अफगानिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शापूर जदरान का मंगलवार (7 जुलाई, 2026) को निधन हो गया। बुधवार (8 जुलाई) को उनका 39वां जन्मदिन था, हालांकि इससे एक दिन पहले ही वह दुनिया को अलविदा कह गए। जदरान का लंबे समय से दिल्ली में इलाज चल रहा था। पिछले साल बीमार पड़ने के बाद, वह अफगानिस्तान के डॉक्टरों की सलाह पर इलाज के लिए भारत आए थे। अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने जदरान की मौत की पुष्टि की है।
Shapoor Zadran Death: क्या है एचएलएच बीमारी, जिससे पूर्व अफगानी क्रिकेटर की हो गई मौत
अफगानिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शापूर जादरान का 7 जुलाई को 38 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह हेमोफैगोसाइटिक लिम्फोहिस्टियोसाइटोसिस नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। लंबे समय से उनका इलाज चल रहा था।
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शापूर जदरान की मौत पर दुख जताते हुए अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने एक बयान में कहा, अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड बहुत दुख और अफसोस के साथ पूर्व तेज गेंदबाज शापूर जदरान के निधन पर शोक व्यक्त करता है। वह अफगानिस्तान क्रिकेट की नींव रखने वाले खिलाड़ियों में से एक थे। उनके समर्पण, जुनून और अटूट प्रतिबद्धता ने हमारे देश में इस खेल के उत्थान और विकास में अहम भूमिका निभाई।
إِنَّا لِلّهِ وَإِنَّـا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ
With profound grief and deep sorrow, the Afghanistan Cricket Board mourns the passing of former Afghanistan fast bowler Shapoor Zadran.
Shapoor Zadran was one of the foundation-laying figures of Afghanistan cricket, whose dedication,… pic.twitter.com/iPIAJ6HLkq
अब एचएलएच बीमारी के बारे में जान लीजिए
हमारा इम्यून सिस्टम सामान्य परिस्थितियों में वायरस, बैक्टीरिया और अन्य संक्रमणों से लड़कर हमें स्वस्थ रखता है। लेकिन हीमोफैगोसाइटिक लिम्फोहिस्टियोसाइटोसिस में यही इम्यून सिस्टम अनियंत्रित हो जाता है। शरीर की रक्षा करने वाली श्वेत रक्त कोशिकाएं जरूरत से ज्यादा सक्रिय होकर लगातार सूजन पैदा करने वाले केमिकल रिलीज करने लगती हैं। इससे शरीर के कई महत्वपूर्ण अंग जैसे लिवर, प्लीहा, बोन मैरो, फेफड़े और यहां तक कि मस्तिष्क भी प्रभावित हो सकते हैं।
ये बीमारी आमतौर पर शिशुओं और छोटे बच्चों में होती है। यह वयस्कों में भी हो सकती है। बच्चों में यह बीमारी आमतौर पर आनुवंशिक होती है। वयस्कों में संक्रमण और कैंसर जैसी कई अलग-अलग स्थितियों के कारण एचएलएच हो सकता है।
क्यों होती है ये बीमारी?
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि जिन लोगों को एचएलएच की समस्या है उनका इम्यून सिस्टम सामान्य रूप से काम नहीं करता है। कुछ खास तरह की व्हाइट ब्लड सेल्स जैसे हिस्टियोसाइट्स और लिम्फोसाइट्स आपकी दूसरी ब्लड सेल्स पर हमला करती हैं। ये असामान्य ब्लड सेल्स आपकी प्लीहा और लिवर में जमा हो जाती हैं, जिससे ये अंग बड़े हो जाते हैं।
- ये एक दुर्लभ बीमारी है। एचएलएच के मामले कुल मामलों में से लगभग 25% में बीमारी आनुवांशिक होती है।
- अगर माता-पिता दोनों को ये दिक्कत है तो बच्चे में बीमारी होने की आशंका बढ़ जाती हैं।
- वहीं कुछ मामलों में कई अन्य स्थितियां इसके खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती हैं। कुछ प्रकार के वायरल इंफेक्शन, इम्यून सिस्टम की कमजोरी या कैंसर वालों में खतरा अधिक हो सकता है।
क्या हैं इस बीमारी के लक्षण?
इस बीमारी की शुरुआत अक्सर लगातार तेज बुखार से होती है। मरीज को अत्यधिक कमजोरी, भूख कम लगने, वजन घटने, त्वचा पर दाने जैसी समस्या महसूस हो सकती है।
- समय के साथ लिवर और प्लीहा बढ़ने के कारण पेट में सूजन या दर्द भी हो सकता है।
- कई मरीजों में खून की कमी, प्लेटलेट्स कम होने और बार-बार संक्रमण जैसी समस्याएं दिखाई देती हैं।
- पीलिया के अलावा फेफड़ों की समस्याएं और सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
- सिरदर्द, चलने में तकलीफ, देखने में परेशानी जैसी तंत्रिका तंत्र की समस्याएं।
मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक इम्यून सिस्टम लगातार सक्रिय रहना पूरे शरीर में गंभीर सूजन पैदा करता है। इससे बोन मैरो में रक्त कोशिकाओं का निर्माण प्रभावित होता है। मरीज में एनीमिया, प्लेटलेट्स की कमी और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। यदि इलाज में देरी हो जाए तो लिवर फेलियर, किडनी डैमेज, फेफड़ों की समस्या और मस्तिष्क में सूजन जैसी जटिलताएं विकसित हो सकती हैं। यही वजह है कि यह बीमारी तेजी से जानलेवा बन सकती है।
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स्रोत:
Hemophagocytic Lymphohistiocystosis
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