आंखें हमारे शरीर का सबसे संवेदनशील और जरूरी अंग हैं, जिनके जरिए हम दुनिया को देखते हैं। चूंकि ये बेहद नाजुक होती हैं, इसलिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को आंखों के नियमित देखभाल की सलाह देते हैं। डॉक्टर कहते हैं, जिस तरह से लोगों की दिनचर्या और खान-पान में अशुद्धि बढ़ती जा रही है, इसका खामियाजा सीधे तौर पर आंखों को भी भुगतना पड़ रहा है। लिहाजा युवाओं में धुंधला-कम दिखाई देने, डबल विजन और बचपन में ही आंखों पर चश्मा लगने जैसी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं।
World Health Day 2026: साफ दिखना ही हेल्दी आंखों की गारंटी नहीं, डॉक्टर ने तोड़ी लोगों की बड़ी गलतफहमी
आम तौर पर 6/6 विजन को हेल्दी आंखों का संकेत माना जाता है। लेकिन क्या केवल 6/6 विजन होना ही आंखों के पूरी तरह स्वस्थ होने की गारंटी है? इसे लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को अलर्ट किया है।
6/6 विजन टेस्ट के बारे में जानिए
अमर उजाला में हाल ही में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने 6/6 विजन टेस्ट के बारे में जानकारी दी थी।
- जब कोई व्यक्ति टेस्ट के दौरान 6 मीटर की दूरी से वही अक्षर साफ पढ़ लेता है जो सामान्य दृष्टि वाला व्यक्ति 6 मीटर से पढ़ सकता है, तो उसे 6/6 विजन कहा जाता है।
- लेकिन 6/6 विजन होना ही आंखों का पूरी तरह स्वस्थ होने नहीं है।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ अनुपम सिंह बताते हैं, आंखों की सेहत सिर्फ 6/6 विजन आ जाने से तय नहीं होती है। यही वजह है कि विशेषज्ञ नियमित नेत्र जांच की सलाह देते हैं। 6/6 विजन का मतलब है कि आपकी देखने की क्षमता ठीक है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि आंखें पूरी तरह से स्वस्थ हैं।
बिना लक्षणों के भी बढ़ती रहती हैं कई बीमारियां
डॉ अनुपम कहते हैं, 6/6 विजन से केवल यह पता चलता है कि कोई व्यक्ति दूर से अक्षरों को कितनी अच्छी तरह देख सकता है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि इससे आंखों की अंदरूनी बीमारियों का भी पता चले।
- आंखों की तमाम ऐसी बीमारियां भी होती हैं जो शुरुआत में कोई लक्षण पैदा नहीं करती हैं।
- ग्लूकोमा जैसी बीमारियां शुरुआत में बिना सेंट्रल विजन पर असर डाले धीरे-धीरे बढ़ सकती हैं। इसका मतलब है कि कोई व्यक्ति विजन टेस्ट तो पास कर सकता है, पर कई बीमारियां चुपचाप उसकी ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचा रही होती है।
- इसी तरह से मोतियाबिंद या कॉर्निया से संबंधित कई समस्याएं भी शुरुआत में आपकी देखने की क्षमता पर बिना असर डाले भी बढ़ती रह सकती हैं।
- यही कारण है कि सिर्फ 6/6 विजन आ जाने पर ही आंखों को हेल्दी मान लेना सही नहीं है। आपको आंखों की पूरी जांच करानी चाहिए।
बढ़ता स्क्रीन टाइम आंखों के लिए नुकसानदायक
डॉ अनुपम कहते हैं, लोगों का बढ़ता स्क्रीनटाइम आंखों की सेहत के लिए सबसे नुकसानदायक है। मोबाइल-कंप्यूटर से चिपके रहने की आदत आंखों को धीरे-धीरे गंभीर तरीके से नुकसान पहुंचाती जा रही है। स्क्रीन टाइम बढ़ने से पलके झपकने की दर स्वाभाविक रूप से कम हो जाती है जिसके कारण ड्राई आइज सिंड्रोम का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए स्क्रीन टाइम को नुकसानदायक माना जाता है।
नियमित आई टेस्ट कराते रहना जरूरी
डॉक्टर कहते हैं, आंखों की सेहत का अंदाजा केवल विजुअल एक्यूटी से नहीं लगाया जा सकता है बल्कि आई प्रेशर, रेटिना की स्थिति, लेंस, कलर विजन, पेरिफेरल विजन और ड्राई आई जैसी स्थितियों और इसके लक्षणों पर ध्यान देते रहना चाहिए।
- वयस्कों को हर 1-2 साल में आंखों की जांच करानी चाहिए।
- डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर हो तो ये जांच और भी जरूरी हो जाती है।
- समय पर जांच से कई बीमारियों का शुरुआती चरण में पता लगाकर इलाज संभव है और ये आपको हमेशा के लिए रोशनी चले जाने से बचाने में भी मददगार हो सकती है।
- अपने डॉक्टर की सलाह पर आई टेस्ट जरूर कराते रहें। विजन टेस्ट के साथ आंखों की अच्छी तरह से जांच भी जरूरी है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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