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जब माैत के सन्नाटे में समाई थी जिंदगी: 32 फुट की गहराई से निकला 26 साल पुराना राज, स्कूल ड्रेस से बड़ा खुलासा
संवाद न्यूज एजेंसी, कीरतपुर साहिब (पंजाब)
Published by: Nivedita
Updated Fri, 22 May 2026 03:19 PM IST
सार
भाखड़ा नहर में 26 साल पहले शादी से लाैट रहे गांव कोटला के तीन पुरुष और एक बच्चा मारुति ओमनी वैन के साथ गिर गए थे। अब गोताखोर कमलप्रीत सैनी ने कार को खोज निकाला है।
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व्यथा सुनाते परिजन
- फोटो : संवाद
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पंजाब की भाखड़ा नहर में करीब 26 साल पहले गिरी एक मारुति ओमनी वैन को अब बरामद किया गया है। वर्ष 2000 में कीरतपुर साहिब क्षेत्र के गांव कोटला के चार लोगों को लेकर ये वैन नहर में समा गई थी। हादसे के बाद लंबे समय तक तलाश चली लेकिन न शव मिले थे और न वाहन। अब 32 फुट की गहराई से भाखड़ा ने ये राज उगला है।
भाखड़ा नहर से मिली 26 साल पहले डूबी कार
- फोटो : संवाद
अक्तूबर 2000 में हुआ था हादसा
गांव कोटला में सभी ने उम्मीद छोड़ दी थी कि आज से 26 साल पहले 20 अक्तूबर 2000 को नहर में गिरे लोगों का कभी पता भी चलेगा। इस वैन में कोटला में मिठाई की दुकान करने वाले मुनी लाल (36), तेजराम (37) वैन के ड्राईवर, किसान सुरजीत सिंह और उसका आठ साल का बेटा कालू सवार थे। सभी शादी से लाैट रहे थे तभी वैन के साथ सभी नहर में समा गए थे। तब परिजनों और गांव वालों ने उन्हें ढूंढने के लिए बहुत प्रयास किए थे लेकिन तब उनका कोई पता नहीं चल पाया था।
गांव कोटला में सभी ने उम्मीद छोड़ दी थी कि आज से 26 साल पहले 20 अक्तूबर 2000 को नहर में गिरे लोगों का कभी पता भी चलेगा। इस वैन में कोटला में मिठाई की दुकान करने वाले मुनी लाल (36), तेजराम (37) वैन के ड्राईवर, किसान सुरजीत सिंह और उसका आठ साल का बेटा कालू सवार थे। सभी शादी से लाैट रहे थे तभी वैन के साथ सभी नहर में समा गए थे। तब परिजनों और गांव वालों ने उन्हें ढूंढने के लिए बहुत प्रयास किए थे लेकिन तब उनका कोई पता नहीं चल पाया था।
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मातम मनाते परिजन
- फोटो : संवाद
लंबे समय तक चली थी तलाश
अब इलाके के सक्रिय गोताखोर कमलप्रीत सैनी को भाखड़ा नहर में एक व्यक्ति के शव की तलाश का काम साैंपा गया था। इसी दौरान उन्हें एक कार नहर की गहराई में मिली और उन्होंने कार को रस्सियों से बांधकर पुलिस की निगरानी में स्थानीय लोगों की सहायता से बाहर निकाला।
जब कार डूबी तब उसमें सवार सभी एक शादी समारोह में शिरकत करके गांव लौट रहे थे। भाखड़ा नहर में डूबी ओमनी वैन को ढूंढ़ने के लिए परिवार और इलाके के लोगों ने धनरात्रि एकत्र करके गोताखोरों की टीम भी बुलाई थी। हरिद्वार और देहरादून तक से तीन चार बार गोताखोरों की टीमों को बुलाया था। टीमों ने पहली बार आठ किलोमीटर तक और दूसरी बार सोलह किलोमीटर तक भाखड़ा नहर का चप्पा चप्पा छान मारा लेकिन कार नहीं मिली थी। इन टीमों को परिजनों व गांववासियों ने कुल ढाई लाख से भी ज्यादा की राशि उन दिनों दी थी।
