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Covid Effects: कोरोना तो गया लेकिन बच्चों की सेहत पर छोड़ गया गहरा असर, सामने आई चौंकाने वाली रिपोर्ट

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Thu, 05 Mar 2026 01:31 PM IST
सार

कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए लंबे समय तक लॉकडाउन लगाए गए, स्कूल बंद रहे और बच्चों की पढ़ाई ऑनलाइन हो गई। इस बदलाव का असर सिर्फ शिक्षा पर ही नहीं बल्कि बच्चों के मानसिक और मस्तिष्क विकास पर भी पड़ा। इसको लेकर हाल ही में जो रिपोर्ट सामने आई है उसने सभी लोगों को अलर्ट कर दिया है।

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Covid pandemic and lockdown inflicted children brain development know coronavirus long term effects
कोविड खत्म होने के बाद भी बच्चों की सेहत पर देखा जा रहा है संकट - फोटो : Amarujala.com

साल 2020 के शुरुआती दिनों में जब पहली बार लोगों ने नोवेल कोरोनावायरस के बारे में सुना तो कभी इस बात की कल्पना नहीं की गई थी कि ये वायरस दुनिया के लिए इतनी बड़ी मुसीबत बनकर आ रहा है। कोरोनावायरस के तमाम वैरिएंट्स ने सेहत के लिए गंभीर खतरे तो पैदा ही किए, साथ ही महामारी से उपजी परिस्थितियों का भी लोगों की सेहत पर नकारात्मक असर हुआ। कुछ मामलों में ये इतना व्यापक रहा कि कोरोना का खतरा कम होने के वर्षों बाद भी इसके दुष्प्रभाव देखे जा रहे हैं। इतना ही नहीं विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि कुछ लोगों को इसका असर जीवनभर के लिए झेलना पड़ सकता है।



कोविड-19 महामारी ने पूरी दुनिया की जीवनशैली को बदल दिया। कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए लंबे समय तक लॉकडाउन लगाए गए, स्कूल बंद रहे और बच्चों की पढ़ाई-कामकाज ऑनलाइन हो गया। इस बदलाव का असर सिर्फ शिक्षा पर ही नहीं बल्कि बच्चों के मानसिक और मस्तिष्क विकास पर भी पड़ा। 

इसी से संबंधित जर्नल चाइल्ड डेवलपमेंट में प्रकाशित अध्ययन की रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने अलर्ट किया है कि कोविड लॉकडाउन ने कई बच्चों के दिमागी विकास को हमेशा के लिए रोक सा दिया। इसका असर ये है कि उन्हें लंबे समय तक व्यवहार से जुड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। 

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Covid pandemic and lockdown inflicted children brain development know coronavirus long term effects
बच्चों के मस्तिष्क विकास को लेकर बढ़ती समस्याएं - फोटो : Adobe Stock

बचपन पर रहा कोरोना महामारी का साया

विशेषज्ञों ने कहा, बचपन वह समय होता है जब दिमाग तेजी से विकसित होता है। बच्चों का सामाजिक संपर्क, खेल-कूद और स्कूल का माहौल इस विकास में अहम भूमिका निभाते हैं। हालांकि महामारी के दौरान जब बच्चे लंबे समय तक घरों में बंद रहे, दोस्तों से दूर रहे और स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताने लगे, तो इसका असर उनकी संज्ञानात्मक क्षमता, व्यवहार और भावनात्मक स्वास्थ्य पर देखने को मिला।
 

  • इस रिपोर्ट में यही चिंता जताई गई है कि महामारी के दौरान लगाए गए लॉकडाउन के कारण अब तक बच्चों में इसका असर देखा जा रहा है।
  • दुनियाभर में बड़ी संख्या में बच्चों में ध्यान की कमी, तनाव-चिंता और सीखने की क्षमता में गिरावट जैसे लक्षण महामारी के पहले की तुलना में अब काफी बढ़ गए हैं।
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कोरोना महामारी और लॉकडाउन का असर - फोटो : Adobe Stock

लॉकडाउन का सेहत पर क्या असर हुआ?

कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए लगाए गए लॉकडाउन का लोगों की सेहत पर क्या असर हुआ? इसे समझने के लिए किए गए एक हालिया अध्ययन से पता चलता है कि महामारी के दौरान उत्पन्न परिस्थितियों का असर ऐसा देखा जा रहा है, जो लोगों की जीवनभर प्रभावित करने वाला हो सकता है।

 

  • यूके की यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट एंग्लिया के रिपोर्ट के मुताबिक महामारी ने बच्चों के व्यवहार को कंट्रोल करने, फोकस बनाए रखने और नई परिस्थितियों में ढलने की क्षमता को कम कर दिया है। 
  • मार्च 2020 में जब पहला लॉकडाउन शुरू हुआ, उस समय जो बच्चे तीन से पांच साल के थे, उनकी ब्रेन पर इसका सबसे ज्यादा असर देखा जा रहा है।
  • इस उम्र में बच्चे आम तौर पर सोशलाइज करना, लोगों से संबंध बनाना और परिस्थितियों में ढलना सीखते हैं।
  • हालांकि महामारी और लॉकडाउन के कारण लाखों बच्चों को घर पर रहने और ऑनलाइन शिफ्ट होने से ये सभी स्किल बुरी तरह से प्रभावित हुईं। 
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बच्चों के विकास को कोरोना ने कर दिया प्रभावित - फोटो : Freepik.com

बच्चों की दिमागी क्षमता पर देखा जा रहा है असर

इस ग्रुप के बच्चे अब लगभग 10 से 11 साल के हैं। इन बच्चों का सेल्फ-रेगुलेटरी यानी अपने विचारों, भावनाओं और व्यवहार को नियंत्रित करने  या विपरीत परिस्थितियों में खुद को ढालने की क्षमता काफी कम हो गई है। 
 

  • ऐसे बच्चों की कॉग्निटिव फ्लेक्सिबिलिटी का स्कोर भी कम देखा गया। कॉग्निटिव फ्लेक्सिबिलिटी मस्तिष्क की वह क्षमता है जिससे हम विभिन्न विचारों, परिस्थितियों या कार्यों के बीच आसानी से सामंजस्य बिठाते हैं।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि ये बच्चे वर्षों बाद भी इसका असर महसूस कर सकते हैं, कुछ में तो इसका असर जीवनभर के लिए बना रह सकता है।
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महामारी और लॉकडाउन का बच्चों के दिमागी विकास पर असर - फोटो : Amarujala.com

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट एंग्लिया में साइकोलॉजी के प्रोफेसर डॉ जॉन स्पेंसर कहते हैं, जो बच्चे देश बंद के समय घरों में बंद रहने को मजबूर थे, उनमें अगले कुछ वर्षों में प्रीस्कूल में पढ़ने वाले अन्य बच्चों की तुलना में जरूरी सेल्फ-रेगुलेशन और कॉग्निटिव फ्लेक्सिबिलिटी स्किल्स में बहुत कमी देखी जा रही है।
 

  • इस ग्रुप में कई बच्चों पर संक्रमण का भी असर हुआ। जिससे बीमारी के असर ने उनकी सोशल स्किल्स को और भी प्रभावित कर दिया है। 
  • कई विशेषज्ञों का ये भी मानना है कि रील्स बनाने वली सोशल मीडिया साइट्स पर 'हमेशा स्वाइप करने वाले नेचर' ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है।
  • रिसर्च में शामिल माता-पिता का भी कहना है कि कोविड लॉकडाउन का बच्चों की सोशल और इमोशनल स्किल्स पर 'बहुत बुरा' असर डाला है।




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स्रोत:
Impact of the COVID-19 Pandemic Environment on Early Child Brain and Cognitive Development


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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