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Health Risk: कहीं नसों में खून तो नहीं जम रहा? ये लक्षण दिखें तो भूलकर भी न करें देरी, तुरंत लें सलाह

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Fri, 12 Jun 2026 06:09 PM IST
सार

लंबे समय तक बैठे रहना, धूम्रपान, मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और कुछ आनुवंशिक कारण ब्लड क्लॉट बनने का जोखिम बढ़ा सकते हैं। कई बार यह समस्या बिना किसी लक्षण के विकसित होती रहती है और अचानक जानलेवा रूप ले लेती है। 

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ब्लड क्लॉटिंग का बढ़ता खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI

दिल की बीमारियों के बढ़ते मामलों का एक बड़ा कारण नसों में खून का थक्का जमना माना जाता है। खून के माध्यम से शरीर के सभी हिस्सों तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व निरंतर पहुंचते रहते हैं। लेकिन जब यही खून नसों के भीतर जमकर थक्का बनाना शुरू कर देता है, तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की वजह बन सकता है।



आमतौर पर चोट लगने या कटने पर खून का जमना शरीर की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो अधिक मात्रा में खून बहने से बचाती है। हालांकि जब बिना किसी कारण के नसों या धमनियों के अंदर ब्लड क्लॉट बनने लगे, तब यह खतरनाक स्थिति बन जाती है।

डॉक्टर कहते हैं, आमतौर इसका पता लगाना कठिन हो सकता है कि आपको ब्लड क्लॉटिंग की दिक्कत तो नहीं है। हालांकि इसके कुछ संकेतों पर ध्यान देना और समय पर इलाज आपको हार्ट अटैक जैसी जानलेवा समस्याओं से बचाने में मददगार हो सकती है।

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खून में थक्के बनने की समस्या - फोटो : Adobe Stock Images

क्यों बढ़ रही है ये दिक्कत?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, घंटों तक एक ही जगह बैठे रहना, शारीरिक गतिविधियों की कमी, मोटापा, धूम्रपान, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं ब्लड क्लॉटिंग के जोखिम को बढ़ा रही हैं।
 

  • कुछ लोगों में इसका आनुवांशिक खतरा भी रहता है। यानी यदि माता-पिता में से किसी को पहले से ब्लड क्लॉटिंग की दिक्कत रही है तो आपको इस समस्या को लेकर खास सावधानी बरतना चाहिए।
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डीप वेन थ्रोम्बोसिस का खतरा - फोटो : Freepik.com

ब्लड क्लॉटिंग से क्या दिक्कतें होती है?

खून का थक्का नसों या धमनी को ब्लॉक कर सकता है, जिससे संबंधित अंग तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं पहुंच पाते। 
 

  • ज्यादा देर तक बैठे रहने वालों में डीप वेन थ्रोम्बोसिस का खतरा रहता है। इसमें पैरों की गहरी नसों में खून का थक्का बन जाता है। यदि यह थक्का टूटकर फेफड़ों तक पहुंच जाए तो पल्मोनरी एम्बोलिज्म हो सकता है।
  • जब हृदय को रक्त पहुंचाने वाली कोरोनरी धमनियों में क्लॉट बन जाता है, तब हृदय की मांसपेशियों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंचती। इससे हार्ट अटैक हो सकता है। 
  • यदि ब्लड क्लॉट मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं में पहुंचकर ब्लॉकेज पैदा करे तो स्ट्रोक हो सकता है। 
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वजन बढ़ने की समस्या और ब्लड क्लॉटिंग - फोटो : Freepik.com

ब्लड क्लॉटिंग की समस्या से कैसे बचें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, खून के थक्के बनने की समस्या उन लोगों में ज्यादा देखी जाती है जो लगातार कई घंटों तक बैठकर काम करते रहते हैं। इससे पैरों में थक्का बनने की संभावना बढ़ जाती है। विशेषज्ञ हर 1-2 घंटे में कुछ मिनट चलने की सलाह देते हैं।

इसके अलावा मोटापा की स्थिति शरीर में सूजन और रक्त प्रवाह की समस्याएं पैदा कर सकता है। मोटापे से ग्रस्त लोगों में डीप वेन थ्रोम्बोसिस  और अन्य क्लॉटिंग विकारों का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में अधिक देखा गया है।

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धूम्रपान से होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepik.com

इन आदतों में भी करें सुधार
 

  • धूम्रपान छोड़ना ब्लड क्लॉटिंग के जोखिम को काफी कम कर सकता है। सिगरेट में मौजूद रसायन रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और रक्त को अधिक गाढ़ा बनाते हैं। इससे क्लॉट बनने की आशंका बढ़ जाती है।
  • पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है। पानी की कमी होने पर खून गाढ़ा हो सकता है, जिससे थक्का बनने का जोखिम बढ़ सकता है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से रक्त का प्रवाह बेहतर बना रहता है।
  • रोजाना 30 मिनट की वॉक, साइकिलिंग या अन्य शारीरिक गतिविधियां रक्त संचार को बेहतर बनाती हैं। इससे नसों में क्लॉटिंग का खतरा कम होता है।
  • यदि परिवार में पहले से किसी को क्लॉटिंग की समस्या रही हो तो कम उम्र से नियमित मेडिकल चेकअप कराएं। इससे जोखिमों को पहले ही पहचाना जा सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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