अब इलाके के सक्रिय गोताखोर कमलप्रीत सैनी को भाखड़ा नहर में एक व्यक्ति के शव की तलाश का काम साैंपा गया था। इसी दौरान उन्हें एक कार नहर की गहराई में मिली और उन्होंने कार को रस्सियों से बांधकर पुलिस की निगरानी में स्थानीय लोगों की सहायता से बाहर निकाला।
जब कार डूबी तब उसमें सवार सभी एक शादी समारोह में शिरकत करके गांव लौट रहे थे। भाखड़ा नहर में डूबी ओमनी वैन को ढूंढ़ने के लिए परिवार और इलाके के लोगों ने धनरात्रि एकत्र करके गोताखोरों की टीम भी बुलाई थी। हरिद्वार और देहरादून तक से तीन चार बार गोताखोरों की टीमों को बुलाया था। टीमों ने पहली बार आठ किलोमीटर तक और दूसरी बार सोलह किलोमीटर तक भाखड़ा नहर का चप्पा चप्पा छान मारा लेकिन कार नहीं मिली थी। इन टीमों को परिजनों व गांववासियों ने कुल ढाई लाख से भी ज्यादा की राशि उन दिनों दी थी।
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कार से मिलीं हड्डियां
- फोटो : संवाद
क्षतिग्रस्त कार में मिली हड्डियां व कालू की कमीज
गोताखोर कमलप्रीत सैनी ने बताया कि ओमनी वैन की पिछली सीट और वैन की छत का पिछला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। कार में से हड्डियां मिली हैं और एक स्कूल ड्रेस वाली कमीज मिली है जो आठ साल के कालू की है।
गोताखोर कमलप्रीत सैनी ने बताया कि ओमनी वैन की पिछली सीट और वैन की छत का पिछला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। कार में से हड्डियां मिली हैं और एक स्कूल ड्रेस वाली कमीज मिली है जो आठ साल के कालू की है।
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नहर से बरामद कार
- फोटो : संवाद
पातालपुरी साहिब में विसर्जन
मुनी लाल के परिजन दीपक कुमार ने बताया कि जब हादसा हुआ तो वे खुद बच्चे थे। परिवारों ने तो आस ही छोड़ दी थी कि कभी अब नहर में डूबी वैन का कुछ पता चलेगा। अब बुरी तरह क्षतिग्रस्त वैन मिली है और उसमें से उनके परिजनों की कुछ अस्थियां मिली हैं जिनका परिजनों द्वारा पूरे रीति रिवाज के साथ पातालपुरी साहिब कीरतपुर साहिब में जाकर विसर्जन किया गया है।
मुनी लाल के बेटे गुरविंदर सिंह, पत्नी सीता देवी और तेजराम के बेटे भूपिंदर सिंह व पत्नी परमजीत कौर ने कहा कि उन्हें इस बात का मलाल है कि परमात्मा ने उनको 26 साल तड़पाया पर इस बात का सुकून भी है कि अपने परिजनों की अस्थियों का वो अपने हाथों से विसर्जन कर पाए हैं। एसएचओ कीरतपुर साहिब राहुल शर्मा ने कहा कि मामला पुराना है। कानून मुताबिक पुलिस कार्रवाई की जा रही है।
मुनी लाल के परिजन दीपक कुमार ने बताया कि जब हादसा हुआ तो वे खुद बच्चे थे। परिवारों ने तो आस ही छोड़ दी थी कि कभी अब नहर में डूबी वैन का कुछ पता चलेगा। अब बुरी तरह क्षतिग्रस्त वैन मिली है और उसमें से उनके परिजनों की कुछ अस्थियां मिली हैं जिनका परिजनों द्वारा पूरे रीति रिवाज के साथ पातालपुरी साहिब कीरतपुर साहिब में जाकर विसर्जन किया गया है।
मुनी लाल के बेटे गुरविंदर सिंह, पत्नी सीता देवी और तेजराम के बेटे भूपिंदर सिंह व पत्नी परमजीत कौर ने कहा कि उन्हें इस बात का मलाल है कि परमात्मा ने उनको 26 साल तड़पाया पर इस बात का सुकून भी है कि अपने परिजनों की अस्थियों का वो अपने हाथों से विसर्जन कर पाए हैं। एसएचओ कीरतपुर साहिब राहुल शर्मा ने कहा कि मामला पुराना है। कानून मुताबिक पुलिस कार्रवाई की जा रही है।