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Medical Breakthrough: लाइलाज टाइप-1 डायबिटीज को लेकर सबसे बड़ी खबर, अब बस एक इंजेक्शन से ठीक होगी ये बीमारी

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Thu, 09 Apr 2026 01:33 PM IST
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सार

Type 1 Diabetes Ka Kya Ilaj Hai: टाइप 1 डायबिटीज एक लाइलाज बीमारी मानी जाती है। इसके शिकार लोगों को रोजाना जीवनभर के लिए इंसुलिन के इंजेक्शन लेने पड़ते है हैं। यह बीमारी तब होती है जब शरीर का इम्यून सिस्टम पैंक्रियाज में इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को नष्ट कर देता है, जिससे मरीज ब्लड शुगर को नियंत्रित नहीं कर पाते। अब इसका इलाज संभव होने जा रहा है।

type 1 diabetes causes and risk factors kriya-839 gene therapy for incurable diabetes treatment
टाइप-1 डायबिटीज का भी हो सकेगा इलाज - फोटो : Amarujala.com
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विस्तार

डायबिटीज की बीमारी सभी उम्र के लोगों में आम होती जा रही है। वैसे तो टाइप-2 डायबिटीज के मामले दुनियाभर में सबसे ज्यादा हैं, पर क्या आप जानते हैं कि डायबिटीज एक-दो नहीं बल्कि चार प्रकार की हो सकती है।

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टाइप-1 डायबिटीज बच्चों में सबसे ज्यादा देखी जाने वाली समस्या है। यह बीमारी तब होती है जब शरीर का इम्यून सिस्टम ही पैंक्रियाज में इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं पर अटैक करके उन्हें नष्ट कर देता है, इससे शुगर कंट्रोल रखने वाले हार्मोन इंसुलिन का उत्पादन नहीं हो पाता और मरीजों को  जीवनभर के लिए इंसुलिन के इंजेक्शन लेने पड़ते हैं। मसलन इस बीमारी को ठीक नहीं किया जा सकता, इंसुलिन इंजेक्शन और दवाओं के साथ शुगर को कंट्रोल रखने का प्रयास ही किया जा सकता है।
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रोजाना इंजेक्शन, बार-बार ब्लड शुगर की जांच और खानपान पर सख्त नियंत्रण, यह सब ऐसे मरीजों की दिनचर्या का अहम हिस्सा हो जाता है। लेकिन अब विज्ञान की दुनिया से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने उम्मीद की नई रोशनी जगा दी है। वैज्ञानिकों ने पहली बार टाइप-1 डायबिटीज के संभावित इलाज की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है। 

नई रिसर्च में ऐसे तरीकों की खोज की गई है जो शरीर में इंसुलिन को दोबारा सक्रिय कर सकती हैं। यदि ये प्रयास व्यापक स्तर पर सफल होते हैं, तो भविष्य में टाइप-1 डायबिटीज का इलाज संभव हो सकता है।

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डायबिटीज के इलाज के लिए स्टडी - फोटो : Adobe Stock

जीन थेरेपी से होगा लाइलाज डायबिटीज का इलाज

'इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन एडवांस्ड टेक्नोलॉजीज एंड ट्रीटमेंट्स फॉर डायबिटीज' में ये रिपोर्ट पेश किया गया है।

वैज्ञानिकों ने एक खास तरीके की जीन थेरेपी विकसित की है, जिसके एक सिंगल इंजेक्शन से  मांसपेशियों को लंबे समय तक इंसुलिन बनाने वाले अंग में बदला जा सकेगा। इस एक इंजेक्शन की मदद से कई वर्षो या फिर शायद दशकों तक शरीर में इंसुलिन बनता रहेगा और मरीजों को रोज-रोज इंसुलिन इंजेक्शन लेने की जरूरत नहीं होगी।  

विशेषज्ञों ने बताया कि दुनिया की अपनी तरह की पहली स्टडी में सबसे पहले उन वयस्कों को शामिल किया जाएगा जिनका ब्लड शुगर ठीक से कंट्रोल में नहीं रहता और जो पहले से ही ऑटोमेटेड इंसुलिन डिलीवरी सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं। 

इससे वैज्ञानिकों को यह बारीकी से ट्रैक करने का मौका मिलेगा कि यह थेरेपी कितना इंसुलिन बनाती है और ग्लूकोज के लेवल को कितनी असरदार तरीके से स्थिर रखती है।

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डायबिटीज की समस्या को जान लीजिए - फोटो : Adobe Stock Photo

टाइप-1 डायबिटीज के बारे में जान लीजिए

इस थेरेपी के बारे में जानने से पहले टाइप-1 डायबिटीज के बारे में जान लेना जरूरी है। 

