प्यार का भरोसा सिर्फ फूल ही नहीं ढूंढता। कांटों में भी प्यार ढूंढता है आसरा। फूल प्यार को रुमानी अहसास दे सकते हैं, कांटे प्यार को अमरता का वरदान दे रहे हैं। कहानी चंदेरी की है। साड़ियों के इंद्रधनुष में लिपटा महान गायक बैजू बावरा का शहर। यहां प्यार करने वाले इस सदी की सबसे अनूठी और अनमोल कहानी लिख रहे हैं।
Valentine Spcl: बैजू के दरबार में प्रेम की अर्जियां
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Valentine Spcl: बैजू के दरबार में प्रेम की अर्जियां
छोटे से शहर में अक्सर प्यार की उम्र भी छोटी रह जाती है। जितनी गलियां, उतनी निगाहें। जगह-जगह झुंडों में अखबार पढ़ते लोग, सुबह के अभिभावक और जिनको मंदिर और मस्जिद से लगाव है, वे शाम के पहरेदार। चंदेरी के हायर सेकेंडरी स्कूल में 10वीं कक्षा में पढ़ने वाले जफर को भी लगता था कि उसका मासूम प्यार कहीं जमाने की नजर में चढ़कर टूट न जाए। निगाहें बचाकर वह भी बैजू बावरा के स्मारक के पास पहुंचा। वहां लगे कैकटस की पत्तियों पर अपना और अपनी प्रेमिका का नाम लिखकर आ गया। भरोसा है, बैजू बावरा उसके प्यार की रक्षा करेंगे। 'लेकिन अर्जी तो देनी पड़ती है, उसके बिना बैजू बावरा भी कुछ नहीं कर सकते' जफर का आत्मविश्वास अब उसके चेहरे पर दिखता है।
Valentine Spcl: बैजू के दरबार में प्रेम की अर्जियां
बैजू बावरा के दरबार में प्रेम की अर्जी लगाने वाला जफर अकेला नहीं है। इलाके भर के प्रेमी-प्रेमिकाओं की आशंकाएं यहां आकर आत्मविश्वास में ढल रही हैं। कांटों से भरी कैकटस की पत्तियों के सहारे अपने प्यार को अमर कर देने की इस कहानी में कहीं-न-कहीं बैजू बावरा की भी कहानी मिली हुई है। 16 वीं शताब्दी के महान गायक पंडित बैजनाथ का जन्म चंदेरी में सन् 1542 में शरद पूर्णिमा की रात एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। पंडित बैजनाथ की बाल्यकाल से ही गायन एवं संगीत में काफी रुचि थी। उन्हें बचपन में लोग प्यार से 'बैजू' कहकर पुकारते थे। बैजू की उम्र के साथ-साथ उनके गायन और संगीत में भी बढ़ोतरी होती गई।
Valentine Spcl: बैजू के दरबार में प्रेम की अर्जियां
जब बैजू युवा हुए, तो नगर की कलावती नामक युवती से उनका प्रेम-प्रसंग हुआ। कलावती बैजू की प्रेयसी के साथ-साथ प्रेरणास्रोत भी रही। संगीत और गायन के साथ-साथ बैजू अपनी प्रेयसी के प्यार में पागल हो गए। इसी से लोग उन्हें बैजू बावरा कहने लगे। कहते हैं, बैजू बावरा ने अंतिम सांस चंदेरी में ही ली। इनकी याद में चंदेरी में एक स्मारक भी बनाया गया है। उसी स्मारक के इलाके में कैकटस के पौधे हैं, जिनकी पत्तियों पर लिखी जा रही है प्रेम की कहानियां। यह बात दीगर है कि कैकटस के पौधे उस जगह पर, इसलिए लगाए गए थे कि बगल में ही राजपूत स्त्रियों के द्वारा किया गया सामूहिक आत्मदाह (जौहर) स्थल भी है। शायद इतिहास की उस कटु याद के लिए ही प्रशासन ने उस इलाके में कैकटस के पौधे लगाए थे। लेकिन प्यार तो प्यार है। प्यार का भरोसा सिर्फ फूल ही नहीं ढूंढता। कांटों में भी प्यार ढूंढता है आसरा। और इस आसरे ने चंदेरी में मोहब्बत की एक नई कहानी लिखी है।
Valentine Spcl: बैजू के दरबार में प्रेम की अर्जियां
लटकते होंगे यूरोप में पुलों पर मोहब्बत के ताले और बहती होंगी नदियों में चाबियां! जापान के लोग अपने प्यार की सलामती के लिए देते होंगे पक्षियों को दाना! इस देश के भी हजारों प्रेमियों ने अपने प्यार की खातिर बांधी होगी ताबीजें, गुदवाया होगा गोदना, चढ़ाई होगी चादरें, रखा होगा उपवास, मगर प्रेम की यह अर्जी सबसे अलग है और अपने आप में बेमिसाल। दूसरे देश के लोग प्यार को दिल में बंद कर दरिया में फेंक रहे हैं चाबी और यहां कांटे कर रहे हैं प्यार की हिफाजत। कहा जाता रहा है और ग्वालियर के जय विलास महल में संरक्षित ऐतिहासिक पुस्तकों में पढ़ा जाता भी रहा है कि बैजू 'राग दीपक' गाकर तेल के दीप जला सकते थे, राग मेघ, मेघ मल्हार या गौड़ मल्हार गाकर वर्षा करा सकते थे। राग बहार गाकर फूल खिला सकते थे और यहां तक कि राग मालकौंस गाकर पत्थर भी पिघला सकते थे। अब उन्हीं बैजू के दरबार से प्रेमी-प्रेमिकाओं को उम्मीद है कि एक-न-एक दिन माता-पिता का दिल पिघलेगा। वे हामी भरेंगे। शहनाई बजेगी।