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Nag Punchmi: एक साल का इंतजार होगा खत्म, रात 12 बजे खुलेंगे भगवान नागचंद्रेश्वर के पट; होंगे दिव्य दर्शन

Sun, 16 Aug 2026 08:36 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: दिनेश शर्मा Updated Sun, 16 Aug 2026 08:36 PM IST
सार

नागपंचमी और सावन के तीसरे सोमवार के दुर्लभ संयोग पर उज्जैन में भगवान नागचंद्रेश्वर के पट 16 अगस्त की रात 12 बजे खुलेंगे। साल में केवल 24 घंटे खुलने वाले मंदिर में देशभर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। इस दौरान नागचंद्रेश्वर की त्रिकाल पूजा होगी और बाबा महाकाल की सवारी भी निकलेगी।

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नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट 24 घंटे खुलेंगे - फोटो : Amar Ujala
श्रावण के तीसरे सोमवार और नागपंचमी के दुर्लभ संयोग पर उज्जैन में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा। श्री महाकालेश्वर मंदिर के शिखर के तीसरे खंड में विराजित भगवान नागचंद्रेश्वर के पट आज 16 अगस्त की मध्यरात्रि 12 बजे खुलेंगे। साल में सिर्फ एक बार 24 घंटे के लिए इस मंदिर में खुलने वाले दर्शन के लिए देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर मे पहुंचे हैं। 


याद रहे कि नागपंचमी पर भगवान नागचंद्रेश्वर की त्रिकाल पूजा की परंपरा है। रात करीब 11:30 बजे पूजन प्रक्रिया शुरू होगी। मध्यरात्रि 12 बजे श्री पंचायती महानिवार्णी अखाड़े के महंत विनीत गिरि महाराज भगवान नागचंद्रेश्वर का महाअभिषेक और प्रथम पूजन करेंगे। इसके बाद मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। 17 अगस्त को दोपहर 12 बजे अखाड़े की ओर से दूसरी पूजा होगी। शाम की संध्या आरती के बाद मंदिर समिति और पुजारियों द्वारा तीसरी विशेष पूजा संपन्न की जाएगी।

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उज्जैन स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर का पूजन नागपंचमी पर होगा। - फोटो : अमर उजाला
11वीं सदी की दुर्लभ प्रतिमा, सात फनों के नीचे विराजमान शिव-पार्वती
महाकाल मंदिर के शिखर के तीसरे खंड में स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व यह प्रतिमा बेहद खास है। यहां विराजित प्रतिमा को करीब 11वीं शताब्दी यानी 1050 ईस्वी का माना जाता है। प्रतिमा में भगवान शिव और माता पार्वती सात फनों वाले नाग के छत्र के नीचे विराजमान हैं। भगवान शिव के गले और भुजाओं में नाग लिपटे हुए हैं। प्रतिमा में भगवान गणेश, नंदी और सिंह की आकृतियां भी उकेरी गई हैं। मान्यता है कि यह दुर्लभ प्रतिमा नेपाल से लाई गई थी।

एक ही दिन नागचंद्रेश्वर दर्शन और बाबा महाकाल की सवारी
17 अगस्त को सावन का तीसरा सोमवार होने के कारण भगवान महाकाल की पारंपरिक सवारी भी नगर भ्रमण पर निकलेगी। ऐसे में श्रद्धालुओं को एक ही दिन भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन और बाबा महाकाल की सवारी का पुण्य अवसर मिलेगा। इस दुर्लभ धार्मिक संयोग को देखते हुए उज्जैन में भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ नियंत्रण के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकासी मार्ग निर्धारित किए हैं।

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नागचंद्रेश्वर मंदिर का यह दरवाजा साल में एक बार एक दिन के लिए खुलता है। - फोटो : अमर उजाला
श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग रूट
  • नागचंद्रेश्वर सामान्य दर्शन :- कर्कराज पार्किंग से भील समाज धर्मशाला, चारधाम और हरसिद्धि चौराहा होते हुए गेट नंबर-4 से प्रवेश। निकासी प्रीपेड बूथ और 24 खंबा रोड की ओर से होगी।
  • नागचंद्रेश्वर शीघ्र दर्शन :- हरसिद्धि पाल से बड़ा गणेश मार्ग होते हुए गेट नंबर-5 से प्रवेश। निकासी प्रीपेड बूथ और 24 खंबा रोड से हरसिद्धि पाल की ओर होगी।
  • महाकाल सामान्य दर्शन :- त्रिवेणी संग्रहालय से नंदी द्वार, मानसरोवर, गणेश एवं कार्तिक मंडप की ओर से प्रवेश। निकासी एम्बुलेंस गेट और पिनाकी द्वार से होगी।
  • महाकाल शीघ्र दर्शन :- नीलकंठ द्वार से सीधे प्रवेश की व्यवस्था रहेगी।

त्रिकाल पूजा और खास इंतजाम
विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर के शीर्ष पर स्थित भगवान श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट रविवार रात 12 बजे श्रद्धालुओं के लिए खुलेंगे। नागपंचमी पर भगवान नागचंद्रेश्वर की दिन में तीन बार पूजा होगी। दोपहर 12 बजे शासन की पूजा, शाम 7:30 बजे महाकाल की संध्या आरती के बाद पुजारी-पुरोहित की पूजा और रात 12 बजे फिर अखाड़े द्वारा पूजा कर पट बंद होंगे।

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नागचंद्रेश्वर भगवान के दर्शन लिए लाखों की भीड़। - फोटो : अमर उजाला
24 घंटे खुला रहेगा नागचंद्रेश्वर मंदिर
भगवान नागचंद्रेश्वर का मंदिर वर्ष में केवल नागपंचमी के अवसर पर एक बार श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है। पट खुलने से लेकर अगले दिन रात तक भक्त भगवान नागचंद्रेश्वर के दुर्लभ दर्शन कर सकेंगे। नागपंचमी, सावन सोमवार और बाबा महाकाल की सवारी के एक साथ होने से इस बार उज्जैन में आस्था का विशाल संगम देखने को मिलेगा।

बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए व्हीलचेयर
वृद्ध, दिव्यांग और नि:शक्त श्रद्धालुओं के लिए व्हीलचेयर की व्यवस्था की गई है। जूता स्टैंड और प्राथमिक चिकित्सा केंद्र के आसपास व्हीलचेयर उपलब्ध रहेंगी। इनके संचालन के लिए शिफ्टवार कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी।

जूता स्टैंड और पेयजल की भी व्यवस्था
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए भील समाज धर्मशाला, झालरिया मठ सहित चयनित स्थानों पर अस्थायी जूता स्टैंड बनाए जाएंगे। वहीं दर्शन मार्ग में जगह-जगह पानी की बोतल और नाद के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।
 
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