Mother Vs Wife Relationship: भारतीय परिवारों में शादी के बाद पति, पत्नी और मां के रिश्तों को लेकर अक्सर कई तरह की चर्चाएं होती हैं। कई बार यह सवाल उठता है कि कुछ पुरुष अपनी पत्नी की तुलना में मां की बात को ज्यादा महत्व क्यों देते हैं। यह विषय केवल भावनाओं का नहीं, बल्कि परिवार, संस्कार, परवरिश, जिम्मेदारियों और रिश्तों की गहरी समझ से भी जुड़ा हुआ है।
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Marriage Tips: पत्नी और मां के बीच क्यों फंस जाते हैं कई पुरुष? जानिए असली कारण और समाधान
Wed, 08 Jul 2026 12:22 PM IST
शिवानी अवस्थी
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिवानी अवस्थी
Updated Wed, 08 Jul 2026 12:22 PM IST
सार
Relationship Tips: क्या पुरुष सच में पत्नी से ज्यादा मां को प्राथमिकता देते हैं?
हर पुरुष ऐसा नहीं करता। हालांकि कई परिवारों में पुरुष अपनी मां के साथ लंबे समय से बने भावनात्मक जुड़ाव, परवरिश, पारिवारिक जिम्मेदारियों और सामाजिक संस्कारों के कारण कई परिस्थितियों में मां को पहले महत्व देते हैं। वहीं एक स्वस्थ वैवाहिक जीवन के लिए मां और पत्नी, दोनों के प्रति सम्मान, संवाद और संतुलन बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
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शादी के बाद पत्नी या मां किसकी बात सुनते हैं पति
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बचपन से बना गहरा भावनात्मक जुड़ाव
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बचपन से बना गहरा भावनात्मक जुड़ाव
- अधिकांश पुरुषों का अपनी मां के साथ बचपन से ही मजबूत भावनात्मक रिश्ता होता है।
- मां उनके पालन-पोषण, शिक्षा, बीमारियों और जीवन के हर महत्वपूर्ण पड़ाव में साथ रहती हैं।
- वर्षों का यह जुड़ाव कई बार निर्णय लेने के तरीके को भी प्रभावित करता है।
- इसका अर्थ यह नहीं कि पत्नी कम महत्वपूर्ण है, बल्कि पुराने रिश्ते की गहराई स्वाभाविक रूप से अधिक हो सकती है।
भारतीय परिवारों के संस्कार और सामाजिक सोच
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भारतीय परिवारों के संस्कार और सामाजिक सोच
- भारतीय समाज में माता-पिता की सेवा और सम्मान को महत्वपूर्ण मूल्य माना जाता है।
- कई पुरुष बचपन से यही सीखते हैं कि माता-पिता की बात को प्राथमिकता देना उनका कर्तव्य है।
- यही संस्कार शादी के बाद भी उनके व्यवहार में दिखाई देते हैं।
- हालांकि आधुनिक परिवारों में पति-पत्नी के बीच साझेदारी और संयुक्त निर्णय लेने की प्रवृत्ति भी तेजी से बढ़ रही है।
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जिम्मेदारियों का दबाव
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जिम्मेदारियों का दबाव
- शादी के बाद कई पुरुष एक साथ कई भूमिकाएं निभाते हैं, बेटे, पति, पिता और कमाने वाले सदस्य की।
- यदि मां उम्रदराज़ हों, अस्वस्थ हों या आर्थिक रूप से उन पर निर्भर हों, तो उनकी देखभाल को प्राथमिकता देना स्वाभाविक हो सकता है।
- यह स्थिति पत्नी के महत्व को कम नहीं करती, बल्कि पारिवारिक जिम्मेदारियों का हिस्सा हो सकती है।
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संवाद की कमी से बढ़ती हैं गलतफहमियां
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संवाद की कमी से बढ़ती हैं गलतफहमियां
- कई बार पत्नी को लगता है कि उनकी बात नहीं सुनी जा रही, जबकि पति स्वयं दो महत्वपूर्ण रिश्तों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे होते हैं।
- यदि परिवार में खुलकर बातचीत न हो, तो छोटी-छोटी बातें भी विवाद का कारण बन सकती हैं।
- नियमित संवाद, एक-दूसरे की भावनाओं को समझना और मिलकर निर्णय लेना ऐसे तनाव को कम कर सकता है।