जिस तरह से दुनियाभर में दिल की बीमारी और इससे मौत के मामले बढ़ते जा रहे हैं, इसे देखते हुए किसी को भी सुरक्षित नहीं माना जा सकता। डॉक्टर कहते हैं, लाइफस्टाइल-खानपान में गड़बड़ी के अलावा कुछ प्रकार के पर्यावरणीय और आनुवांशिक कारक सबसे ज्यादा खतरा बढ़ा रहे हैं। चूंकि हाल के वर्षों में बच्चों-किशोरों में भी हार्ट अटैक से मौत की खबरें सामने आई हैं, इसे ध्यान में रखते हुए कम उम्र से ही आपको निरंतर सावधानी बरतते रहने की जरूरत होती है।
वर्ल्ड हार्ट डे: हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर और कार्डियक अरेस्ट को एक ही समझने की न करें भूल, ऐसे समझें फर्क
World Heart day: हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर और कार्डियक अरेस्ट तीन अलग स्थितियां हैं। हार्ट अटैक में दिल तक खून का प्रवाह बाधित होता है, हार्ट फेलियर में दिल पर्याप्त खून पंप नहीं कर पाता, जबकि कार्डियक अरेस्ट में दिल अचानक प्रभावी तरीके से पंप करना बंद कर देता है।
दिल की बढ़ती बीमारियां
कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों के बारे में दुनियाभर में जागरूकता बढ़ाने और दिल की समस्याओं को लेकर कम उम्र से ही अलर्ट रहने के उद्देश्य से हर साल 29 सितंबर को 'वर्ल्ड हार्ट डे' मनाया जाता है। वर्ल्ड हार्ट डे 2026 का विषय है- "डॉन्ट मिस अ बीट"। इसमें दिल की बीमारी के छिपे हुए या हल्के स्तर के शुरुआती संकेतों को पहचानने पर ध्यान दिया जा रहा है, ताकि आगे चलकर कोई गंभीर समस्या न हो।
डॉक्टर बताते हैं, हार्ट अटैक हो या हार्ट फेलियर या फिर कार्डियक अरेस्ट, तीनों में हर सेकंड महत्वपूर्ण होता है। इसलिए इनके बीच का अंतर समझना और समय रहते मरीज को डॉक्टर के पास पहुंचाना, जान बचाने वाले उपायों के लिए सबसे जरूरी है।
पहले हार्ट अटैक के बारे में जान लीजिए
हार्ट अटैक मुख्य रूप से रक्त प्रवाह की समस्या है। जब दिल की मांसपेशियों तक ऑक्सीजन युक्त खून पहुंचाने वाली कोरोनरी धमनियों में रुकावट आती है तो दिल के हिस्सों में डैमेज शुरू हो जाता है। जितनी देर रक्त प्रवाह बाधित रहता है, दिल की मांसपेशी को उतना नुकसान हो सकता है।
- हार्ट अटैक के कारण आमतौर पर लोगों को सीने में दबाव या दर्द, सांस फूलने, ठंडा पसीने, मतली-चक्कर जैसी दिक्कत होती है।
- दिल में होने वाला दर्द हाथ, पीठ, गर्दन, जबड़े या पेट तक फैल सकता है।
- हार्ट अटैक अचानक नहीं होता, हमारे शरीर में लंबे समय से प्लाक जमा होकर धमनियों को ब्लॉक कर रहे होते हैं जो एक दिन हार्ट अटैक के रूप में सामने आती है।
- हार्ट अटैक में तुरंत डॉक्टरी मदद की जरूरत होती है। जितनी जल्दी मरीज को आपात चिकित्सा मिल जाए उसके जान बचने की संभावना उतनी अधिक हो सकती है।
हार्ट फेलियर क्या है?
हार्ट फेलियर का मतलब यह नहीं है कि दिल ने काम करना पूरी तरह बंद कर दिया है। इसमें दिल शरीर की जरूरत के मुताबिक पर्याप्त मात्रा में खून पंप नहीं कर पा रहा है। यह स्थिति समय के साथ विकसित हो सकती है और कई बार लंबे समय तक चलती है।
- हृदय की मांसपेशियों के कमजोर होने, लंबे समय का हाई ब्लड प्रेशर, कोरोनरी आर्टरी डिजीज और दूसरी हृदय संबंधी समस्याएं ये खतरा बढ़ा देती हैं।
- इसके कारण आपको सांस फूलने, खासकर चलते या लेटते समय सांस लेने में परेशानी, पैरों या टखनों में सूजन, थकान जैसी दिक्कतें हो सकती है।
- कार्डियोमायोपैथी दिल की मांसपेशियों की बीमारी है जिसके कारण आपके दिल के लिए खून पंप करना मुश्किल हो सकता है।
कार्डियक अरेस्ट में क्या होता है?
कार्डियक अरेस्ट हार्ट अटैक से अलग है। इसमें दिल की विद्युत प्रणाली में गड़बड़ी के कारण दिल अचानक प्रभावी तरीके से धड़कना और खून पंप करना बंद कर देता है। इसमें मरीज अचानक गिर सकता है या बेहोश हो सकता है।
- यह आपात स्थिति है। ऐसे व्यक्ति में तुरंत डॉक्टरी मदद जरूरी है।
- जब तक डॉक्टर के पास न पहुंच सकें तब तक मरीज को सीपीआर देना उसकी जान बचाने में मदद कर सकता है।
हार्ट अटैक कभी-कभी कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकता है, लेकिन दोनों एक ही स्थिति नहीं हैं। आसान भाषा में समझें तो हार्ट अटैक मुख्य रूप से खून के प्रवाह की समस्या है। कार्डियक अरेस्ट दिल की विद्युत गतिविधि की दिक्कत, जबकि हार्ट फेलियर दिल की पंपिंग क्षमता की समस्या है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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