हृदय रोग एक गंभीर समस्या है जिसका जोखिम सभी उम्र के लोगों में देखा जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, 20 से कम उम्र के लोगों को भी हृदय रोगों और हार्ट अटैक का शिकार पाया जा रहा है। कई हालिया रिपोर्ट्स में काम करते-करते, नाचते हुए या फिर बैठे-बैठे अचानक लोगों में हार्ट अटैक और मौत के मामले देखे गए हैं। ये स्थितियां निश्चित ही डराने वाली हैं जिसको लेकर अलर्ट रहने और बचाव के उपाय करते रहने की सलाह दी है।
Heart Disease: हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर में क्या अंतर है, इनसे बचाव के लिए करें? आसान भाषा में जानिए सबकुछ
हृदय रोग से संबंधित दो स्थितियों के बारे में आपने भी काफी चर्चा सुनी होगी- हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर। क्या ये दोनों एक ही हैं या फिर इनमें कोई अंतर है, ये प्रश्न निश्चित ही आपके मन में भी जरूर आया होगा। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
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क्या दोनों एक ही समस्या हैं?
दुनियाभर में हृदय रोग मृत्यु का एक प्रमुख कारण रहे हैं। यह शब्द कई अलग-अलग प्रकार की हृदय संबंधित समस्याओं को संदर्भित करता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर दोनों स्थितियां अलग-अलग हैं, इन्हें एक ही समस्या नहीं समझा जाना चाहिए। दिल का दौरा (हार्ट अटैक) तब पड़ता है जब हृदय को रक्त की आपूर्ति होनी बंद हो जाती है। वहीं हार्ट फेलियर की समस्या तब होती है जब हृदय ठीक तरीके से शरीर के अंगों में रक्त पंप नहीं कर पाता है।
हार्ट अटैक की समस्या
दिल का दौरा जिस हार्ट अटैक या मायोकार्डियल इंफार्क्शन भी कहा जाता है ये तब होता है जब हृदय के किसी हिस्से में रक्त के प्रवाह में अचानक कमी आ जाती है। यदि रक्त का प्रवाह सामान्य नहीं होता है, तो इससे कोशिकाएं डेड होने लग जाती हैं।
धमनियों में कोलेस्ट्रॉल जमा होने, रक्त का थक्का बनने के कारण होने वाली रुकावट से हार्ट अटैक का जोखिम रहता है। डायबिटीज-हाई ब्लड शुगर की समस्या, कोलेस्ट्रॉल या ब्लड प्रेशर के शिकार लोगों में हार्ट अटैक होने का खतरा अधिक देखा जाता रहा है।
हार्ट फेलियर क्या है?
हार्ट फेलियर या कंजेस्टिव हार्ट फेलियर, ऐसी स्थिति है जब हृदय आपके शरीर के चारों ओर पर्याप्त रक्त पंप नहीं कर पाता है। हार्ट फेलियर एक जानलेवा समस्या हो सकती है जिसके बारे में सभी लोगों को जानना और बचाव के उपाय करना जरूरी है।
क्रॉनिक हाई ब्लड प्रेशर यानि अगर आपको लंबे समय से हाई ब्लड प्रेशर की दिक्कत बनी रहती है तो इससे हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, इससे हार्ट फेलियर का खतरा हो सकता है। हृदय की मांसपेशियों में कमजोरी, मोटापा और निष्क्रिय जीवनशैली भी आपमें हार्ट फेलियर के खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती है।
हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर से बचाव के लिए क्या उपाय करें?
खान-पान और लाइफस्टाइल को ठीक रखकर हृदय से संबंधित समस्याओं के खतरे से बचा जा सकता है।
- हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और लो फैट वाले आहार का सेवन भोजन करें।
- ट्रांस फैट, सैचुरेटेड फैट और ज्यादा शुगर-नमक वाली चीजें खाने से बचें।
- ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर फूड्स (जैसे मछली, नट्स, अलसी के बीज) का सेवन करें।
- रोजाना कम से कम 30 मिनट वॉक, योग या कार्डियो एक्सरसाइज करें।
- नियमित रूप से ब्लड प्रेशर और शुगर की जांच करवाएं।
- मोटापा से हृदय रोगों की आशंका बढ़ जाती है। अपने बॉडी मास इंडेक्स को कंट्रोल करें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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