मेरी शादी की पहली रात थी। मैं पहली बार किसी आदमी के साथ अंतरंग होने वाली थी। करीबी मित्रों से हुई बातचीत और देखे गए कई पोर्न वीडियो से मेरे दिमाग में सपनों और इच्छाओं की कई तस्वीरें उभर रही थीं। सिर झुकाए, हाथ में दूध का गिलास लिए मैं बेडरूम में घुसी। अब तक सब कुछ वैसे ही था जैसा मैंने सोचा था, लेकिन मुझे बिल्कुल भी आभास नहीं था कि एक मुझे कुछ ही देर में जोरदार झटका लगने वाला है।
जब मुझे मालूम चला कि नपुंसक से मेरी शादी हुई है
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मैंने उन्हें अपनी भावनाओं के विषय में बताया। लेकिन उन्होंने कभी इस पर ध्यान नहीं दिया और ना ही इसका कोई जवाब दिया। वो थोड़े परेशान दिखे। वो नीचे की ओर देखते हुए चुपचाप बैठ गए और केवल अपना सिर हिलाते रहे। मैंने सोचा कि आजकल महिलाओं से ज़्यादा पुरुष शर्मीले होते हैं और मेरे होने वाले पति भी कोई अपवाद नहीं हैं, शायद इसलिए उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। लेकिन शादी की रात हुई उस चीज ने मुझे उलझन में डाल दिया। मुझे नहीं पता कि उसने ऐसा क्यों किया।
जब अगली सुबह मैंने उनसे पूछा, तो उन्होंने कहा कि वो ठीक नहीं थे। लेकिन आगे भी कुछ नहीं बदला। हमारी दूसरी, तीसरी और कई रातें ऐसे ही बीतीं। मैंने जब अपनी सास को यह बताया तो उन्होंने भी मेरे पति का बचाव किया। उन्होंने कहा, "वह शर्मीला है, उसे बचपन से ही लड़कियों से बात करने में झिझक रही है, उसने लड़कों के स्कूल में पढ़ाई की है। उसकी ना तो कोई बहन है और ना ही को महिला मित्र।"
हालांकि इस बात से मुझे अस्थायी राहत तो मिली लेकिन मैं इस विषय में सोचना बंद नहीं कर सकी। मेरी सारी उम्मीदें, सपने और इच्छाएं दिन ब दिन टूट रही थीं। मेरी बेचैनी का एकमात्र कारण सेक्स नहीं था। वो शायद ही मुझसे बात करते थे। मुझे लगता कि हमेशा मेरी उपेक्षा हो रही है। वो मुझसे दूर भागते, छुना पकड़ना तो दूर की बात थी।
मुझे नहीं मालूम था कि ये सब बातें किससे शेयर करूं। मैं अपने परिवार से बात नहीं कर सकती थी क्योंकि सब यही सोचते कि मैं बहुत खुश हूं, लेकिन मेरे सब्र का बांध टूट रहा था। मुझे इसका हल ढूंढने की जरूरत थी। आम तौर पर छुट्टियों वाले दिन भी वो घर पर नहीं रहते थे, वो या तो अपने किसी मित्र के घर जाते या अपने माता-पिता को बाहर ले जाते थे। संयोग से उस दिन वो घर पर ही रहे। मैं कमरे में घुसी और अंदर से दरवाजा बंद कर दिया। वो बुहत तेज़ी से अपने बिस्तर से उठे मानो कूद गये हों। मैं उनके पास गयी और प्यार से पूछा, "क्या आप मुझे पसंद नहीं करते? हम अब तक एक बार भी अंतरंग नहीं हुए हैं, ना ही आपने अब तक कभी अपनी भावनाओं के विषय में ही बताया, आख़िर आपकी समस्या क्या है?"
उन्होंने झटके से जवाब दिया, "मुझे कोई समस्या नहीं है।" जब उन्होंने यह कहा तो मैंने सोचा कि यह मौका है उनके करीब जाने और अपनी तरफ उन्हें आकर्षित करने का। मैंने उनसे शारीरिक छेड़छाड़ शुरू की। मैंने सोचा कि इससे उनपर कोई असर होगा, लेकिन उन पर कोई असर हो नहीं रहा था। उनमें उत्तेजना का कोई भाव भी नहीं दिख रहा था।
फिर मुझे एक दिन ये पता चला कि वो नपुंसक थे और डॉक्टरों ने हमारी शादी से पहले ही इसकी पुष्टि कर दी थी। वो और उसके माता-पिता सब कुछ जानते थे, लेकिन मुझे अंधेरे में रखकर मुझसे धोखा किया गया। मुझे सच्चाई का पता चल गया तो उन्हें शर्मिंदगी महसूस हुई, फिर भी उन्होंने अपनी गलती कभी स्वीकार नहीं की। समाज हमेशा महिलाओं की छोटी से छोटी गलती को बढ़ा-चढ़ा कर पेश करता है, लेकिन अगर किसी मर्द की कोई गलती हो तो भी उंगलियां महिलाओं की ओर ही उठती हैं।