टाइप-1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून बीमारी है। इसका मतलब है कि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अग्न्याशय यानी पैंक्रियाज की बीटा कोशिकाओं पर अटैक कर देती है। यही बीटा कोशिकाएं इंसुलिन बनाती हैं, जो खून में मौजूद ग्लूकोज को ऊर्जा में बदलने का काम करती है। जब ये कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं, तो शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता और ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है।
 

  • इस बीमारी का सटीक कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। शोध बताते हैं कि इसमें आनुवंशिकता और पर्यावरणीय कारकों की भूमिका हो सकती है। 
  • कुछ वायरल संक्रमण जैसे एंटेरोवायरस प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को ट्रिगर कर सकते हैं। 
  • जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को टाइप-1 डायबिटीज होती है, उनमें इसका खतरा थोड़ा अधिक देखा गया है। 
  • टाइप-1डायबिटीज में भी टाइप-2 की ही तरह बार-बार पेशाब, अत्यधिक प्यास लगने, वजन कम होने, धुंधला दिखने जैसी दिक्कतें होती हैं।
  • बच्चों और किशोरों में यह बीमारी ज्यादा देखी जाती है, लेकिन यह किसी भी उम्र में हो सकती है। 

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हमेशा के लिए छूट सकती है इंसुलिन इंजेक्शन - फोटो : Freepik.com

KRIYA-839 थेरेपी से जगी उम्मीद

इंग्लैंड की नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) में डायबिटीज के लिए नेशनल स्पेशलिटी एडवाइजर डॉ. पार्थ कर कहते हैं,  यह तरीका सचमुच बहुत रोमांचक है और इसमें लाइलाज बीमारी को 'पूरी तरह ठीक करने' की क्षमता है। अगर यह वास्तव में सफल होता है, तो इससे लाखों लोगों को मदद मिल सकती है। 

KRIYA-839 नाम की ये थेरेपी एक बिल्कुल ही अलग तरीका अपनाती है। इंजेक्शन या किसी डिवाइस के जरिए इंसुलिन की कमी पूरी करने के बजाय, इसका मकसद मरीज की अपनी ही मांसपेशियों को लंबे समय तक इंसुलिन बनाने वाली फैक्ट्री में बदलना है।

वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि एक बार इंजेक्शन लगाने के बाद मांसपेशियों की कोशिकाएं इंसुलिन और ब्लड शुगर को कंट्रोल करने वाले दूसरे प्रोटीन बनाना शुरू कर देंगी, जिससे रोजाना के इलाज की जरूरत खत्म हो जाएगी।

 

  • शोधकर्ताओं ने बताया यह थेरेपी जीन एडिटिंग नहीं है और न ही यह किसी व्यक्ति के डीएनए में कोई बदलाव करती है। 
  • इसके बजाय, यह मांसपेशियों की कोशिकाओं में जेनेटिक सिग्नल पहुंचाती है, जिससे वे समय के साथ नियंत्रित तरीके से इंसुलिन बना पाती हैं।

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टाइप-1 डायबिटीज का इलाज होगा आसान - फोटो : Adobe Stock

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

जानवरों पर किए गए शुरुआती ट्रायल में इसके नतीजे काफी उम्मीद जगाने वाले रहे हैं। इस इलाज ने लगातार इम्यून सप्रेशन यानी प्रतिरक्षा प्रणाली को दबाने वाली दवाओं की जरूरत के बिना, चार साल तक काम करना जारी रखा। आमतौर पर टाइप-1 जैसी ऑटोइम्यून बीमारी में बहुत अधिक सक्रिय प्रतिरक्षा प्रणाली को कंट्रोल करने के लिए इम्यून सप्रेशन दवाएं दी जाती हैं। अब, पहली बार इसका परीक्षण इंसानों पर किया जाएगा।

कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में एंडोक्रिनोलॉजिस्ट और मेडिसिन के एसोसिएट के प्रोफेसर जेरेमी पेटस कहते हैं यह डायबिटीज रोगियों के लिए एक नया दौर लाने वाला हो सकता है।

यूसीएच-यूएमसी लुब्लियाना में एंडोक्रिनोलॉजी के प्रमुख तादेज बैटेलिनो कहते हैं, ये देखना है कि इंसानों के अध्ययन में इसके कैसे परिणाम देखने को मिलते हैं। अगर यह थेरेपी लंबे समय तक ब्लड शुगर को एक कंट्रोल सीमा में रख पाती है तो इसे बड़ी कामयाबी माना जा सकता है।



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स्रोत:
KRIYA 839, a potential one-time gene therapy for type 1 diabetes


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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