्मक तौर से प्रभावित किया है। इससे क्रॉनिक बीमारियों का खतरा तो बढ़ता ही है साथ ही प्रजनन स्वास्थ्य पर भी असर होता है।
 

  • अत्यधिक जंक और प्रोसेस्ड फूड खाने से शरीर में पोषण की कमी होती है।
  • इससे शरीर में हार्मोनल असंतुलन पैदा होने का जोखिम रहता है, जिससे प्रजनन विकारों का खतरा रहता है।
  • जंक और प्रोसेस्ड फूड से मोटापा भी बढ़ता है जिसे प्रजनन की समस्याओं का कारण माना जाता है।
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धूम्रपान के नुकसान - फोटो : Freepik.com

इन कारणों को भी जान लीजिए

लगातार मानसिक तनाव और नींद की कमी शरीर के हार्मोन को प्रभावित करते हैं। 

  • तनाव के कारण शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन बढ़ जाता है, जो प्रजनन से जुड़े हार्मोन को असंतुलित कर सकता है।
  • धूम्रपान और शराब की आदत को शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता को कम करने वाला पाया गया है।
  • धूम्रपान महिलाओं में अंडाशय की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है और गर्भधारण की संभावना कम हो जाती है।
  • बढ़ता वायु प्रदूषण, रसायनों के अधिक में आना भी प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है।




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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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