Nag Panchami: कोई खुलता है साल में एक बार तो कहीं विराजते हैं 30000 नाग, ये हैं भारत के 7 रहस्यमय नाग मंदिर
Nag Panchami 2025: इस वर्ष नाग पंचमी 29 जुलाई 2025 को मनाई जा रही है। अगर आप भी नाग पंचमी पर किसी प्राचीन और दिव्य नाग मंदिरों में दर्शन के लिए जाना चाहते हैं तो इस लेख में देश के प्रमुख नाग मंदिरों के बारे में बताया जा रहा है।
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नागचंद्रेश्वर मंदिर, उज्जैन (मध्यप्रदेश)
यह मंदिर महाकालेश्वर मंदिर परिसर में स्थित है और पूरे वर्ष में केवल नाग पंचमी के दिन ही श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है। यहां भगवान शिव और माता पार्वती नाग के फन के नीचे विराजमान हैं, जो नेपाल से लाई गई अनोखी मूर्ति है। कहते हैं, इस दिन यहां पूजा करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है।
कर्कोटक नागराज मंदिर, भीमताल
उत्तराखंड के भीमताल में स्थित ककोर्टक नागराज मंदिर 5 हजार साल से भी ज्यादा पुराना माना जाता है। मंदिर कर्कोटक नामक पहाड़ी के टॉप पर स्थित है और इसका उल्लेख स्कंद पुराण के मानसखंड में भी मिलता है। यहां पूजा करने से सर्प दोष से छुटकारा मिलता है।
सेम-मुखेम नागराजा मंदिर, टिहरी
उत्तराखंड में ही टिहली क्षेत्र में सेम-मुखेम नागराजा मंदिर स्थित है। इस मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के नाग अवतार की पूजा होती है। माना जाता है कि द्वारका के जल में डूबने के बाद वे यहां नागराज के रूप में प्रकट हुए थे। मंदिर में स्वयंभू शिला रूप में नागराज की उपस्थिति मानी जाती है।
मन्नारशाला मंदिर, केरल
केरल के अलेप्पी जिले में स्थित मन्नारशाला मंदिर अपने 30,000 नाग प्रतिमाओं के लिए प्रसिद्ध है। 16 एकड़ में फैला यह मंदिर नागराज और उनकी पत्नी नागयक्षी को समर्पित है। कहा जाता है कि यहां महिलाओं की संतान प्राप्ति की मनोकामना विशेष रूप से मानी जाती है।
नाग वासुकी मंदिर, प्रयागराज
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में नाग वासुकी मंदिर है। नाग वासुकी वही सर्प है जो भगवान शिव के गले में विराजते हैं।यहां नाग पंचमी के दिन विशाल मेला लगता है और दूर-दराज़ से लोग पूजन के लिए आते हैं। मंदिर को सर्पनाथ, शेषराज और अनंत नामों से भी जाना जाता है।
तक्षकेश्वरनाथ मंदिर, प्रयागराज
प्रयागराज में ही यमुना नदी के किनारे तक्षकेश्वरनाथ मंदिर स्थित है। यह प्राचीन मंदिर भी नागदेव की भक्ति का केंद्र है। मान्यता है कि यहां दर्शन मात्र से सर्प भय और सर्प दोष से मुक्ति मिलती है।मंदिर में शिव और नाग देवता की पूजा साथ में की जाती है।