क्या आपके मन में बार-बार ऐसे विचार आते हैं, जिन्हें आप चाहकर भी रोक नहीं पाते? आपको बार-बार हाथ धोने, दरवाजा बंद है या नहीं यह चेक करने या चीजों को एक खास तरीके से व्यवस्थित करने को लेकर ख्याल आते रहते हैं? अगर इन आदतों के कारण आपका काफी समय बर्बाद हो रहा है और रोजमर्रा के काम प्रभावित होते हैं, तो यह ऑब्सेसिव-कंपल्सिव डिसऑर्डर यानी ओसीडी का संकेत हो सकता है।
जानना जरूरी: बार-बार हाथ धोते हैं या चेक करते रहते हैं गेट का लॉक? कहीं ये ओसीडी के लक्षण तो नहीं
Bbsessive Compulsive Disorder: ओसीडी एक मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, जिसमें अनचाहे विचार बार-बार आते हैं और लोग बेचैनी कम करने के लिए कुछ कामों को बार-बार दोहराते हैं। सही समय पर विशेषज्ञों की मदद, थेरेपी और जरूरत के अनुसार दवाओं से लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है।
मेंटल हेल्थ विशेषज्ञ कहते हैं, हर बार हाथ धोना या किसी चीज को दोबारा चेक करना ओसीडी नहीं है। हालांकि समस्या तब गंभीर हो सकती है, जब इन विचारों और व्यवहारों को खुद से कंट्रोल करना मुश्किल हो जाए।
ओसीडी के बारे में समझिए
ओसीडी यानी ऑब्सेसिव-कंपल्सिव डिसऑर्डर।
- ऑब्सेशन यानी मन में बार-बार आने वाले अनचाहे, परेशान करने वाले विचार। जिन्हें आप रोकना तो चाहते हैं पर रोक नहीं पाते।
- कंपल्शन यानी किसी सोच या चिंता को शांत करने के लिए बार-बार किए जाने वाले काम। जैसे- बार-बार हाथ धोना, लॉक को चेक करना या चीजों को एक खास क्रम में रखना।
- डिसऑर्डर यानी ऐसी स्थिति जो सामान्य जीवन, कामकाज और दिनचर्या में बाधा बनने लगे।
ओसीडी की पहचान क्या है?
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि ओसीडी के लक्षण सभी लोगों में एक जैसे नहीं होते। इसमें कुछ तरह की दिक्कतें हो सकती हैं, जिसपर गंभीरता से ध्यान देते रहना जरूरी है।
- बार-बार हाथ धोना या सफाई करते रहना।
- दरवाजे का ताला, गैस या बिजली का स्विच बार-बार चेक करना।
- चीजों को एक खास क्रम में रखने की जरूरत महसूस करना।
- मन में अनचाहे विचार या किसी अनहोनी का डर आते रहना।
- बार-बार गिनती करना या मन में कुछ शब्द दोहराना।
अगर इन आदतों को कंट्रोल करना मुश्किल हो और ये रोजमर्रा की जिंदगी में परेशानी पैदा करें, तो समय रहते डॉक्टर से इस बारे में बात जरूर कर लें।
ओसीडी होती क्यों है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ओसीडी होने का कोई एक स्पष्ट कारण नहीं है। कई स्थितियां इसके लिए जिम्मेदार हो सकती हैं।
अगर परिवार में माता-पिता या भाई-बहन को ओसीडी रहा है तो आपमें भी जोखिम बढ़ सकता है। इसके अलावा अध्ययनों में मस्तिष्क के कुछ हिस्सों और उनसे जुड़ी प्रक्रियाओं में गड़बड़ी को भी इसका कारण पाया गया है। कई लोगों में लगातार रहने वाली स्ट्रेस की समस्या भी ओसीडी के लक्षणों को बढ़ा सकती है। इसी तरह बचपन के खतरनाक अनुभवों के कारण ये दिक्कत हो सकती है।
अगर किसी को ओसीडी की दिक्कत है तो उसे समय रहते मनोचिकित्सक से मिलकर इसका निदान और इलाज शुरू कराना चाहिए। कुछ प्रकार की थेरेपी और दवाओं से इसके लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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