महिलाओं में मासिक धर्म के स्थाई रूप से बंद हो जाने की स्थिति को मेनोपॉज कहा जाता है। भारत में 45-50 वर्ष की उम्र में मेनोपॉज देखा जाता रहा है। ये किसी भी महिला के जीवन का वह बायोलॉजिकल चरण है जब लगातार 12 महीनों तक मासिक धर्म पूरी तरह से बंद हो जाता है और वे प्राकृतिक रूप से गर्भवती नहीं हो सकतीं।
महिलाओं की सेहत: मेनोपॉज के बाद शरीर का कौन सा हिस्सा सबसे ज्यादा प्रभावित होता है? क्या आपको पता है
मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन कम होने के कारण रात में पसीना, नींद की परेशानी और पेशाब से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं। इस समय हड्डियों की कमजोरी और दिल की बीमारी का जोखिम भी बढ़ जाता है।
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मेनोपॉज का सेहत पर असर
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मेनोपॉज के बाद महिलाओं में हड्डियों की कमजोरी और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है। एस्ट्रोजन में कमी के साथ शरीर में फैट बढ़ने लगता है, हड्डियों के घनत्व और शरीर के काम करने के तरीके में बदलाव आ जाता है। इसलिए मेनोपॉज को केवल मासिक धर्म खत्म होने की प्रक्रिया समझना सही नहीं है।
- मेनोपॉज के आसपास अचानक शरीर में गर्मी महसूस होना और ज्यादा पसीना आना सबसे आम समस्याओं में से एक है। इसे हॉट फ्लैश कहा जाता है।
- यह कुछ सेकंड से लेकर कई मिनट तक रह सकता है और रात में होने पर नींद भी खराब कर सकता है।
हड्डियां कमजोर होने का खतरा
मेनोपॉज के बाद हड्डियों की सेहत पर खास ध्यान देना जरूरी है। एस्ट्रोजन का स्तर कम होने से हड्डियों की समस्याएं बढ़ जाती हैं। हार्मोनल असंतुलन के कारण हड्डी की क्षति तो तेजी से होती ही है, इसके मुकाबले नई हड्डी बनने की गति कम हो जाती है। मेनोपॉज के आसपास कुछ वर्षों तक हड्डियों का घनत्व तेजी से कम हो सकता है।
- इससे ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ता है। यह ऐसी स्थिति है जिसमें हड्डियां कमजोर और आसानी से टूटने वाली हो जाती हैं।
- यही कारण है कि महिलाओं को पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन-डी वाली डाइट के साथ नियमित शारीरिक गतिविधि की सलाह दी जाती है।
पेशाब से जुड़ी परेशानी
- मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन कम होने से योनि की त्वचा और ऊतक में बदलाव हो सकते हैं। इससे सूखापन, जलन, खुजली या संभोग के दौरान दर्द जैसी समस्या हो सकती है। यह समस्या कई महिलाओं के रोजमर्रा के जीवन की गुणवत्ता को भी प्रभावित कर सकती है। कुछ महिलाओं में बार-बार पेशाब आने, पेशाब रोकने में परेशानी या मूत्र संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है।
वजन और दिल की सेहत पर असर
- मेनोपॉज के आसपास शरीर में फैट बढ़ने का खतरा भी अधिक देखा जाता है। इससे कमर के आसपास चर्बी बढ़ने, मांसपेशियों में कमी और वजन बढ़ने की दिक्कत हो सकती है। हार्मोनल बदलाव के कारण मूड की दिक्कत, चिड़चिड़ापन और ध्यान- याददाश्त से जुड़ी परेशानी भी हो सकती है। मेनोपॉज के बाद दिल की बीमारी और स्ट्रोक का जोखिम भी बढ़ जाता है। इस तरह के खतरे को कम करने के लिए संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि और वजन को कंट्रोल रखना बहुत जरूरी है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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