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Paracetamol: दर्द हो या बुखार पैरासिटामोल से मिल जाता है तुरंत आराम; जानिए शरीर में कैसे काम करती है ये दवा

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Tue, 07 Apr 2026 04:47 PM IST
सार

Paracetamol Kaise Kaam Karta Hai: सिरदर्द-बुखार में ली जाने वाली आम दवा पैरासिटामोल, डेंगू और कोविड-19 जैसी बीमारी के लक्षणों को ठीक करने के लिए भी सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाती रही है। ये शरीर में काम कैसे करती है? जानते हैं आप?

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Paracetamol acetaminophen relieves pain and fever know its mechanism of action in hindi
कैसे काम करती है पैरासिटामोल दवा? - फोटो : Amarujala.com

शरीर में दर्द हो या बुखार, सिर दर्द से फटने लगे या वायरल फीवर हो जाए इन सभी समस्याओं में सबसे पहले जिस दवा का नाम जहन में आता है, वह है पैरासिटामोल। घर की फर्स्ट-एड किट से लेकर अस्पताल की इमरजेंसी तक, यह छोटी-सी टैबलेट आपको हर जगह देखने को मिल जाती है। दवा लेने के कुछ ही मिनटों में इसका असर दिखने लगता है और आप अपनी दिक्कतों से आराम पा जाते हैं। पर क्या आप जानते हैं कि ये दवा शरीर में जाकर किस तरह से काम करती है? कैसे इस दवा के लेने के कुछ ही मिनटों में हमें लक्षणों में आराम मिलना शुरू हो जाता है?



साधारण सी लगने वाली ये दवा असल में बेहद शक्तिशाली प्रभाव वाली होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, सही डोज में यह आपके लिए दर्दनिवारक का काम करती है पर इसकी ज्यादा मात्रा आपके लिए मुसीबतों का कारण भी बन सकती है। इसलिए पैरासिटामोल हो या कोई अन्य दवा, बिना डॉक्टर की सलाह के कभी नहीं खानी चाहिए।





आइए अब समझते हैं कि ये दवा असल में काम कैसे करती है?

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दर्द-बुखार से राहत देने वाली दवा - फोटो : Adobe Stock

डेंगू और कोविड-19 में भी होता है इस्तेमाल

सिरदर्द-बुखार में ली जाने वाली आम दवा पैरासिटामोल, डेंगू और कोविड-19 जैसी बीमारी के लक्षणों को ठीक करने के लिए भी सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाती रही है। डॉक्टर बताते हैं, विशेषतौर पर डेंगू की स्थिति में जहां प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं ऐसे में अन्य दर्द निवारक दवाओं (जैसे इबुप्रोफेन) की तुलना में ये प्लेटलेट्स पर कम प्रभाव डालती है। इसलिए पैरासिटामोल को अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प माना जाता है।
 

  • पैरासिटामोल को मेडिकल की भाषा में एसेटामिनोफेन के नाम से जाना जाता है।
  • यह एक एंटीपायरेटिक यानी बुखार कम करने वाली और एनाल्जेसिक यानी दर्द कम करने वाली दवा के रूप में इस्तेमाल की जाती रही है। 


कुछ रिपोर्ट्स में चिंता जताई गई थी कि गर्भावस्था में पैरासिटामोल लेने से बच्चों में ऑटिज्म या एडीएचडी जैसी बीमारी होने का खतरा हो सकता है। क्या वास्तव में ऐसा है? अमर उजाला की रिपोर्ट में आप विस्तार से पढ़ सकते हैं

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पैरासिटामोल दवा काम कैसे करती है? - फोटो : Adobe Stock

कैसे काम करती है ये दवा?

पैरासिटामोल दवा कैसे काम करती है, इसे जानने से पहले ये समझना जरूरी है कि पैरासिटामोल कोई ब्रांड नहीं है बल्कि ये दवा का सॉल्ट यानी कंपोजिशन है। इसे कंपनियां अलग-अलग ब्रांड वाले नाम से बनाती और बेचती हैं। पैरासिटामोल दिमाग तक जाने वाले दर्द के संकेतों की तीव्रता को कम करती है। 
 

  • पैरासिटामोल मुख्य रूप से सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर काम करती है। जब शरीर में संक्रमण होता है, तो प्रोस्टाग्लैंडिन नामक केमिकल बनते हैं, जो दर्द और बुखार पैदा करते हैं। पैरासिटामोल उस एंजाइम की गतिविधि को कम करती है, जिससे प्रोस्टाग्लैंडिन का निर्माण होता है। इससे शरीर का तापमान कम होने लगता है और दर्द में राहत मिलती है।

 

  • यह दवा मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस हिस्से पर काम करती है जो तापमान को कंट्रोल करती है जिससे शरीर का बढ़ा हुआ तापमान कम महसूस होने लगता है। यही कारण है कि वायरल फीवर, डेंगू या कोविड में तेज बुखार होने पर यह प्रभावी मानी जाती है।
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पेनकिलर दवा कैसे करती है असर? - फोटो : Adobe Stock Photos

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

इंटरनल मेडिसिन के डॉक्टर उत्कर्ष सिन्हा बताते हैं, कई ब्रांड्स पैरासिटामोल दवा को 500 mg, 650 mg जैसे अलग-अलग डोज में बनाती हैं और ये ओवर-द-काउंटर आसानी से मिल जाती है। हालांकि अलग-अलग लोगों पर उनके लक्षणों के आधार पर अलग डोज की जरूरत होती है। यही कारण है कि डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही इसका सेवन करना चाहिए।

हल्की समस्या में अधिक डोज लेने से ये किडनी-लिवर जैसे अंगों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा देती है। लंबे समय तक पेनकिलर लेते रहने से लिवर-किडनी फेलियर तक का खतरा हो सकता है।

पैरासिटामोल का मेटाबॉलिज्म मुख्य रूप से लिवर में होता है यानी जब आप ये दवा लेते हैं तो ये लिवर में टूटती है। सामान्य मात्रा में तो यह सुरक्षित रहती है, लेकिन अध्ययनों में पाया गया है कि प्रतिदिन 4 ग्राम से अधिक मात्रा लेने से ये लिवर पर दबाव बढ़ाने वाली हो सकती है। यही कारण है कि ज्यादातर स्थितियों में डॉक्टर दो-तीन गोली से अधिक सेवन से मना करते हैं।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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