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Agra: चंबल में मोटरबोट बंद, 3 घंटे तक अटकी रहीं 64 लोगों की सांसें; 8 किमी. बहते हुए किनारे पहुंची
Mon, 17 Aug 2026 04:07 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 17 Aug 2026 04:07 AM IST
सार
बोट में चालक और दो कर्मचारी भी थे। लहरों में मोटरबोट डगमगाने पर मदद के लिए सभी चीखने-चिल्लाने लगे। करीब 3 घंटे बाद 8 किलोमीटर दूर बहते हुए बोट भिंड के गांव कच्छपुरा कनेरा पहुंची। तब पतवार से बोट को किनारे लगाया जा सका। आ
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विस्तार
मुरैना (मध्य प्रदेश) के नगरा साहसपुरा से कैंजरा घाट (पिनाहट) आ रहे कांवड़ियों सहित 61 श्रद्धालुओं से भरी मोटरबोट उफनती चंबल नदी में डीजल खत्म होने से बंद हो गई। बोट में चालक और दो कर्मचारी भी थे। लहरों में मोटरबोट डगमगाने पर मदद के लिए सभी चीखने-चिल्लाने लगे। करीब 3 घंटे बाद 8 किलोमीटर दूर बहते हुए बोट भिंड के गांव कच्छपुरा कनेरा पहुंची। तब पतवार से बोट को किनारे लगाया जा सका। आरोप है कि नियमों की अनदेखी कर यात्रियों को बैठाया गया था। उधर, इस मामले में प्राथमिकी भी दर्ज कर ली गई है।
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घटना रविवार सुबह 10 बजे की है। इन दिनों चंबल नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है। इसके बावजूद मोटरबोट का संचालन जारी है। हादसे वाली मोटरबोट में यात्रियों के अलावा 50 से अधिक बाइकें भी थीं। गांव बजरिया के ब्रजेश, जोटई के दिनेश, मुकेश तोमर, पोरसा की नीतू देवी ने बताया कि कुछ दूर चलते ही बोट बंद हो गई। कर्मचारी ने उन्हें बताया कि मोटर में कपड़ा फंसने से खराबी आ गई है। देर तक चालू न होने पर बताया कि डीजल खत्म हो गया है। तब तक मोटरबोट डगमगाते हुए तेज बहाव के साथ बहने लगी। चालक और कर्मचारियों ने बल्लियों और पतवार का सहारा लिया मगर लोग अधिक होने से नियंत्रित नहीं कर पाए। यात्री घबरा गए और जान बचाने के लिए चीखने लगे। लहरों के दबाव में बोट 8 किमी तक बहती गई।
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चालक आैर संचालक हिरासत में, केस दर्ज
मोटरबोट चालक व संचालक के खिलाफ यात्रियों के साथ जान से खिलवाड़ करने व लापरवाही का मामला दर्ज किया गया है। दोनों को हिरासत में ले लिया गया। मुरैना के एसपी धर्मराज मीणा व भिंड एसपी सूरज वर्मा प्रशासनिक अमले के साथ जिले के चंबल घाटों पर पहुंचे। डीआईजी सुनील जैन ने बताया कि स्टीमर संचालन पर भी अभी रोक लगा दी गई है।
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पीडब्ल्यूडी ने मोटरबोट बिना अनुमति चलवाई
आगरा लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की लापरवाही से रविवार को 64 लोगों की जान आफत में फंस गई। बिना अनुमति पीडब्ल्यूडी ने उफनती चंबल नदी में मोटरबोट चलवा दिए। लाइफ जैकेट, ट्यूब, गोताखोर व अन्य सुरक्षा इंतजाम भी नहीं किए। बाह में चंबल नदी पार कराने के लिए पीडब्ल्यूडी मोटरबोट व नावों का संचालन कराता है। हर साल लाखों रुपये पानी की तरह बहाए जाते हैं। रविवार को पीडब्ल्यूडी की कलई खुल गई।
नदी में मोटरबोट व नाव का संचालन शुरू कराने से पहले पीडब्ल्यूडी को चंबल सेंक्चुअरी वन क्षेत्र से अनुमति लेनी पड़ती है। विभाग ने अनुमति के लिए आवेदन कर रखा है लेकिन अनुमति मिलने से पहले ही रविवार को मोटरबोट चलवा दिया। बीच नदी में डीजल खत्म हो गया। उधर, मुख्य अभियंता एनके यादव का कहना है कि पीडब्ल्यूडी को चंबल सेंक्चुअरी से अनुमति नहीं मिली थी।