सब्सक्राइब करें

Hoarding Disorder: घर में बेकार सामानों का लगा ढेर, फिर भी फेंकने का नहीं होता मन? ये हो सकती है दिमागी बीमारी

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Thu, 05 Mar 2026 05:22 PM IST
सार

क्या आपके घर में भी ढेर सारी पुरानी चीजें इकट्ठा हैं, इनमें से कई तो ऐसी ही जिनका वर्षों से कोई इस्तेमाल भी नहीं हुआ है? घर में बिना काम की चीजें हैं फिर भी उसे फेंकने की इच्छा नहीं होती तो संभव है कि ये मानसिक स्वास्थ्य विकार हो सकता है जिसे होर्डिंग डिसऑर्डर के नाम से जाना जाता है। 

विज्ञापन
mental health issues what is hoarding disorder and how it affects our life
पुराने सामान जमा करते जाने की आदत - फोटो : Freepil.com

क्या आपके घर में भी पुरानी चीजों का ढेर लगा हुआ है? पुराने डब्बे, बिना काम के कपड़े, गत्ते आदि। इनमें से कई चीजें तो ऐसी हैं जिनका वर्षों से कोई इस्तेमाल भी नहीं हुआ है। घर में बिना काम की चीजें पड़ी हैं, फिर भी उन्हें फेंकने या किसी दूसरे को देने की इच्छा नहीं होती? 



आमतौर पर पहली नजर में ऐसा लग सकता है कि आप आलसी हैं, चीजों को हटाने के लिए जानबूझकर समय नहीं निकालते या फेंकना नहीं चाहते हैं। पर विशेषज्ञ इसे मेंटल हेल्थ की समस्या के तौर पर देखते हैं। जमाखोरी, पुरानी चीजों को इकट्ठा करते रहना उन्हें खाली न करना होर्डिंग डिसऑर्डर नामक समस्या की वजह से हो सकता है।

अगर आपके घर में भी बुजुर्ग या किसी अन्य में ऐसी आदत है तो उनपर चीखने-चिल्लाने या चीजों को न फेंकने के लिए गुस्सा न करें। मानसिक स्वास्थ्य की इस तरह की समस्याओं पर डॉक्टरी सलाह जरूर हो सकता है।

Trending Videos
mental health issues what is hoarding disorder and how it affects our life
स्ट्रेस - फोटो : Freepil.com

पुराने चीजों को इकट्ठा न करने की आदत- होर्डिंग डिसऑर्डर

मध्य प्रदेश में वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ निधि जैन बुखारिया कहती हैं, अक्सर हम सभी के घरों में कोई ऐसा हो सकता है जिसे आपने भी पुराने चीजों को इकट्ठा करते रहने की आदत के लिए शिकायत की होगी।

ये कोई आलस ये गंदगी की इच्छा नहीं है, बल्कि ये साइकोलॉजिकल डिसऑर्डर हो सकता है। इनमें लोगों को पुरानी, बेकार पड़ी और जिनका इस्तेमाल भी नहीं हो पा रहा है उसे फेंकने या फेंकने का सोचने तक में घबराहट या दिक्कत होने लगती है।

 

 

 

 

 

View this post on Instagram

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

A post shared by Nidhi Jain Bukharia (@dr.nidhi.psychiatrist)



उन्हें ऐसा लग सकता है कि ये सामान बाद में काम आ जाएगा, फेंक दिया तो दिक्कत आ सकती है या फिर इसके साथ कुछ यादें जुड़ी हैं। इस चक्कर में घर में पुराने सामान इकट्ठा होते रहते हैं और पूरा घर अव्यवस्थित सा लग सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
mental health issues what is hoarding disorder and how it affects our life
होर्डिंग डिसऑर्डर के कारण चीजें हो जाती हैं अव्यवस्थित - फोटो : Freepil.com
होर्डिंग डिसऑर्डर के बारे में जान लीजिए

जैसा कि बताया गया है कि होर्डिंग डिसऑर्डर एक ऐसी समस्या है जिसमें आपको अपनी चीजों को फेंकने या उनसे अलग होने में दिक्कत होती है।
  • आपको लगता है कि ये चीजें घर में रहनी ही चाहिए, कभी न कभी इनका इस्तेमाल हो सकता है। 
  • आप धीरे-धीरे बहुत सारी चीजें इकट्ठा करते जाते हैं। 
  • कुछ मामलों में, होर्डिंग डिसऑर्डर का आपके साथ रहने वालों की जिंदगी पर असर हो सकता है।
  • होर्डिंग डिसऑर्डर वाले लोग इसे समस्या नहीं मानते, हालांकि इसके कारण आसपास या साथ रहने वालों को दिक्कतें हो सकती हैं।
mental health issues what is hoarding disorder and how it affects our life
डॉक्टरी मदद औऱ सलाह जरूरी - फोटो : Adobe stock

क्यों होती है ये दिक्कत?

विशेषज्ञ कहते हैं, ये स्पष्ट नहीं है होर्डिंग डिसऑर्डर होता क्यों है? हालांकि कुछ मामलों में इसे जेनेटिक, ब्रेन फंक्शन या स्ट्रेसफुल जिंदगी के कारण होने वाली समस्या माना जाता है।

  • होर्डिंग डिसऑर्डर की दिक्कत आमतौर पर 15 से 19 साल की उम्र के बीच शुरू होती है और उम्र के साथ यह बढ़ती जाती है।
  • अधिक उम्र वालों में ये समस्या ज्यादा देखी जाती है। 
  • जिन लोगों में ये डिसऑर्डर होता है उनमें से कई लोगों को आसानी से फैसले लेने में दिक्कत होती है।
  • जिंदगी की कोई स्ट्रेसफुल घटनाएं जैसे किसी अपने की मौत का सदमा, तलाक या दिमाग पर असर करने वाली समस्याओं के कारण भी ये दिक्कत हो सकती है।


इस डिसऑर्डर को ठीक कैसे किया जाता है? 

होर्डिंग डिसऑर्डर के बारे में लोगों को जानकारी कम है। कुछ लोग अपनी जिंदगी पर होर्डिंग के बुरे असर को नहीं पहचान पाते या उन्हें नहीं लगता कि उन्हें इलाज की जरूरत है। हालांकि अगर इसकी वजह से परिवार के दूसरे लोगों को मुश्किलें होने लगें तो ये समस्या गंभीर हो सकती है। ऐसे लोगों को मनोचिकित्सक के सलाह की जरूरत हो सकती है।

कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (सीबीटी) के साथ कुछ तरह की दवाओं की मदद से लक्षणों को ठीक करने में मदद मिल सकती  है।





------------
नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed