भारत में आम तौर पर यौन संबंधों पर खुलकर बातें करना अजीबो-ग़रीब माना जाता है। यौन संबंधों में लोगों की दिलचस्पी में कोई कमी नहीं, मगर ज़्यादातर भारतीय इस पर चर्चा से बचते हैं। जि्स्मानी ताल्लुक़ को लेकर बातचीत को लेकर ये झिझक आज भारतीय समाज में बेहद आम है।
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प्राचीन भारत में ' यौन संबंधों' को लेकर खुला था माहौल
Thu, 08 Aug 2019 11:15 AM IST
ललित फुलारा
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
Published by: ललित फुलारा
Updated Thu, 08 Aug 2019 11:15 AM IST
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सेक्स को लेकर ये झिझक भारत में पिछली कुछ सदियों की देन है। मध्य युग में मुस्लिम शासकों और फिर ब्रिटिश राज के दौरान सेक्स विषय से पर्देदारी की गई। भारत में ताक़तवर ब्राह्मणवादी सोच ने भी इस पर्देदारी को बनाए रखा, बल्कि कई बार तो ये ज़बरदस्ती लागू किया गया।
लेकिन हिंदुस्तान में सेक्स को लेकर ख़यालात हमेशा से ऐसे नहीं थे। ऐसा नहीं था कि भारत में लोग हमेशा ही यौन संबंध को लेकर बात करने से कतराते थे। प्राचीन भारत में यौन संबंधों पर न सिर्फ़ खुलकर चर्चा होती थी, बल्कि सेक्स एक विषय के तौर पर पढ़ाया भी जाता था। तेरहवीं सदी से पहले भारत में सेक्स को लेकर माहौल बेहद खुला था।
लेकिन हिंदुस्तान में सेक्स को लेकर ख़यालात हमेशा से ऐसे नहीं थे। ऐसा नहीं था कि भारत में लोग हमेशा ही यौन संबंध को लेकर बात करने से कतराते थे। प्राचीन भारत में यौन संबंधों पर न सिर्फ़ खुलकर चर्चा होती थी, बल्कि सेक्स एक विषय के तौर पर पढ़ाया भी जाता था। तेरहवीं सदी से पहले भारत में सेक्स को लेकर माहौल बेहद खुला था।
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सेक्स के विषय पर पहला ग्रंथ, 'कामसूत्र' भारत में ईसा से चार सदी पूर्व से लेकर ईसा के बाद की दूसरी सदी के बीच लिखा गया था। प्राचीन भारत में यौन संबंधों को लेकर माहौल कितना खुला था, इसके तमाम सबूत मिलते हैं। मसलन ओडिशा स्थित कोणार्क के सूर्य मंदिर में तराशे हुए नग्न बुत देखने को मिलते हैं।
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इसी तरह बुद्ध धर्म से जुड़ी अजंता और एलोरा की गुफ़ाओं में भी युवतियों की नग्न मूर्तियां देखने को मिलती है। महाराष्ट्र स्थित अजंता के गुफ़ा चित्र ईसा से दो सदी पहले बनाए गए थे। वहीं एलोरा की कलाकृतियां पांचवीं से दसवीं सदी के बीच की बताई जाती हैं।
भारत में सेक्स का खुला चित्रण मध्य प्रदेश के खजुराहो स्थित मंदिरों में देखने को मिलता है। ये मंदिर क़रीब एक हज़ार साल पुराने हैं। इन्हें चंदेल राजाओं ने 950 से 1050 ईस्वी के बीच बनवाया था। उस दौरान कुल 85 मंदिर बनाए गए थे। लेकिन आज इनमें से सिर्फ़ 22 ही बचे हैं। यूनेस्को ने इन्हें 1986 में विश्व की धरोहर घोषित किया था।
भारत में सेक्स का खुला चित्रण मध्य प्रदेश के खजुराहो स्थित मंदिरों में देखने को मिलता है। ये मंदिर क़रीब एक हज़ार साल पुराने हैं। इन्हें चंदेल राजाओं ने 950 से 1050 ईस्वी के बीच बनवाया था। उस दौरान कुल 85 मंदिर बनाए गए थे। लेकिन आज इनमें से सिर्फ़ 22 ही बचे हैं। यूनेस्को ने इन्हें 1986 में विश्व की धरोहर घोषित किया था।
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इन मंदिरों में यौन संबंधों का हर रूप देखने को मिलता है। औरतों और मर्दों के तराशे हुए नंगे बुत हैं। दीवारों पर तमाम सेक्स पोज़ीशन को उकेरा गया है। यहां पर तीन लोग एक साथ यौन संबंध बनाते हुए देखे जा सकते हैं। तो, एक साथ कई जोड़े यौन उत्सव मनाते भी उकेरे गए हैं।
कई नक़्क़ाशियों में तो औरत-मर्द ऐसी सेक्सुअल पोज़ीशन में उकेरे गए हैं, जो सोचने पर असंभव से मालूम होते हैं। दूर-दूर से सैलानी सेक्स के इन मंदिरों को देखने आते हैं। यहां पर देवी-देवताओं, योद्धाओं, संगीतकारों, जानवरों और परिंदों की मूर्तियां भी उकेरी गई हैं।
कई नक़्क़ाशियों में तो औरत-मर्द ऐसी सेक्सुअल पोज़ीशन में उकेरे गए हैं, जो सोचने पर असंभव से मालूम होते हैं। दूर-दूर से सैलानी सेक्स के इन मंदिरों को देखने आते हैं। यहां पर देवी-देवताओं, योद्धाओं, संगीतकारों, जानवरों और परिंदों की मूर्तियां भी उकेरी गई हैं।