सब्सक्राइब करें

Allergy Relief: मौसम बदला नहीं और शुरू हो गई खांसी-छींक? सीजनल एलर्जी से बचने के लिए क्या उपाय करें

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Tue, 07 Apr 2026 08:09 PM IST
सार

Allergy Se Kaise Bache: अप्रैल का महीना सर्दी से गर्मी की ओर संक्रमण का दौर माना जाता है। इसी दौरान वायरल संक्रमण, सर्दी-जुकाम, गले में खराश और त्वचा संबंधी समस्याएं भी अधिक देखी जाती हैं। 

विज्ञापन
seasonal changes allergies risk how to protect us form allergic reaction what to eat
सर्दी-खांसी और एलर्जी की समस्या - फोटो : Freepik.com

अप्रैल का महीना, मौसम में तेजी से हो रहे बदलाव का समय होता है। ये सर्दी से गर्मी की ले जाने वाला मौसम होता है। तापमान तेजी से बढ़ रहा होता है, हवा में नमी कम हो जाती है और वातावरण में धूल-मिट्टी तथा परागकणों की मात्रा बढ़ जाती है। तापमान में उतार-चढ़ाव और हवा में धूल-परागकणों के कारण इस मौसम को सेहत के लिए कई तरह से मुश्किलें बढ़ाने वाला माना जाता है। यही वजह है कि अप्रैल के महीने में एलर्जी, वायरल संक्रमण जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। 



असल में मौसम के अनुसार शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली ढलने का तेजी से प्रयास कर रही होती है। यही वजह है कि इम्युनिटी कमजोर पाते ही वायरल संक्रमण, सर्दी-जुकाम, गले में खराश और त्वचा संबंधी समस्याएं तेजी से अटैक करती हैं। 

इस बदलते मौसम में कहीं आप भी न बीमार हो जाएं, आपको कोई एलर्जी न हो जाए आइए इससे बचाव के तरीके जान लेते हैं।

 

Trending Videos
seasonal changes allergies risk how to protect us form allergic reaction what to eat
एलर्जी के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepik.com

एलर्जी का खतरा और इसके लक्षण

मार्च और अप्रैल के शुरुआती महीनों में  पेड़-पौधों से सूक्ष्म परागकणों की मात्रा हवा में काफी बढ़ जाती है। ये शरीर में प्रवेश करके एलर्जिक राइनाइटिस, छींक, नाक बहने, आंखों में एलर्जी और पानी आना जैसी समस्याएं पैदा करते हैं। 

  • तापमान बढ़ने से डस्ट माइट्स की संख्या भी बढ़ती है, जो अस्थमा और त्वचा एलर्जी का कारण बन सकते हैं।
  • बच्चों, बुजुर्गों और पहले से अस्थमा या साइनस की समस्या से जूझ रहे लोगों में इस दौरान जोखिम अधिक रहता है। 



एलर्जी तब होती है जब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली किसी सामान्य और हानिरहित पदार्थ को भी खतरनाक समझकर उस पर अत्यधिक प्रतिक्रिया देती है। पोलन, धूल, पालतू जानवरों के बाल, कुछ खाद्य पदार्थ या दवाओं से आपको एलर्जी हो सकती है।

इस मौसम में परागकण और फफूंद हवा में फैले होते हैं जो लोगों को एलर्जी की चपेट में ले रहे हैं। इस स्थिति में दवाएं राहत तो देती हैं, पर सही आहार भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए इस मौसम में खान-पान पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।

विज्ञापन
विज्ञापन
seasonal changes allergies risk how to protect us form allergic reaction what to eat
पौष्टिक चीजों का करिए सेवन - फोटो : Freepik.com

पानी और हाइड्रेशन

सबसे आसान और प्रभावी उपाय है- खूब पानी पीते रहना। दिन में 8-10 गिलास पानी शरीर को हाइड्रेट रखता है, जिससे नाक और गले की झिल्लियां नम रहती हैं और परागकण आसानी से बाहर निकल जाते हैं। डिहाइड्रेशन होने पर हिस्टामिन का स्तर बढ़ जाता है, जो एलर्जी के मुख्य रसायन हैं।

गुनगुना पानी, अदरक-तुलसी या हल्दी वाली चाय और भी बेहतर काम करती है। अदरक का जिंजेरॉल तत्व सूजन कम करता है, जबकि हल्दी और तुलसी एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर हैं।


प्राकृतिक एंटी-हिस्टामिन लें

विटामिन सी हिस्टामिन को तोड़ने में मदद करता है और इम्यून सिस्टम को मजबूत कर एलर्जी के लक्षणों को कम करने में मददगार है। आंवला विटामिन सी का सबसे शक्तिशाली स्रोत है। एक आंवले में संतरे से 20 गुना ज्यादा विटामिन सी होता है। इसके अतिरिक्त नींबू, कीवी, शिमला मिर्च, टमाटर और ब्रोकली को आहार का हिस्सा बनाएं।

ओमेगा-3 और प्रोबायोटिक्स

शोध बताते हैं कि बचपन से ओमेगा-3 लेने वाले बच्चों में एलर्जी और अस्थमा का जोखिम कम होता है। शाकाहारी स्रोतों में अखरोट, अलसी के बीज और सरसों का तेल प्रमुख हैं। वहीं प्रोबायोटिक्स आंत को स्वस्थ रखते हैं, जहां इम्यून सिस्टम का बड़ा हिस्सा मौजूद होता है। दही, छाछ जैसे फर्मेंटेड फूड्स इसमें शामिल हैं।

seasonal changes allergies risk how to protect us form allergic reaction what to eat
एलर्जी की समस्या से बचने के लिए क्या करें? - फोटो : Adobe Stock Photo

शहद करेगा मदद

स्थानीय शहद में आस-पास के पौधों के सूक्ष्म परागकण होते हैं। ऐसे में रोज थोड़ी मात्रा में शहद लेने से शरीर धीरे-धीरे इन परागकणों के प्रति अभ्यस्त हो जाता है। इम्यूनोलॉजी में इसे ‘डिसेंसिटाइजेशन’ कहा जाता है, जो एलर्जी इम्यूनोथेरेपी के समान सिद्धांत पर आधारित है। मगर एक वर्ष से कम उम्र के बच्चों को शहद न दें।


एलर्जी के दौरान कुछ खाद्य पदार्थ लक्षणों को बढ़ाते हैं, जैसे- शराब और रेड वाइन। वहीं बहुत मसालेदार और पैकेज्ड-प्रोसेस्ड भोजन शरीर में सूजन बढ़ाते हैं। ज्यादा चाय-कॉफी लेने से डिहाइड्रेशन हो सकता है। ठंडे पेय, आइसक्रीम तथा कुछ कच्चे फल-सब्जियां भी एलर्जी के लक्षणों को उभार सकती हैं। इसलिए लक्षणों के गंभीर होने से पहले ही डॉक्टर से सलाह लें।




--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed