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विवादों में क्यों घिरती हैं स्मृति ईरानी, 7 बड़े विवाद
Thu, 21 Jan 2016 11:15 AM IST
Updated Thu, 21 Jan 2016 11:15 AM IST
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विवादों में क्यों घिरती हैं स्मृति ईरानी, 7 बड़े विवाद
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हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के दलित छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या की आंच मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी तक पहुंच चुकी है। हालांकि वह पहली बार विवादों में नहीं है। स्मृति ईरानी मंत्री के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सर्वाधिक अचरज भरा चुनाव रही हैं। बुधवार को उन्होंने रोहित वेमुला की मौत सफाई देते हुए कहा कि रोहित दलित नहीं बल्कि पिछड़ी जाति का था और बंडारू दत्तात्रेय भी यादव जाति के हैं। उल्लेखनीय है कि बंडारू दत्तात्रेय की शिकायत पर ही रोहित समेत पांच छात्रों को हॉस्टल से बाहर किया गया था। पढ़िए, इससे पहले कब-कब विवादों में रहीं हैं स्मृति ईरानी-
विवादों में क्यों घिरती हैं स्मृति ईरानी, 7 बड़े विवाद
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मानव संसाधन विकास मंत्री बनने के बाद से ही स्मृति ईरानी की डिग्रियों का मामला विवादों में है। उन्होंने अपने चुनाव हलफनामों के शिक्षा संबंधित ऐसी जानकारियां दी, जिनमें मेल नहीं था और वही विवाद का कारण बनीं। 2004 में दिए चुनावी हलफनामे उन्होंने बताया था कि वे 1996 में दिल्ली युनिवर्सिटी से पत्राचार से बीए कर चुकी हैं, जबकि 2014 में उन्होंने हलफानामा दिया कि 1994 में उन्होंने बीकॉम दाखिला लिया था, लेकिन एक ही साल पूरा कर पाईं। एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि ईरानी ने 2013 में दिल्ली युनिवर्सिटी में पत्राचार से एक कोर्स करने के लिए दाखिला लिया लेकिन उन्होंने परीक्षा नहीं दी। जून, 2015 में दिल्ली एक निचली अदालत ने उनकी डिग्रियों की जांच कराने से संबंधित याचिका स्वीकार कर ली।
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दिल्ली विश्वविद्यालय के अतिचर्चित चार वर्षीय कार्यक्रम FYUP को रद्द कर स्मृति विवादों में आ गईं। स्मृति ने मंत्री बनते ही यूजीसी को आदेश दिया कि वो दिल्ली विश्वविद्यालय को एफवाईयूपी रद्द करने को कहे। रिपोर्टों के मुताबिक, स्मृति के आदेश के बाद यूजीसी चेयरमैन ने खुद आधी रात को डीयू के वीसी को पत्र टाइप किया था। एफवाईयूपी का विरोध कई छात्र संगठन कर रहे थे, हालांकि उन्होंने एबीवीपी और भाजपा की दिल्ली इकाई की मांग मानते हुए आदेश दिया। मानव संसाधन मंत्रालय ने ये नहीं बताया कि एफवाईयूपी क्यों रद्द किया गया, केवल प्रक्रियागत गड़बड़ियों का हवाला दिया गया। मामले में यूजीसी और डीयू की स्वायत्तता में हस्तक्षेप करने के कारण स्मृति के मंत्रालय की आलोचना हुई।
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स्मृति ईरानी के मंत्री रहते ही आईआईटी दिल्ली के निदेशक आर शेवगांवकर ने इस्तीफा दे दिया। आरोप लगा कि उन पर भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी की तनख्वाह रीलीज करने का दबाव बनाया जा रहा था। स्वामी आईआईटी दिल्ली में एक वर्ष पहले अध्यापन कर चुके थे।
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ईरानी के मंत्री रहते ही विश्वेस्वरैया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी का चेयरमैन विश्राम जामदार को बनाया गया। जामदार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के घोषित सदस्य थे और संगठन के स्थानीय नेता भी थे। ईरानी पर पक्षपात का आरोप लगा।
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